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कानपुरः सीरियल ब्लास्ट में साथ देने वालों की तलाश में आया था डॉ. बम

Sat, 18 Jan 2020 03:24 AM IST
संजीव कुमार झा सुनील कुमार मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
सुनील कुमार मिश्र, अमर उजाला, कानपुर Published by: संजीव कुमार झा Updated Sat, 18 Jan 2020 03:24 AM IST
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Dr Jalees Ansari came in search of those who helped in the serial blast
जलीस अंसारी

फेथफुलगंज से पकड़ा गया इंडियन मुजाहिदीन का आतंकी डॉ. जलीस उर्फ डॉ. बम सीरियल ब्लास्ट में साथ देने वाले अल्वी, राशिद और पीटर की तलाश में शहर आया था। साल 1993 में इन तीनों ने जलीस के बनाए बमों से हावड़ा एक्सप्रेस और दिल्ली एक्सप्रेस में ब्लास्ट किया था।

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इन तीनों से डॉ. जलीस की मुलाकात कानपुर में ही हुई थी। सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि जलीस पुराने नेटवर्क को फिर से जिंदा करने शहर आया था, लेकिन इन तीनों के न मिलने पर वह गोरखपुर की ट्रेन पकड़कर नेपाल भागने की फिराक में था।
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आईजी एसटीएफ अमिताभ यश ने बताया कि 1992 में पाकिस्तान से भारत आकर जलीस ने आईएसआई का पूरा नेटवर्क संभाल लिया था। हूजी, सिमी, हिजबुल मुजाहिदीन केआतंकियों को वह प्रशिक्षण देने लगा था।
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जनसंख्या अधिक होने की वजह से कानपुर को उसने छिपने और अपनी गतिविधियां आसानी से संचालित करने के लिए मुफीद समझा, सो यहां अपना ठिकाना बना लिया। जलीस ने कानपुर के अल्वी, राशिद और पीटर को आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन में शामिल करा दिया।  आशंका है कि वह इन तीनों को ही ढूंढने यहां आया था।

जलीस के बनाए टाइम बम को ट्रेन में किया था प्लांट

आईजी अमिताभ यश के मुताबिक जलीस के बनाए टाइम बम को 5 दिसंबर 1993 को अल्वी, राशिद और पीटर ने कानपुर रेलवे स्टेशन पर हावड़ा एक्सप्रेस और दिल्ली एक्सप्रेस में प्लांट किया था।

यहां से रवाना होने के बाद आगे जाकर दोनों ट्रेनों में सुबह करीब 6:30 बजे एक साथ ब्लास्ट हुआ था। इसके बाद जलीस ने टीएनटी बम से हैदराबाद, पुणे और मालेगांव में बम धमाके किए थे।

जलीस की गिरफ्तारी के कुछ दिन बाद ही अल्वी और राशिद भी पकड़ लिए गए थे। तीनों को अलग-अलग कोर्ट से सजा सुनाई गई थी, जिस वजह से जलीस को अपने साथियों की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी नहीं थी।

घंटाघर में विस्फोट से चर्चित हुआ डॉक्टर बम का नाम

1993 केसीरियल धमाकों के एक साल बाद 1994 में घंटाघर में हुए विस्फोट से कानपुर दहल गया था। जलीस के इशारे पर हिजबुल का आतंकी खालिद घंटाघर स्थित बस अड्डे पर रोडवेज बस में बम प्लांट करने निकला था।

वह साइकिल से बम लेकर जा रहा था। दो अन्य युवक उसके साथ थे। घंटाघर चौराहे पर उसकी साइकिल एक गाड़ी से टकराई और वहीं बम फट गया। धमाका इतना तेज था कि तीन मंजिल की इमारत का एक बड़ा हिस्सा ढह गया था।

धमाके के समय मौजूद बीट सिपाही त्रिपुरारी पाण्डेय ने खालिद को दबोच लिया था, लेकिन जलीस और उसका साथी नूर मोहम्मद फरार हो गए थे, जो एक साल बाद दिल्ली में पकड़े गए थे। इसी वारदात के बाद जलीस का नाम डॉक्टर बम पड़ गया था।

गणतंत्र दिवस के पहले आतंकी की दस्तक से सतर्कता बढ़ी। गणतंत्र दिवस के ठीक पहले सीरियल ब्लास्ट के मास्टरमाइंड आतंकी डॉ. जलीस की शहर में दस्तक से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।

गौस मोहम्मद से जेल में हो रही पूछताछ

एअरफोर्स से रिटायर्ड गौस मोहम्मद ने खुरासान माड्यूल को कानपुर में स्थापित किया था। सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि जलीस के इशारे पर ही गौस मोहम्मद ने माड्यूल तैयार किया था।

आतंकी सैफुल्लाह के लखनऊ में एनकाउंटर के बाद गौस को उसके साथियों समेत गिरफ्तार कर लिया गया था। जलीस के पकड़े जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अब जेल में उससे पूछताछ कर रही हैं।

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