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Kanpur News: यमुना का जलस्तर बढ़ा, आढ़न के साथ पड़ाव की पुलिया भी डूबी
Wed, 30 Jul 2025 01:14 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Wed, 30 Jul 2025 01:14 AM IST
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सेंगुर नदी में चपरघटा पुराने पुल तक पानी।
- फोटो : संवाद
मूसानगर। यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से चपरघटा के आढ़न-पथार के साथ पड़ाव गांव के रास्ते की पुलिया भी डूब गई है। इससे छह गांवों का आवागमन नाव से किया जा रहा है। नाव से जाने पर स्कूली बच्चों और रोजाना काम पर जाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा ये लोग कार्यस्थल भी देरी से पहुंच रहे हैं। वहीं, पानी बढ़ने से सैकड़ों बीघा ज्वार, बाजरा, मक्का की फसल डूब गई। मूसानगर में यमुना नदी का जलस्तर लाल निशान से सिर्फ दो मीटर नीचे है। छह गावों की करीब छह हजार की आबादी बाढ़ आने को लेकर चिंतित भी है।
कोटा बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद से यमुना नदी में रविवार रात से लगातार जलस्तर बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की चिंताएं भी बढ़ रही हैं। लोगों को मवेशियों के चारे की भी समस्या सताने लगी है। प्रशासन की ओर से अभी दो नाव चलाई जा रही हैं। एक महीने में तीसरी बार यमुना नदी का जलस्तर बढ़ा। जिसके कारण सेंगुर नदी में उफान आने से चपरघटा के आढ़न-पथार रास्ते व पड़ाव के रास्ते की पुलिया भी इस बार डूब गई है। इससे रसूलपुर, चतुरी पुरवा, भुंडा, कुंभापुर, का संपर्क टूट गया।
सेंगुर नदी का पानी मुगल रोड में बने पुराने पुल को छूने लगा है। ग्रामीण देवीगुलाम, रामसजीवन, हीरालाल, रामऔतार ने बताया कि बाढ़ आने से हर साल परेशानी होती है। जिसकी भरपाई साल भर करनी पड़ती है। लोग ऊंचाई पर चारे आदि को काटकर एकत्रित करने लगे हैं। एसडीएम देवेंद्र सिंह ने बताया कि दो नाव चल रही हैं। बढ़ते जलस्तर के कारण लोगों का आवश्यकता होने पर ही आवागमन करने के लिए कहा गया है। बाढ़ नियंत्रण चौकी चपरघटा में राजस्व निरीक्षक, लेखपाल को निगरानी करने के लिए आदेशित किया गया है। केंद्रीय जल आयोग के कार्यालय मूसानगर के कर्मचारी अनिल गुप्ता ने बताया की शाम छह बजे यमुना नदी का जलस्तर 105.30 दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से दो मीटर नीचे है।
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........................जलस्तर बढ़ने से फसलों को लेकर किसान चिंतित
राजपुर। सीमावर्ती जनपदों में लगातार हो रही बारिश और राजस्थान के कोटा बैराज से 2.90 लाख क्यूसेक पानी चंबल और यमुना नदी में छोड़े जाने से सिकंदरा तहसील के बेहमई यमुना नदी में लगातार जलस्तर बढ़ रहा है। लगातार जलस्तर बढ़ने से यमुना नदी किनारे बसे महदेवा, बैजामऊ बांगर भुपैय्यापुर बछाटी आदि गांवों के रास्तों की ओर पानी बढ़ने लगा है। किसानों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने से यमुना के किनारे बोई गई बाजरा, मक्का, सब्जियों की फसलों में पानी भर जाएगा। जैसलपुर के प्रधान रामकेश ने बताया कि यमुना नदी में बढ़ते जलस्तर से बाढ़ की संभावना बढ़ गई है। तहसीलदार सिकंदरा राकेश चंद्रा ने बताया कि यमुना में बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन पूरी नजर बनाए हुए हैं। चार गांव में बाढ़ चौकिया सक्रिय की गई हैं। क्षेत्रीय लेखपाल, ग्राम प्रधान व निगरानी समिति को जलस्तर पर कड़ी नजर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।(संवाद)
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बाढ़ से व्यवसाय, शिक्षा, इलाज सब होता प्रभावित
फोटो- नाव से आवागमन करते ग्रामीण। संवाद.......
फोटो- निशा देवी। स्वयं
ग्रामीणों ने बयां की परेशानी--
आढ़न पथार की पुलिया डूबने से सबसे ज्यादा परेशानी लोगों को आने जाने में होती है। यदि कोई बीमार पड़ जाए तो समय से अस्पताल पहुंचाना मुश्किल होता है। बाढ़ आने से समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं। नाव के लिए इंतजार करना पड़ता है। - निशा देवी, आशा कार्यकर्ता पथार
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फोटो- डा. आलोक निषाद । स्वयं
प्राइवेट विद्यालय में शिक्षक हूं। बाढ़ के समय में बच्चों को नाव से स्कूल आना जाना खतरे से खाली नहीं होता। पढ़ाई प्रभावित होती है। साथ ही शिक्षण कार्य भी बंद करना पड़ता है। इस समय आढ़न-पथार पुलिया डूबने से आवाजाही में परेशानी होने लगी है। डॉ. आलोक निषाद, पथार
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फोटो- गजराज। स्वयं
हर वर्ष बाढ़ से समस्या उत्पन्न होती है। यमुना नदी का जलस्तर बढ़ते ही सबसे पहले चपरघटा ग्राम पंचायत के मजरा आढ़न-पथार की पुलिया डूबती है। कई बार पुलिया ऊंचाई कराकर निर्माण कराने की मांग की गई है, मगर पुलिया ऊंची नहीं हुई। यमुना का जल स्तर बढ़ने पर पुलिया डूबने के साथ फसल डूबती हैं तो मुआवजे के नाम पर मिली राशि न नाकाफी साबित होती है। - गजराज सिंह, आढ़न
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फोटो- संतोष कुमार
गांवों में पशु पालन प्रमुख व्यवसाय है। बाढ़ से दूध के काम में बड़ा प्रभाव पड़ता है। नाव से लेकर जाना पड़ता है। नहीं पहुंच पाने पर दूध खराब हो जाता है। गांव में बिजली काट दी जाती है। मोबाइल तक चार्ज नही हो पाते। - संतोष कुमार, पथार
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कोटा बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद से यमुना नदी में रविवार रात से लगातार जलस्तर बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की चिंताएं भी बढ़ रही हैं। लोगों को मवेशियों के चारे की भी समस्या सताने लगी है। प्रशासन की ओर से अभी दो नाव चलाई जा रही हैं। एक महीने में तीसरी बार यमुना नदी का जलस्तर बढ़ा। जिसके कारण सेंगुर नदी में उफान आने से चपरघटा के आढ़न-पथार रास्ते व पड़ाव के रास्ते की पुलिया भी इस बार डूब गई है। इससे रसूलपुर, चतुरी पुरवा, भुंडा, कुंभापुर, का संपर्क टूट गया।
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सेंगुर नदी का पानी मुगल रोड में बने पुराने पुल को छूने लगा है। ग्रामीण देवीगुलाम, रामसजीवन, हीरालाल, रामऔतार ने बताया कि बाढ़ आने से हर साल परेशानी होती है। जिसकी भरपाई साल भर करनी पड़ती है। लोग ऊंचाई पर चारे आदि को काटकर एकत्रित करने लगे हैं। एसडीएम देवेंद्र सिंह ने बताया कि दो नाव चल रही हैं। बढ़ते जलस्तर के कारण लोगों का आवश्यकता होने पर ही आवागमन करने के लिए कहा गया है। बाढ़ नियंत्रण चौकी चपरघटा में राजस्व निरीक्षक, लेखपाल को निगरानी करने के लिए आदेशित किया गया है। केंद्रीय जल आयोग के कार्यालय मूसानगर के कर्मचारी अनिल गुप्ता ने बताया की शाम छह बजे यमुना नदी का जलस्तर 105.30 दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से दो मीटर नीचे है।
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........................जलस्तर बढ़ने से फसलों को लेकर किसान चिंतित
राजपुर। सीमावर्ती जनपदों में लगातार हो रही बारिश और राजस्थान के कोटा बैराज से 2.90 लाख क्यूसेक पानी चंबल और यमुना नदी में छोड़े जाने से सिकंदरा तहसील के बेहमई यमुना नदी में लगातार जलस्तर बढ़ रहा है। लगातार जलस्तर बढ़ने से यमुना नदी किनारे बसे महदेवा, बैजामऊ बांगर भुपैय्यापुर बछाटी आदि गांवों के रास्तों की ओर पानी बढ़ने लगा है। किसानों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने से यमुना के किनारे बोई गई बाजरा, मक्का, सब्जियों की फसलों में पानी भर जाएगा। जैसलपुर के प्रधान रामकेश ने बताया कि यमुना नदी में बढ़ते जलस्तर से बाढ़ की संभावना बढ़ गई है। तहसीलदार सिकंदरा राकेश चंद्रा ने बताया कि यमुना में बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन पूरी नजर बनाए हुए हैं। चार गांव में बाढ़ चौकिया सक्रिय की गई हैं। क्षेत्रीय लेखपाल, ग्राम प्रधान व निगरानी समिति को जलस्तर पर कड़ी नजर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।(संवाद)
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बाढ़ से व्यवसाय, शिक्षा, इलाज सब होता प्रभावित
फोटो- नाव से आवागमन करते ग्रामीण। संवाद.......
फोटो- निशा देवी। स्वयं
ग्रामीणों ने बयां की परेशानी
आढ़न पथार की पुलिया डूबने से सबसे ज्यादा परेशानी लोगों को आने जाने में होती है। यदि कोई बीमार पड़ जाए तो समय से अस्पताल पहुंचाना मुश्किल होता है। बाढ़ आने से समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं। नाव के लिए इंतजार करना पड़ता है। - निशा देवी, आशा कार्यकर्ता पथार
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फोटो- डा. आलोक निषाद । स्वयं
प्राइवेट विद्यालय में शिक्षक हूं। बाढ़ के समय में बच्चों को नाव से स्कूल आना जाना खतरे से खाली नहीं होता। पढ़ाई प्रभावित होती है। साथ ही शिक्षण कार्य भी बंद करना पड़ता है। इस समय आढ़न-पथार पुलिया डूबने से आवाजाही में परेशानी होने लगी है। डॉ. आलोक निषाद, पथार
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फोटो- गजराज। स्वयं
हर वर्ष बाढ़ से समस्या उत्पन्न होती है। यमुना नदी का जलस्तर बढ़ते ही सबसे पहले चपरघटा ग्राम पंचायत के मजरा आढ़न-पथार की पुलिया डूबती है। कई बार पुलिया ऊंचाई कराकर निर्माण कराने की मांग की गई है, मगर पुलिया ऊंची नहीं हुई। यमुना का जल स्तर बढ़ने पर पुलिया डूबने के साथ फसल डूबती हैं तो मुआवजे के नाम पर मिली राशि न नाकाफी साबित होती है। - गजराज सिंह, आढ़न
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फोटो- संतोष कुमार
गांवों में पशु पालन प्रमुख व्यवसाय है। बाढ़ से दूध के काम में बड़ा प्रभाव पड़ता है। नाव से लेकर जाना पड़ता है। नहीं पहुंच पाने पर दूध खराब हो जाता है। गांव में बिजली काट दी जाती है। मोबाइल तक चार्ज नही हो पाते। - संतोष कुमार, पथार