फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Do farming, open shop, but dont go outside

खेती करेंगे, दुकान चलाएंगे पर बाहर नहीं जाएंगे

Sun, 17 May 2020 12:57 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 17 May 2020 12:57 AM IST
विज्ञापन
Do farming, open shop, but dont go outside
अहमदाबाद से कानपुर पहुँची श्रमिक स्पेशल ट्रेन-स्टेशन पर बस का इंतजार करते यात्री-फ़ोटो-गौरव-संवा?
सेंट्रल स्टेशन पर शनिवार को अहमदाबाद, मुंबई से ट्रेनों में आए मजदूरों ने आपबीती सुनाई। बताया कि रुपये खत्म हो गए थे। होटल बंद थे और घर में खाना बनाने के लिए बर्तन तक नहीं थे। इतना डर गए हैं कि गांव में खेती करेंगे, दुकान भी चला लेंगे पर अब दोबारा बाहर काम करने नहीं जाएंगे।
विज्ञापन

गुजरात-महाराष्ट्र से आईं तीन ट्रेनों में 2094 मजदूरों को सेंट्रल पर उतारा गया। इन्हें खाना-पानी देकर थर्मल स्क्रीनिंग कराई। अहमदाबाद से आई ट्रेन में 1600 श्रमिक, मुंबई से लखनऊ जाने वाली ट्रेन में कानपुर में 316 और अहमदाबाद से गोंडा जाने वाली ट्रेन में सेंट्रल पर 178 मजदूर उतरे। यहां से 88 रोडवेज बसों से 38 जिलों के मजदूरों को रवाना किया गया। इन बसों में खाने के पड़े पैकेट तक साफ नहीं किए गए थे। धूल-कालिख तक जमा थी।
विज्ञापन

भगवान का शुक्र है कि लौट आया। दिक्कत में एहसास होता है कि बड़े शहरों की चकाचौंध और रुपया पैसा सब धरा रह जाता है। इस बीमारी ने गांव की तरफ खींचा। खेतों करूंगा, छोटी मोटी दुकान चलाऊंगा लेकिन गांव छोड़कर नहीं जाऊंगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

- शुभम भदौरिया, फर्रुखाबाद
गुजरात में रंग बनाने वाली कंपनी के कारखाने में काम करता था। जब तक गांव से आता जाता था तो सेठ भी कद्र करता था। इस बीमारी ने उसने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। जीवन में बहुत दुश्वारियां झेलीं लेकिन इस बार गुजरात ने नर्क का एहसास कराया, कभी लौटकर नहीं जाऊंगा।
- शिवम सिंह, शाहजहांपुर
अहमदाबाद अपने रिश्तेदारों के यहां घूमने गई थी। लॉकडाउन में वहां फंस गई। एक तो जिनका घर था, वह लोग स्वयं इस महामारी से परेशान थे। ऊपर से हम लोग भी उनके घर में टिके हुए थे। पैदल नहीं आ सकते थे। रोज प्रार्थना करते थे कि किसी तरह ट्रेन चल जाए।

- गीता, कौशांबी
रिश्तेदार की तबीयत खराब थी। उनको देखने अहमदाबाद गई थी लेकिन वहां संक्रमण काल में फंस गईं। सभी भयभीत थे। पास पड़ोस के लोग एक दूसरे से बात नहीं करते थे। एक के बाद एक लॉकडाउन बढ़ रहा था और हमारी दिलों की धड़कनें भी। यहां घर में भी सब परेशान हो रहे थे।
- सुनीता, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed