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चीख-पुकार, दहशत हाहाकार
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sun, 26 Apr 2015 03:05 AM IST
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‘न मजहब, न शोहरत और न ही रंगो का फर्क था, ऐे मौत! तेरे डर से आज सभी चेहरे एक से नजर आए’। सुना तो बहुत था पर शहरियों ने शनिवार को भूकंप को वास्तविक रूप से देख लिया। देखने से तात्पर्य महसूस करने से है। आमतौर पर अपने शहर में भूकंप के झटके इतने हल्के आते रहे हैं कि महसूस नहीं होते थे।
कोई दूसरा बताता था कि भूकंप आया था तो मान लेते थे। पर शनिवार का भूकंप अलग था। जो जहां, जिस हालत में था, उसने भूकंप साफ-साफ महसूस किया।
किसी का पलंग हिल रहा था, कोई कुर्सी पर बैठे-बैठे डोल रहा था, किसी की मेज थरथराई, किसी की बाइक ‘पंचर’ की तरह लहराई, किसी की रसोई में टंगी कलछुल-चम्मच पैंडुलम की तरह हिली तो किसी के घर में कामवाली बर्तन मांजते समय चिल्लाई ‘भागो भूकंप आया’। दोपहर 11.43 बजे के बाद शहर में भूकंप के अलावा कोई चर्चा नहीं थी।
तारीफ करनी होगी जागरूक शहरियों की जो तुरंत घरों से बाहर निकल कर खुले स्थानों में पहुंच गए पर बहुत से लोग अपने-अपने घरों के बाहर ही खड़े रहे। ऐसा नहीं करना चाहिए। भूकंप के समय घरों से निकलकर तुरंत खुले स्थानों जैसे पार्क-मैदान में पहुंचना चाहिए। खैर, शुक्र है ऊपरवाले का कि शहर में कोई अनहोनी नहीं हुई।
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प्रकृति ने हौले से थपकी दी है, हमें सतर्क रहना चाहिए। भूकंप के झटकों से पूरे शहर में दहशत के बीच भगदड़ और अफरातफरी मच गई। किसी को कुछ नहीं सूझ रहा था। सभी लोग चिल्ला रहे थे भूकंप आया-भूकंप आया। लोग एक-दूसरे से तस्दीक भी कर रहे थे कि ‘आया न’, तुम्हे झटके लगे न।
सभी लोग खुले स्थानों की तरफ दौड़ पड़े। स्कूलों की छुट्टी कर दी गई और अभिभावक बच्चों को लेने भागे। एक-एक बाइक पर अड़ोस-पड़ोस के बच्चों को भी लोग लाद कर ले जा रहे थे। मम्मियां आंचल से मुंह ढके सुबकती भागी चली जा रही थीं। जितने कान, उतने मोबाइल। फोन से लोग एक दूसरे की खैर कुशल के साथ सूचनाएं लेते रहे।
इसी बीच करीब सभी मोबाइल कंपनी का नेटवर्क धड़ाम रहा। घनी बस्तियों और मल्टी स्टोरी बिल्डिंग्स के लोगों ने फूलबाग, नानाराव पार्क, कौशलपुरी हनुमान पार्क और मोतीझील के पार्कों में डेरा जमा लिया था। मोतीझील में कारगिल पार्क, तुलसी उपवन और बाल उद्यान के सभी गेट खोल दिए गए थे।
नजारा यह रहा कि किदवई नगर स्थित पीएनबी में उपभोक्ता व बैंक स्टाफ ताला डालकर बाहर खड़ा था। मरियम पब्लिक स्कूल बकरमंडी की टीचरें अपनी-अपनी क्लास के बच्चों को लेकर जैसे-तैसे बाहर भागे। दहशत के बारे में कई बच्चे रोने लगे तो कई अचानक ऐसा होने से सहम गए।
कचहरी में जिला जज समेत सभी न्यायिक अफसर पीएसी कैंप के पास खड़े थे। सिपाही बंदियों को लेकर खुले में आकर खड़े हो गए। विजय नगर, दादा नगर, गड़रियनपुरवा, फजलगंज फैक्ट्री एरिया, जाजमऊ में फैक्ट्रियों में मशीनें बंद कर कर्मचारियों की छुट्टी कर दी गई।
लाल इमली मिल का टावर गिरने की अफवाह उड़ गई तो ग्वालटोली, चुन्नीगंज और सिविल लाइंस तक दहशत फैल गई। हैलट, उर्सला, चेस्ट हास्पिटल सहित तमाम अस्पतालों से मरीज और तीमारदार भी भागकर सड़क पर आ गए। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग से बच्चों को बाहर कर दिया गया।
सिर्फ इमरजेंसी और एसएनसीयू में भर्ती बच्चे ही अंदर रहे। उर्सला में भूकंप आने के बाद ऑपरेशन टाल दिए गए। म्यूजिकल फाउंटेन पार्क में भजन-कीर्तन शुरू हो गया। अफवाहें बढ़ती ही जा रही थीं। किदवई नगर स्थित भार्गव नसिंग होम गिरने की अफवाह फैली तो मछरिया में पानी टंकी ध्वस्त होने का हल्ला मचा।
किदवई नगर मदर टेरसा स्कूल बिल्डिंग चटकने की खबर उड़ने पर पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी पहुंच गए। स्वरूप नगर, तिलक नगर, आर्यनगर, सिविल लाइंस की मल्टीस्टोरी इमारतों से लोग बाहर निकलकर सड़क पर जमा हो गए। कोई अपनी कार बाहर निकाल रहा था तो कोई मोबाइल से अपने बच्चों के सकुशल होने की जानकारी करने में जुटा था।
भूकंप का दूसरा झटका आया तो भागमभाग और तेज हो गई। अफसरों ने मॉल खाली कराने के आदेश दे दिए। रेवमोती, रेवथ्री, जेड स्क्वायर, साउथ एक्स मॉल को खाली करवा दिया गया। घरों से निकले लोग दोपहर बाद 3 बजे तक पार्को में ही आसरा लिए रहे।
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कोई दूसरा बताता था कि भूकंप आया था तो मान लेते थे। पर शनिवार का भूकंप अलग था। जो जहां, जिस हालत में था, उसने भूकंप साफ-साफ महसूस किया।
किसी का पलंग हिल रहा था, कोई कुर्सी पर बैठे-बैठे डोल रहा था, किसी की मेज थरथराई, किसी की बाइक ‘पंचर’ की तरह लहराई, किसी की रसोई में टंगी कलछुल-चम्मच पैंडुलम की तरह हिली तो किसी के घर में कामवाली बर्तन मांजते समय चिल्लाई ‘भागो भूकंप आया’। दोपहर 11.43 बजे के बाद शहर में भूकंप के अलावा कोई चर्चा नहीं थी।
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तारीफ करनी होगी जागरूक शहरियों की जो तुरंत घरों से बाहर निकल कर खुले स्थानों में पहुंच गए पर बहुत से लोग अपने-अपने घरों के बाहर ही खड़े रहे। ऐसा नहीं करना चाहिए। भूकंप के समय घरों से निकलकर तुरंत खुले स्थानों जैसे पार्क-मैदान में पहुंचना चाहिए। खैर, शुक्र है ऊपरवाले का कि शहर में कोई अनहोनी नहीं हुई।
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प्रकृति ने हौले से थपकी दी है, हमें सतर्क रहना चाहिए। भूकंप के झटकों से पूरे शहर में दहशत के बीच भगदड़ और अफरातफरी मच गई। किसी को कुछ नहीं सूझ रहा था। सभी लोग चिल्ला रहे थे भूकंप आया-भूकंप आया। लोग एक-दूसरे से तस्दीक भी कर रहे थे कि ‘आया न’, तुम्हे झटके लगे न।
सभी लोग खुले स्थानों की तरफ दौड़ पड़े। स्कूलों की छुट्टी कर दी गई और अभिभावक बच्चों को लेने भागे। एक-एक बाइक पर अड़ोस-पड़ोस के बच्चों को भी लोग लाद कर ले जा रहे थे। मम्मियां आंचल से मुंह ढके सुबकती भागी चली जा रही थीं। जितने कान, उतने मोबाइल। फोन से लोग एक दूसरे की खैर कुशल के साथ सूचनाएं लेते रहे।
इसी बीच करीब सभी मोबाइल कंपनी का नेटवर्क धड़ाम रहा। घनी बस्तियों और मल्टी स्टोरी बिल्डिंग्स के लोगों ने फूलबाग, नानाराव पार्क, कौशलपुरी हनुमान पार्क और मोतीझील के पार्कों में डेरा जमा लिया था। मोतीझील में कारगिल पार्क, तुलसी उपवन और बाल उद्यान के सभी गेट खोल दिए गए थे।
नजारा यह रहा कि किदवई नगर स्थित पीएनबी में उपभोक्ता व बैंक स्टाफ ताला डालकर बाहर खड़ा था। मरियम पब्लिक स्कूल बकरमंडी की टीचरें अपनी-अपनी क्लास के बच्चों को लेकर जैसे-तैसे बाहर भागे। दहशत के बारे में कई बच्चे रोने लगे तो कई अचानक ऐसा होने से सहम गए।
कचहरी में जिला जज समेत सभी न्यायिक अफसर पीएसी कैंप के पास खड़े थे। सिपाही बंदियों को लेकर खुले में आकर खड़े हो गए। विजय नगर, दादा नगर, गड़रियनपुरवा, फजलगंज फैक्ट्री एरिया, जाजमऊ में फैक्ट्रियों में मशीनें बंद कर कर्मचारियों की छुट्टी कर दी गई।
लाल इमली मिल का टावर गिरने की अफवाह उड़ गई तो ग्वालटोली, चुन्नीगंज और सिविल लाइंस तक दहशत फैल गई। हैलट, उर्सला, चेस्ट हास्पिटल सहित तमाम अस्पतालों से मरीज और तीमारदार भी भागकर सड़क पर आ गए। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग से बच्चों को बाहर कर दिया गया।
सिर्फ इमरजेंसी और एसएनसीयू में भर्ती बच्चे ही अंदर रहे। उर्सला में भूकंप आने के बाद ऑपरेशन टाल दिए गए। म्यूजिकल फाउंटेन पार्क में भजन-कीर्तन शुरू हो गया। अफवाहें बढ़ती ही जा रही थीं। किदवई नगर स्थित भार्गव नसिंग होम गिरने की अफवाह फैली तो मछरिया में पानी टंकी ध्वस्त होने का हल्ला मचा।
किदवई नगर मदर टेरसा स्कूल बिल्डिंग चटकने की खबर उड़ने पर पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी पहुंच गए। स्वरूप नगर, तिलक नगर, आर्यनगर, सिविल लाइंस की मल्टीस्टोरी इमारतों से लोग बाहर निकलकर सड़क पर जमा हो गए। कोई अपनी कार बाहर निकाल रहा था तो कोई मोबाइल से अपने बच्चों के सकुशल होने की जानकारी करने में जुटा था।
भूकंप का दूसरा झटका आया तो भागमभाग और तेज हो गई। अफसरों ने मॉल खाली कराने के आदेश दे दिए। रेवमोती, रेवथ्री, जेड स्क्वायर, साउथ एक्स मॉल को खाली करवा दिया गया। घरों से निकले लोग दोपहर बाद 3 बजे तक पार्को में ही आसरा लिए रहे।