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आर्गेनिक खेती से तीन गुना की कमाई
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खेत में तैयार मटर की फसल दिखाते राजकुमार द्विवेदी। संवाद
- फोटो : AKBARPUR
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रनियां। परंपरागत खेती के बजाय आर्गेनिक खेती कर कस्बे के राजकुमार द्विवेदी ने अलग पहचान बनाई है। दस बीघा खेत से शुरू हुआ सफर अब तीस बीघा तक पहुंच गया है। ऑर्गेनिक तरीके से कीटनाशक रहित अन्न व सब्जियों का दाम भी अधिक मिलता है। फसल लागत घट गई है तो आमदनी करीब तीन गुना हो गई है। खेतीबाड़ी का उनका तरीका अब अन्य किसान भी अपना रहे हैं।
कस्बा निवासी राजकुमार द्विवेदी ने पिता स्व. नरेंद्र शंकर द्विवेदी से खेती की बारीकियां सीखी। शिक्षाशास्त्र में परास्नातक राजकुमार का रुझान आर्गेनिक खेती की तरफ हुआ तो उन्होंने खुद अध्ययन से बारीकियां सीखीं। दस बीघा खेत में आर्गेनिक खेती की शुरुआत की। बाद में आमदनी बढ़ी तो बीस बीघा खेत बलकट पर और ले लिया। केमिकल युक्त उर्वरक व कीटनाशकों का प्रयोग बंदकर वह पूरी तरह जैविक तरीके से फसलें उगाते हैं। खुद ही तैयार की गई जैविक खाद, डिकंपोजर व जीवामृत कीटनाशक का प्रयोग फसलों पर करते हैं। इससे लागत में काफी कमी आई तो आमदनी करीब तीन गुना बढ़ गई है। वह कहते हैं कि महंगे उर्वरक व कीटनाशक खेत की उर्वरा शक्ति को नुकसान करते हैं। आर्गेनिक तरीके से खेती कर प्रतिवर्ष करीब छह लाख की आमदनी हो रही है। अधिकांश अनाज घर से ही बिक जाता है। सब्जियां रनियां व चकरपुर मंडी में आढ़तियों को थोक बेचते हैं।
तीन और किसानों ने चुनी राजकुमार की राह
राजकुमार के नक्शेकदम पर तीन और किसान चल पड़े हैं। रनियां निवासी दीपू, रामकिशन व श्याम शुक्ला ने बताया कि अब वह भी आर्गेनिक खेती कर रहे हैं।
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कस्बा निवासी राजकुमार द्विवेदी ने पिता स्व. नरेंद्र शंकर द्विवेदी से खेती की बारीकियां सीखी। शिक्षाशास्त्र में परास्नातक राजकुमार का रुझान आर्गेनिक खेती की तरफ हुआ तो उन्होंने खुद अध्ययन से बारीकियां सीखीं। दस बीघा खेत में आर्गेनिक खेती की शुरुआत की। बाद में आमदनी बढ़ी तो बीस बीघा खेत बलकट पर और ले लिया। केमिकल युक्त उर्वरक व कीटनाशकों का प्रयोग बंदकर वह पूरी तरह जैविक तरीके से फसलें उगाते हैं। खुद ही तैयार की गई जैविक खाद, डिकंपोजर व जीवामृत कीटनाशक का प्रयोग फसलों पर करते हैं। इससे लागत में काफी कमी आई तो आमदनी करीब तीन गुना बढ़ गई है। वह कहते हैं कि महंगे उर्वरक व कीटनाशक खेत की उर्वरा शक्ति को नुकसान करते हैं। आर्गेनिक तरीके से खेती कर प्रतिवर्ष करीब छह लाख की आमदनी हो रही है। अधिकांश अनाज घर से ही बिक जाता है। सब्जियां रनियां व चकरपुर मंडी में आढ़तियों को थोक बेचते हैं।
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तीन और किसानों ने चुनी राजकुमार की राह
राजकुमार के नक्शेकदम पर तीन और किसान चल पड़े हैं। रनियां निवासी दीपू, रामकिशन व श्याम शुक्ला ने बताया कि अब वह भी आर्गेनिक खेती कर रहे हैं।