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योजनाएं न गिनाओ, लाभ हुआ हो तो बताओ
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Wed, 10 Feb 2016 01:56 AM IST
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काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के सभागार में मंगलवार को माहौल तो गोष्ठी जैसा था लेकिन कमिश्नर मो. इफ्तिखारुद्दीन के तेवर ने उसे समीक्षा बैठक में तब्दील कर दिया। उद्यमियों को मंच से योजनाओं की जानकारी दे रहे अफसर को बीच में रोककर बोले, बंद करिए योजनाओं का पिटारा।
ये सभी योजनाएं पुरानी हैं। बताइए इन योजनाओं का लाभ कितना मिला। नहीं मिला तो क्यों नहीं मिला? पिछले एक साल का आंकड़ा पेश करें। खासकर कानपुर का, क्योंकि यह उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है और इसके विकास की जिम्मेदारी आपकी और मेरी है। कमिश्नर संयुक्त आयुक्त उद्योग की ओर से आयोजित ‘उद्योग और व्यापार सुगमता’ गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे।
एमएसएमई विकास संस्थान के अधिकारी उद्योग आधार मेमोरंडम, बार कोड, आईएसआई मार्क आदि के बारे में जानकारी देने के बाद एमएसएमई इकाइयों से 20 फीसदी सरकारी खरीद अनिवार्य होने के बारे में बताने लगे। कमिश्नर ने पूछा, कानपुर को कितना लाभ मिला इससे। इस पर अधिकारी चुप हो गए।
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उद्यमियों ने बताया कि इसका फायदा नहीं मिल रहा क्योंकि हर प्रदेश में टैक्स अलग-अलग है। विभाग कम टैक्स वाले प्रदेश से खरीद कर लेते हैं? कमिश्नर बोले, किसी न किसी इंडस्ट्री को तो लाभ जरूर हुआ होगा? कोई जवाब नहीं मिला तो कमिश्नर ने कहा कि जब योजनाओं से होने वाले लाभ हानि की जानकारी नहीं तो योजनाएं गिनाने का क्या फायदा? उन्होंने एमएसएमई के अधिकारियों से कहा कि उन्हें एक महीने के अंदर दस्तावेजी जानकारी चाहिए कि 20 फीसदी खरीदी अनिवार्य होने से कानपुर और आसपास के जिले की इंडस्ट्री को कितना लाभ मिला?
इसके बाद अधिकारी ने बताया कि विभाग की ओर से देशभर में कई औद्योगिक मेले लगवाए गए। इस पर भी कमिश्नर ने सवाल दागा कि कानपुर के कितने उद्यमियों ने हिस्सा लिया और उन्हें इन मेलों से क्या लाभ मिला? इसका भी जवाब अधिकारी नहीं दे सके। कमिश्नर ने हर तरह की योजनाओं से लाभ हानि की जानकारी एक माह के अंदर जुटाने का आदेश दिया।
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ये सभी योजनाएं पुरानी हैं। बताइए इन योजनाओं का लाभ कितना मिला। नहीं मिला तो क्यों नहीं मिला? पिछले एक साल का आंकड़ा पेश करें। खासकर कानपुर का, क्योंकि यह उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है और इसके विकास की जिम्मेदारी आपकी और मेरी है। कमिश्नर संयुक्त आयुक्त उद्योग की ओर से आयोजित ‘उद्योग और व्यापार सुगमता’ गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे।
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एमएसएमई विकास संस्थान के अधिकारी उद्योग आधार मेमोरंडम, बार कोड, आईएसआई मार्क आदि के बारे में जानकारी देने के बाद एमएसएमई इकाइयों से 20 फीसदी सरकारी खरीद अनिवार्य होने के बारे में बताने लगे। कमिश्नर ने पूछा, कानपुर को कितना लाभ मिला इससे। इस पर अधिकारी चुप हो गए।
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उद्यमियों ने बताया कि इसका फायदा नहीं मिल रहा क्योंकि हर प्रदेश में टैक्स अलग-अलग है। विभाग कम टैक्स वाले प्रदेश से खरीद कर लेते हैं? कमिश्नर बोले, किसी न किसी इंडस्ट्री को तो लाभ जरूर हुआ होगा? कोई जवाब नहीं मिला तो कमिश्नर ने कहा कि जब योजनाओं से होने वाले लाभ हानि की जानकारी नहीं तो योजनाएं गिनाने का क्या फायदा? उन्होंने एमएसएमई के अधिकारियों से कहा कि उन्हें एक महीने के अंदर दस्तावेजी जानकारी चाहिए कि 20 फीसदी खरीदी अनिवार्य होने से कानपुर और आसपास के जिले की इंडस्ट्री को कितना लाभ मिला?
इसके बाद अधिकारी ने बताया कि विभाग की ओर से देशभर में कई औद्योगिक मेले लगवाए गए। इस पर भी कमिश्नर ने सवाल दागा कि कानपुर के कितने उद्यमियों ने हिस्सा लिया और उन्हें इन मेलों से क्या लाभ मिला? इसका भी जवाब अधिकारी नहीं दे सके। कमिश्नर ने हर तरह की योजनाओं से लाभ हानि की जानकारी एक माह के अंदर जुटाने का आदेश दिया।