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Kanpur News: 200 बाल शुगर रोगियों की पूरी जिम्मेदारी उठा रहीं डॉ. संगीता
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कानपुर। नेत्र विशेषज्ञ डॉ. संगीता शुक्ला पिछले 30 साल से शुगर के बाल रोगियों के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने ऐसे 200 बाल शुगर रोगियों के इंसुलिन के इंजेक्शन और दवाओं के खर्च का जिम्मा उठा रखा है। इसके लिए वह अपने सहयोगियों से मदद भी लेती हैं। ये वे रोगी हैं जिनके घर वालों के पास इतना महंगा इलाज कराने की क्षमता नहीं है।
दीनदयालनगर निवासी डॉ. संगीता पेशे अपने पति के साथ मिलकर पिछले 30 साल से सोसाइटी फॉर प्रिवेंशन एंड अवेयरनेस ऑफ डाइबिटीज संस्था चला रही हैं। डॉ. संगीता ने बताया कि उनके पास अभी 700 बच्चे हैं जिसमें 200 बच्चों की दवाओं, इंजेक्शन और पढ़ाई तक की जिम्मेदारी उठाई है। बाकी बच्चों को समय-समय पर जिस चीज की जरूरत होती है उनको भी पूरी करती हैं। उन्होंने बताया कि हम ऐसे बच्चों को मानसिक तौर पर मजबूत बनाने व उन्हें रोग के प्रति जागरूक करने के लिए महीने के हर चौथे रविवार को बैठक करते हैं। इसमें वक्ता गैर जिलों और राज्यों से बुलाए जाते हैं और वे बच्चों को जागरूक करते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों को समय पर दवा और इंजेक्शन लगना जरूरी होता है। अगर समय पर दवा न दी जाए कई बार चक्कर आना या बेहोशी जैसी स्थिति भी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि इसलिए स्कूलों में जाकर हम शिक्षकों को भी जागरूक कर रहे हैं कि इन बच्चों को कब-कब दवा देनी है। उन्होंने बताया कि शुगर रोगी बेटियां ज्यादा परेशान हो जाती हैं। उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी काम कर रहे हैं क्योंकि लोग कह देते हैं कि अरे बच्चे को अभी से शुगर है तो आगे क्या होगा। इसके लिए उन्हें मानसिक तौर पर तैयार करना भी हमारी जिम्मेदारी है ताकि वे समाज का ठीक ढंग से सामना कर सकें। डॉ. संगीता ने शुगर से ग्रसित ऐसे बच्चों जिनकी आंख में समस्या हुई तो उनका निशुल्क ऑपरेशन भी किया है। ऐसे 17 बच्चे हैं।
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दीनदयालनगर निवासी डॉ. संगीता पेशे अपने पति के साथ मिलकर पिछले 30 साल से सोसाइटी फॉर प्रिवेंशन एंड अवेयरनेस ऑफ डाइबिटीज संस्था चला रही हैं। डॉ. संगीता ने बताया कि उनके पास अभी 700 बच्चे हैं जिसमें 200 बच्चों की दवाओं, इंजेक्शन और पढ़ाई तक की जिम्मेदारी उठाई है। बाकी बच्चों को समय-समय पर जिस चीज की जरूरत होती है उनको भी पूरी करती हैं। उन्होंने बताया कि हम ऐसे बच्चों को मानसिक तौर पर मजबूत बनाने व उन्हें रोग के प्रति जागरूक करने के लिए महीने के हर चौथे रविवार को बैठक करते हैं। इसमें वक्ता गैर जिलों और राज्यों से बुलाए जाते हैं और वे बच्चों को जागरूक करते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों को समय पर दवा और इंजेक्शन लगना जरूरी होता है। अगर समय पर दवा न दी जाए कई बार चक्कर आना या बेहोशी जैसी स्थिति भी हो सकती है।
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उन्होंने कहा कि इसलिए स्कूलों में जाकर हम शिक्षकों को भी जागरूक कर रहे हैं कि इन बच्चों को कब-कब दवा देनी है। उन्होंने बताया कि शुगर रोगी बेटियां ज्यादा परेशान हो जाती हैं। उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी काम कर रहे हैं क्योंकि लोग कह देते हैं कि अरे बच्चे को अभी से शुगर है तो आगे क्या होगा। इसके लिए उन्हें मानसिक तौर पर तैयार करना भी हमारी जिम्मेदारी है ताकि वे समाज का ठीक ढंग से सामना कर सकें। डॉ. संगीता ने शुगर से ग्रसित ऐसे बच्चों जिनकी आंख में समस्या हुई तो उनका निशुल्क ऑपरेशन भी किया है। ऐसे 17 बच्चे हैं।
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