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यहां कूड़े से बनेगी बिजली, इस मुसीबत से भी मिलेगा छुटकारा
Sun, 16 Dec 2018 12:06 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 16 Dec 2018 12:06 PM IST
सार
- कनेडियन कंपनी ने कूूड़ा निस्तारण प्लांट का निरीक्षण कर दी सैद्धांतिक सहमति
- जनवरी में आईएलएफएस और कनेडियन कंपनी करेगी अनुबंध
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विस्तार
कानपुर के पनकी और न्यू ट्रांसपोर्ट नगर के लिए नासूर बने कूड़ा निस्तारण प्लांट में कूड़े के पहाड़ों से एक साल में निजात मिल जाएगी। यहां कूड़े से बिजली बनाई जाएगी। यह कार्य कनाडा की कंपनी इनेको सिस्टम इनकार्पोरेशन करेगी।
शनिवार को कंपनी के प्रतिनिधियों ने प्लांट का निरीक्षण कर सैद्धांतिक सहमति दे दी है। सब कुछ तय योजना के तहत हुआ तो जनवरी में इस कंपनी का आईएलएफएस से एमओयू (अनुबंध) होते ही काम शुरू हो जाएगा।
नगर निगम के अधिशासी अभियंता (पर्यावरण) ने बताया कि कंपनी पहले कूड़े से आरडीएफ (रिफ्यूज ड्राइब्ड फ्यूल) और जैविक खाद बनाएगी। इससे एक साल में प्लांट का सारा कूड़ा समाप्त हो जाएगा। इसी बीच प्लांट में कूड़े से बिजली बनाने वाले प्लांट की मरम्मत होगी। फिर कंपनी रोज करीब 1500 मीट्रिक टन ताजे कूड़े को कंप्रेस्ड कर मीथेन गैस और आरडीएफ तैयार करेगी।
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शनिवार को कंपनी के प्रतिनिधियों ने प्लांट का निरीक्षण कर सैद्धांतिक सहमति दे दी है। सब कुछ तय योजना के तहत हुआ तो जनवरी में इस कंपनी का आईएलएफएस से एमओयू (अनुबंध) होते ही काम शुरू हो जाएगा।
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नगर निगम के अधिशासी अभियंता (पर्यावरण) ने बताया कि कंपनी पहले कूड़े से आरडीएफ (रिफ्यूज ड्राइब्ड फ्यूल) और जैविक खाद बनाएगी। इससे एक साल में प्लांट का सारा कूड़ा समाप्त हो जाएगा। इसी बीच प्लांट में कूड़े से बिजली बनाने वाले प्लांट की मरम्मत होगी। फिर कंपनी रोज करीब 1500 मीट्रिक टन ताजे कूड़े को कंप्रेस्ड कर मीथेन गैस और आरडीएफ तैयार करेगी।
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उसे ब्वायलरों में डालने के बाद पूरा प्रोसेस करते हुए हर दिन करीब 15 मेगावाट बिजली बनेगी। कंपनी 7.50 रुपये प्रति यूनिट बिजली बेचेगी। बिजली बनने में होने वाले घाटे की भरपाई प्रदेश सरकार करेगी।
कंपनी के अधिकारी ग्लेन फ्रांसिस, अरुण बासु, तपन रामचंदर आदि ने महापौर प्रमिला पांडेय, नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा, पर्यावरण अभियंता आरके पाल, आईएलएफएस के वरिष्ठ अधिकारी आरके गुप्ता, प्रभारी अधिकारी शशांक शुक्ला आदि के साथ पनकी भऊ सिंह स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट का निरीक्षण किया।
प्लांट में ही अफसरों के साथ बैठक की। प्लांट को बिजली बनाने की लिए सही बताया। कनाडा की कंपनी के प्रतिनिधि तपन रामचंदर के अनुसार सबसे पहले आईएलएफएस बोर्ड की दो बैठकें होंगी, फिर एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे। इसके बाद कंपनी प्लांट में कूड़ा निस्तारण की प्रक्रिया शुरू करेगी। नगर आयुक्त ने प्लांट में कूड़ा निस्तारण प्रक्रिया सुस्त होने पर आईएलएफएस के अफसरों को फटकारा। प्लांट में दो गार्ड तैनात किए।
कंपनी के अधिकारी ग्लेन फ्रांसिस, अरुण बासु, तपन रामचंदर आदि ने महापौर प्रमिला पांडेय, नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा, पर्यावरण अभियंता आरके पाल, आईएलएफएस के वरिष्ठ अधिकारी आरके गुप्ता, प्रभारी अधिकारी शशांक शुक्ला आदि के साथ पनकी भऊ सिंह स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट का निरीक्षण किया।
प्लांट में ही अफसरों के साथ बैठक की। प्लांट को बिजली बनाने की लिए सही बताया। कनाडा की कंपनी के प्रतिनिधि तपन रामचंदर के अनुसार सबसे पहले आईएलएफएस बोर्ड की दो बैठकें होंगी, फिर एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे। इसके बाद कंपनी प्लांट में कूड़ा निस्तारण की प्रक्रिया शुरू करेगी। नगर आयुक्त ने प्लांट में कूड़ा निस्तारण प्रक्रिया सुस्त होने पर आईएलएफएस के अफसरों को फटकारा। प्लांट में दो गार्ड तैनात किए।
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आसपास के शहरों को भी मिलेगी कूूड़े से निजात
प्लांट में बिजली बनाने के लिए रोज 1500 मीट्रिक टन कूड़े की जरूरत पड़ेगी। चूंकि शहर से इतना कूड़ा नहीं निकलता है। इसलिए आसपास के शहरों, कस्बों का भी कूड़ा इसी प्लांट में लाकर निस्तारित किया जाएगा। इससे संबंधित शहरों, कस्बों को भी कूड़े की समस्या से निजात मिलेगी।
- शहर से रोज निकल रहा 1100 मीट्रिक टन कूड़ा
- कूड़ा निस्तारण प्लांट में रोज निस्तारित हो रहा कूड़ा - 600 - 800 मीट्रिक टन
- कूड़ा निस्तारण प्लांट में इकट्ठा कूड़ा - 1.5 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा
प्लांट में बिजली बनने से फायदे
आसपास के क्षेत्रों में कूड़े की बदबू से राहत मिलेगी। बीमारियां फैलने का खतरा कम होगा। क्षेत्र भी साफसुधरा दिखेगा। न्यू ट्रांसपोर्ट नगर विकसित करने में आडे़ आ रही कूड़े की समस्या भी दूर हो जाएगी।
प्लांट में बिजली बनाने के लिए रोज 1500 मीट्रिक टन कूड़े की जरूरत पड़ेगी। चूंकि शहर से इतना कूड़ा नहीं निकलता है। इसलिए आसपास के शहरों, कस्बों का भी कूड़ा इसी प्लांट में लाकर निस्तारित किया जाएगा। इससे संबंधित शहरों, कस्बों को भी कूड़े की समस्या से निजात मिलेगी।
- शहर से रोज निकल रहा 1100 मीट्रिक टन कूड़ा
- कूड़ा निस्तारण प्लांट में रोज निस्तारित हो रहा कूड़ा - 600 - 800 मीट्रिक टन
- कूड़ा निस्तारण प्लांट में इकट्ठा कूड़ा - 1.5 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा
प्लांट में बिजली बनने से फायदे
आसपास के क्षेत्रों में कूड़े की बदबू से राहत मिलेगी। बीमारियां फैलने का खतरा कम होगा। क्षेत्र भी साफसुधरा दिखेगा। न्यू ट्रांसपोर्ट नगर विकसित करने में आडे़ आ रही कूड़े की समस्या भी दूर हो जाएगी।