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पत्नी की सिर कटी लाश दफनाकर ऐसे बच निकलने की फिराक में था डॉक्टर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 31 Mar 2017 02:03 PM IST
सार
-फैसला सुरक्षित, आज सुनाया जा सकता फैसला दो डॉक्टरों समेत चार लोग झूठी गवाही में तलब
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विस्तार
पत्नी की हत्या और सबूत मिटाने के चक्कर में एक डॉक्टर ने क्या तिकड़म नहीं भिड़ाए लेकिन कहते हैं न गुनहगार को सजा मिल कर रहती है। इसे भी मिल कर रही।
पत्नी की हत्या और सबूत मिटाने के मामले में कानपुर के एडीजे 1 की कोर्ट ने डॉक्टर को दोषी करार दिया है। गुरुवार को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। शुक्रवार को डॉक्टर को सजा सुनाई जा सकती है। झूठी गवाही और गलत दस्तावेज देने में कोर्ट ने दो डॉक्टरों समेत चार लोगों को तलब किया है।
19 अक्टूबर 1982 को सर्वोदय नगर में ऊषा अग्रवाल का सिर कटा शव घर के ठीक बगल में मिला था। शरीर के अन्य हिस्सों में चोट के निशान थे। 21 अक्टूबर 1982 को ऊषा अग्रवाल के पति डॉ. गौतम अग्रवाल को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। बाद में यह मामला सीबीसीआईडी को दे दिया गया था। 17 जनवरी 1983 को सीबीसीआईडी ने डॉ. गौतम अग्रवाल, उनके पिता और मां के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
31 जुलाई 1984 को तत्कालीन एडीजे जीए फारूकी ने आरोप तय किए थे। इसमें डाक्टर की मां को आरोप मुक्त कर दिया था। हाईकोर्ट के आदेश पर 23 अक्टूबर 1997 तक केस स्टे रहा। बाद में हाईकोर्ट से फाइल लाने वाले बाबू ने फाइल दबा दी थी। जब फाइल कोर्ट में पेश की गई तो कुछ दस्तावेज उससे गायब थे। मामले की सुनवाई के दौरान एफटीसी कोर्ट में तत्कालीन थानाध्यक्ष काकादेव उदय प्रताप सिंह ने रिपोर्ट दी थी कि मुकदमे से जुड़े कुछ सबूत गायब हैं।
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वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी राजेश शुक्ला ने बताया कि गुरुवार को कोर्ट ने डॉक्टर को दोषी करार देते हुए फैसला सुरक्षित कर लिया। जीएसवीएम कॉलेज के डॉ. पुनीत अवस्थी, केजीएम कालेज लखनऊ के डॉ. हरजीत सिंह कालरा, मेरठ के विनय कुमार गोयल और कानपुर के अमरनाथ कटियार को झूठी गवाही और गलत दस्तावेज देने में कोर्ट ने तलब किया है।
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पत्नी की हत्या और सबूत मिटाने के मामले में कानपुर के एडीजे 1 की कोर्ट ने डॉक्टर को दोषी करार दिया है। गुरुवार को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। शुक्रवार को डॉक्टर को सजा सुनाई जा सकती है। झूठी गवाही और गलत दस्तावेज देने में कोर्ट ने दो डॉक्टरों समेत चार लोगों को तलब किया है।
19 अक्टूबर 1982 को सर्वोदय नगर में ऊषा अग्रवाल का सिर कटा शव घर के ठीक बगल में मिला था। शरीर के अन्य हिस्सों में चोट के निशान थे। 21 अक्टूबर 1982 को ऊषा अग्रवाल के पति डॉ. गौतम अग्रवाल को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। बाद में यह मामला सीबीसीआईडी को दे दिया गया था। 17 जनवरी 1983 को सीबीसीआईडी ने डॉ. गौतम अग्रवाल, उनके पिता और मां के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
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31 जुलाई 1984 को तत्कालीन एडीजे जीए फारूकी ने आरोप तय किए थे। इसमें डाक्टर की मां को आरोप मुक्त कर दिया था। हाईकोर्ट के आदेश पर 23 अक्टूबर 1997 तक केस स्टे रहा। बाद में हाईकोर्ट से फाइल लाने वाले बाबू ने फाइल दबा दी थी। जब फाइल कोर्ट में पेश की गई तो कुछ दस्तावेज उससे गायब थे। मामले की सुनवाई के दौरान एफटीसी कोर्ट में तत्कालीन थानाध्यक्ष काकादेव उदय प्रताप सिंह ने रिपोर्ट दी थी कि मुकदमे से जुड़े कुछ सबूत गायब हैं।
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वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी राजेश शुक्ला ने बताया कि गुरुवार को कोर्ट ने डॉक्टर को दोषी करार देते हुए फैसला सुरक्षित कर लिया। जीएसवीएम कॉलेज के डॉ. पुनीत अवस्थी, केजीएम कालेज लखनऊ के डॉ. हरजीत सिंह कालरा, मेरठ के विनय कुमार गोयल और कानपुर के अमरनाथ कटियार को झूठी गवाही और गलत दस्तावेज देने में कोर्ट ने तलब किया है।