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किडनी कांड : ट्रांसप्लांट में पहले रिसीवर के घर पर ठहराए जाते थे डोनर
Wed, 06 Mar 2019 03:24 PM IST
शिखा पांडेय
वाचस्पति पांडेय, अमर उजाला, कानपुर
वाचस्पति पांडेय, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 06 Mar 2019 03:24 PM IST
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किडनी कांड में रोज नए-नए खुलासों की कड़ी में एक और अहम जानकारी सामने आई है। डोनर और रिसीवर के बीच बनावटी रिश्ते को समझने के लिए तरह-तरह के खेल खेले जाते थे। डोनर को रिसीवर के घर पर तीन से चार महीने तक रखा जाता था।
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यहां पर वह रिसीवर के हर एक कार्यक्रम में शामिल होता था। बाकायदा कार्यक्रमों की फोटो और वीडियोग्राफी कराई जाती थी, जिसे ट्रांसप्लांट के लिए गठित की गई कमेटी के सामने रखा जाता था।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक केतन और टी राजकुमार का गैंग डोनर इकट्ठा करता था। पीएसआरई की कोऑर्डिनेटर सुनीता वर्मा, मिथुन और फोर्टिस की कोऑर्डिनेटर सोनिका रिसीवर लाते थे।
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फिर किसी न किसी बहाने रिसीवर को केतन से मिलवाते थे। इसके बाद डोनर और रिसीवर की मुलाकात केतन, गौरव व राजकुमार मिलकर करवाते थे। इसके पहले रिसीवर से पैसों की डील फाइनल कर ली जाती थी।
ये डोनर रिसीवर के घर ठहरे
डोनर शोएब संस्कार अग्रवाल बनकर बुलंदशहर निवासी रिसीवर अनिल अग्रवाल के घर पर रुका था। शोएब उनका बेटा बना था। डोनर वरदान अजीत गुप्ता बनकर दिल्ली में मधुकर गोयल के यहां रुका था। वरदान भतीजा बना था। दिल्ली में ही डोनर रईस ने भतीजा बनकर लखीमपुर खीरी निवासी कमल सिंह को किडनी दी थी। यही तरीका रईस मोहम्मद, राजा, विक्की, रामू पांडेय, चंद्रवती, कर्रही निवासी सत्यप्रकाश, आजमगढ़ निवासी राहुल, दिल्ली के विजेंद्र पाल सिंह, सुरेंद्र पाल सिंह और अंकित सिंह (सभी डोनर) के साथ अपनाया गया।