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एक सीखने संबंधी विकार है डिस्लेक्सिया::सीडीओ
Tue, 19 Nov 2024 01:19 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Tue, 19 Nov 2024 01:19 AM IST
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फोटो 41::डायट परिसर में प्रशिक्षण के शुभारंभ पर जानकारी देते सीडीओ अजय कुमार गौतम।
डायट परिसर में सीडीओ अजय कुमार गौतम ने किया प्रशिक्षण का शुभांरभ
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से डिस्लेक्सिया व अटेंशन डेफिसिट एंड हाइपर एक्टिविटी सिंड्रोम से प्रभावित बच्चों के पठन-पाठन के लिए मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण डायट परिसर में शुरू हो गया है।
यह प्रशिक्षण 18 से 21 तक चलेगा। जिसमें इस विधा से जुड़े उच्च कोटि के चिकित्सकों एवं प्रशिक्षकों के माध्यम से विभिन्न स्तर एवं विभागों के अध्यापकों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का शुभारंभ सीडीओ अजय कुमार गौतम ने दीप प्रज्वलित कर किया। सीडीओ ने कहा कि डिस्लेक्सिया किसी बच्चे की बुद्धिमत्ता का प्रतिविंब न होकर वास्तव में उनकी योग्यता और उपलब्धि के बीच अंतर के रूप में परिभाषित किया जाता है।
डिस्लेक्सिया एक सीखने संबंधी विकार है। जिसमें भाषण ध्वनियों की पहचान करने और कुछ सीखने में समस्या होती है। यह भाषा में ध्वनियों को पहचानने और उनका उपयोग करने की बच्चे की क्षमता को प्रभावित करता है। बच्चे को शब्दों को समझने, पढ़ने लिखने और वर्तनी में कठिनाई होती है।
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इसके लक्षण कक्षा तीन तक आते-आते बच्चे में प्रतिविंबित होने लगते हैं। जिसको हम विशेष रणनीतियों के साथ शैक्षणिक माध्यमों से काफी हद तक ठीक कर सकते हैं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में बेसिक/माध्यमिक शिक्षा विभाग, अल्पसंख्यक विभाग, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग में पंजीकृत संस्थाओं के 50 शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में विकसित करने के लिए राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई एवं जिला अस्पताल के साइक्लोजिस्ट/ क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट के साथ-साथ इस क्षेत्र के प्रवीण विशेषज्ञों की ओर से प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। डायट प्राचार्य प्रेमपाल सिंह, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, डॉ. उष्मा तिवारी, डॉ.उदभव तिवारी रहे।
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डायट परिसर में सीडीओ अजय कुमार गौतम ने किया प्रशिक्षण का शुभांरभ
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इटावा। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से डिस्लेक्सिया व अटेंशन डेफिसिट एंड हाइपर एक्टिविटी सिंड्रोम से प्रभावित बच्चों के पठन-पाठन के लिए मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण डायट परिसर में शुरू हो गया है।
यह प्रशिक्षण 18 से 21 तक चलेगा। जिसमें इस विधा से जुड़े उच्च कोटि के चिकित्सकों एवं प्रशिक्षकों के माध्यम से विभिन्न स्तर एवं विभागों के अध्यापकों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का शुभारंभ सीडीओ अजय कुमार गौतम ने दीप प्रज्वलित कर किया। सीडीओ ने कहा कि डिस्लेक्सिया किसी बच्चे की बुद्धिमत्ता का प्रतिविंब न होकर वास्तव में उनकी योग्यता और उपलब्धि के बीच अंतर के रूप में परिभाषित किया जाता है।
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डिस्लेक्सिया एक सीखने संबंधी विकार है। जिसमें भाषण ध्वनियों की पहचान करने और कुछ सीखने में समस्या होती है। यह भाषा में ध्वनियों को पहचानने और उनका उपयोग करने की बच्चे की क्षमता को प्रभावित करता है। बच्चे को शब्दों को समझने, पढ़ने लिखने और वर्तनी में कठिनाई होती है।
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इसके लक्षण कक्षा तीन तक आते-आते बच्चे में प्रतिविंबित होने लगते हैं। जिसको हम विशेष रणनीतियों के साथ शैक्षणिक माध्यमों से काफी हद तक ठीक कर सकते हैं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में बेसिक/माध्यमिक शिक्षा विभाग, अल्पसंख्यक विभाग, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग में पंजीकृत संस्थाओं के 50 शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में विकसित करने के लिए राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई एवं जिला अस्पताल के साइक्लोजिस्ट/ क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट के साथ-साथ इस क्षेत्र के प्रवीण विशेषज्ञों की ओर से प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। डायट प्राचार्य प्रेमपाल सिंह, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, डॉ. उष्मा तिवारी, डॉ.उदभव तिवारी रहे।