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Kanpur News: डेढ़ महीने से नहीं बने ई-रिक्शा चालकों के लाइसेंस, 250 आवेदन लंबित
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कानपुर। आरटीओ कार्यालय में ई-रिक्शा चालकों के लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया करीब डेढ़ महीने से ठप है। ऐसे में आवेदकों को आरटीओ के चक्कर काटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। पोर्टल पर अब तक करीब 250 से अधिक आवेदन आ चुके हैं। ट्रेनिंग स्कूलों का फर्जीवाड़ा खुलने के बाद आरटीओ जोनल आरआर सोनी ने प्रमाण पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है। इसके बाद आरआई आकांक्षा सिंह की ओर से एक भी लाइसेंस जारी नहीं किया गया है। वहीं दो सप्ताह पहले दोनों ट्रेनिंग सेंटरों के संचालकों ने जारी नोटिस का जवाब नहीं दिया है।
आरटीओ कार्यालय में पारदर्शिता के लिए शासन ने ज्यादातर कार्यों को ऑनलाइन कर दिया है। इसके बाद भी जिम्मेदार नियमों की धज्जियां उड़ाए हैं। वर्ष 2021 से ई-रिक्शा ड्राइविंग लाइसेंस के लिए शासन से नामित मकान नंबर 342 कैलाशनगर जाजमऊ और गीतानगर मेट्रो स्टेशन समीप स्थित सहाय ई-रिक्शा ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल संचालक बिना ई-रिक्शा और बिना ट्रेनिंग सेंटर के 10 दिन का चालक का प्रशिक्षण प्रमाण पत्र जारी कर रहे थे। इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर आरटीओ के अधिकारी ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर रहे थे। शासन स्तर से यह प्रमाण पत्र अनिवार्य भी नहीं था। शिकायत के बाद जब आरटीओ जोनल ने आरआई से जांच कराई तो ट्रेनिंग सेंटरों की पोल खुली। संचालकों का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद आरआई आकांक्षा सिंह ने प्रमाण पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है। 19 सितंबर से लेकर अब तक लाइसेंस के करीब 250 से अधिक आवेदन चुके हैं लेकिन एक भी लाइसेंस नहीं बना है।
700 रुपये फीस, वसूलते हैं साढ़े तीन से चार हजार रुपये
ई-रिक्शा ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना है तो इसके लिए सेंटर संचालक खुद ही पूरा जिम्मा ले लेते हैं। एक लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदक से 3500 से 4000 रुपये तक वसूले जाते हैं जबकि सरकारी फीस सिर्फ 700 रुपये ही है। इसमें से 500 से 600 रुपये प्रमाण पत्र के नाम पर ट्रेनिंग संचालक लेता है। शेष धनराशि बंदरबाट हो जाती है। अगर कोई इनसे संपर्क किए बिना लाइसेंस बनवाने पहुंचता है तो वह कार्यालय के चक्कर ही काटता रहता है।
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वर्जन-
ट्रेनिंग संचालकों ने अभी तक नोटिस का जवाब नहीं दिया है। इस सप्ताह अगर जवाब नहीं देते हैं तो इनके टेंडर निरस्त कर दूसरे ट्रेनिंग सेंटर नामित किए जाएंगे। पूरे नियम से लाइसेंस बनाए जाएंगे। लंबित लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया जल्द पूरी होगी। - आरआर सोनी, आरटीओ जोनल
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आरटीओ कार्यालय में पारदर्शिता के लिए शासन ने ज्यादातर कार्यों को ऑनलाइन कर दिया है। इसके बाद भी जिम्मेदार नियमों की धज्जियां उड़ाए हैं। वर्ष 2021 से ई-रिक्शा ड्राइविंग लाइसेंस के लिए शासन से नामित मकान नंबर 342 कैलाशनगर जाजमऊ और गीतानगर मेट्रो स्टेशन समीप स्थित सहाय ई-रिक्शा ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल संचालक बिना ई-रिक्शा और बिना ट्रेनिंग सेंटर के 10 दिन का चालक का प्रशिक्षण प्रमाण पत्र जारी कर रहे थे। इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर आरटीओ के अधिकारी ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर रहे थे। शासन स्तर से यह प्रमाण पत्र अनिवार्य भी नहीं था। शिकायत के बाद जब आरटीओ जोनल ने आरआई से जांच कराई तो ट्रेनिंग सेंटरों की पोल खुली। संचालकों का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद आरआई आकांक्षा सिंह ने प्रमाण पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है। 19 सितंबर से लेकर अब तक लाइसेंस के करीब 250 से अधिक आवेदन चुके हैं लेकिन एक भी लाइसेंस नहीं बना है।
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700 रुपये फीस, वसूलते हैं साढ़े तीन से चार हजार रुपये
ई-रिक्शा ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना है तो इसके लिए सेंटर संचालक खुद ही पूरा जिम्मा ले लेते हैं। एक लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदक से 3500 से 4000 रुपये तक वसूले जाते हैं जबकि सरकारी फीस सिर्फ 700 रुपये ही है। इसमें से 500 से 600 रुपये प्रमाण पत्र के नाम पर ट्रेनिंग संचालक लेता है। शेष धनराशि बंदरबाट हो जाती है। अगर कोई इनसे संपर्क किए बिना लाइसेंस बनवाने पहुंचता है तो वह कार्यालय के चक्कर ही काटता रहता है।
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वर्जन-
ट्रेनिंग संचालकों ने अभी तक नोटिस का जवाब नहीं दिया है। इस सप्ताह अगर जवाब नहीं देते हैं तो इनके टेंडर निरस्त कर दूसरे ट्रेनिंग सेंटर नामित किए जाएंगे। पूरे नियम से लाइसेंस बनाए जाएंगे। लंबित लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया जल्द पूरी होगी। - आरआर सोनी, आरटीओ जोनल