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Kanpur: डॉ. नवनीत बोले- खुशबू पता न चले…कराएं पार्किंसन की जांच, डोपामीन न्यूरो केमिकल की कमी से होता है रोग

Wed, 02 Oct 2024 11:13 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 02 Oct 2024 11:13 AM IST
सार

Kanpur News: डॉ. नवनीत कुमार ने कहा कि वर्ष 1817 में न्यूरोलॉजिस्ट जेम्स पार्किंसन ने इस बीमारी को पहचाना था। यह बीमारी डोपामीन की कमी से 60 साल की उम्र के बाद शुरू होती है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में रोग अधिक होता है।

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Dr. Navneet said you should not able to detect fragrance, get tested for Parkinson, dopamine neurochemical
डॉ. नवनीत कुमार - फोटो : amar ujala

विस्तार

नाक से सुगंध का पता न चले, जोड़ों में दर्द, नींद में दिक्कत, याददाश्त की कमी और चिड़चिड़ापन हो, तो पार्किंसन को लेकर सचेत हो जाएं। पार्किंसन रोग शुरू होने के 10 साल पहले से ये लक्षण आने लगते हैं। बाद में रोगी के मस्तिष्क में डोपामीन न्यूरो केमिकल की कमी हो जाती है। अगर रोग के लक्षण पहले पहचान लें, तो रोग से बचाव हो सकता है।

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यह बात जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नवनीत कुमार ने बताई। प्रयत्न संस्था के बैनर तले पार्किंसन अपडेट-2024 वैज्ञानिक कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार को कल्याणपुर स्थित एक होटल में किया गया। इसमें डॉ. नवनीत कुमार मुख्या वक्ता रहे। उन्होंने बताया कि महर्षि चरक ने इस रोग को कंपवात नाम दिया था। वर्ष 1817 में न्यूरोलॉजिस्ट जेम्स पार्किंसन ने इस बीमारी को पहचाना।
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यह बीमारी डोपामीन की कमी से 60 साल की उम्र के बाद शुरू होती है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में रोग अधिक होता है। कार्यक्रम के चेयरमैन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. एसके कटियार थे। संचालन संस्था के सचिव डॉ. प्रवीण कटियार और संयोजन डॉ. पंकज गुलाटी ने किया। यहां डॉ. आरएन चौरसिया, डॉ. दिनेश सिंह सचान, डॉ. पल्लवी चौरसिया, डॉ. अमर सिंह, डॉ. कविता गुलाटी आदि रहे।

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ये भी लक्षण
-शरीर का मूवमेंट धीमा हो जाए, शरीर की मांसपेशियों में कड़ापन आने लगे, हाथों में कंपन हो, पलक झपकने में कमी, लिखने में राइटिंग छोटी हो जाए।

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