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Kanpur: जवानों की नई ढाल पर बेअसर होंगी स्नाइपर की गोलियां, बुलेट प्रूफ जैकेट की ये है खासियत
Thu, 25 Apr 2024 07:29 PM IST
शिखा पांडेय
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 25 Apr 2024 07:29 PM IST
सार
डीएमएसआरडीई ने जवानों के लिए सबसे सुरक्षित बुलेट प्रूफ जैकेट बनाने में सफलता हासिल की है। जैकेट में लगने के बाद स्टेनलेस स्टील की गोलियां टूटकर बिखर जाएंगी।
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बुलेट प्रूफ जैकेट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रक्षा सामग्री एवं भंडार अनुसंधान तथा विकास स्थापना (डीएमएसआरडीई) कानपुर ने जवानों के लिए सबसे सुरक्षित बुलेट प्रूफ जैकेट बनाने में सफलता हासिल की है। जवानाें की नई ढाल पर स्टील, स्टेनलेस स्टील की गोलियां बेअसर होंगी और जैकेट में लगने के बाद टूटकर बिखर जाएंगी। इसका भार करीब 10 किलो है जो हल्की जैकेट की श्रेणी में आती है। इस जैकेट पर विदेशी मशीन गनों, स्नाइपर की गोलियां बेअसर होंगी। इस तरह की गोलियां नाटो देश, यूरोप, चीन, पाकिस्तान और अमेरिका की सेना इस्तेमाल करती है।
बीआईएस (भारतीय मानक ब्यूरो) संख्या 17051 के लेवल छह के अनुरूप बुलेट प्रूफ जैकेट तैयार की गई है। यह लेवल सबसे ज्यादा कठिन माना जाता है। जवानों को स्टील की गोलियाें से बचाने के लिए इसे तैयार किया गया है। यह देश में अब तक की पहली मोनोलिथिक प्लेट से बनी सबसे हल्की लेवल छह बुलेट प्रूफ जैकेट है। यह बुलेट प्रूफ जैकेट 7.62 गुणा 54 आर एपीआई राउंड की गोली को रोकने में सक्षम है। इस जैकेट का फ्रंट हार्ड आर्मर पैनल (एचीएप) 40 किलोग्राम (आईसीडब्ल्यू) और 43 किलोग्राम (स्टैंडअलोन) की एरियल डेंसिटी से भी कम है जो बीआईएस के मानकों से भी हल्का है।
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बीआईएस (भारतीय मानक ब्यूरो) संख्या 17051 के लेवल छह के अनुरूप बुलेट प्रूफ जैकेट तैयार की गई है। यह लेवल सबसे ज्यादा कठिन माना जाता है। जवानों को स्टील की गोलियाें से बचाने के लिए इसे तैयार किया गया है। यह देश में अब तक की पहली मोनोलिथिक प्लेट से बनी सबसे हल्की लेवल छह बुलेट प्रूफ जैकेट है। यह बुलेट प्रूफ जैकेट 7.62 गुणा 54 आर एपीआई राउंड की गोली को रोकने में सक्षम है। इस जैकेट का फ्रंट हार्ड आर्मर पैनल (एचीएप) 40 किलोग्राम (आईसीडब्ल्यू) और 43 किलोग्राम (स्टैंडअलोन) की एरियल डेंसिटी से भी कम है जो बीआईएस के मानकों से भी हल्का है।
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इस बुलेट प्रूफ जैकेट का हाल ही में टर्मिनल बैलिस्टिक अनुसंधान प्रयोगशाला चंडीगढ़ में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है। इस जैकेट का फ्रंट हार्ड आर्मर पैनल मोनोलिथिक सिरेमिक और पॉलीमर बेकिंग पदार्थ से बना है। इस कारण यह हल्की है। इसको पैनल 750 सेंटीमीटर से एक हजार सेंटीमीटर के साइज में विकसित किया गया है। यह पैनल कम से कम छह बुलेट को 50-60 एमएम की इंटरशॉट दूरी पर रोक सकता है। इस जैकेट के सभी बैलिस्टिक परीक्षण बीआईएस की कंडीशनिंग प्रोटोकॉल के अनुरूप किए गए हैं। इस जैकेट को आईसीडब्ल्यू. (हार्ड पैनल सॉफ्ट पैनल) तथा स्टैंडअलोन (केवल हार्ड आर्मर पैनल) दोनों ही डिजाइन में विकसित किया गया है।
एक साल में बनाई गई जैकेट
इस बुलेट प्रूफ जैकेट को डॉ. मयंक द्विवेदी, उत्कृष्ट वैज्ञानिक और निदेशक डीएमएसआरडीई कानपुर, परियोजना निदेशक डॉ. जेएन श्रीवास्तव और टीम के सदस्यों अजितेंद्र सिंह परिहार, अरुण कुमार समेत अन्य सदस्यों के प्रयासों से एक साल में तैयार किया गया है।
इस बुलेट प्रूफ जैकेट को डॉ. मयंक द्विवेदी, उत्कृष्ट वैज्ञानिक और निदेशक डीएमएसआरडीई कानपुर, परियोजना निदेशक डॉ. जेएन श्रीवास्तव और टीम के सदस्यों अजितेंद्र सिंह परिहार, अरुण कुमार समेत अन्य सदस्यों के प्रयासों से एक साल में तैयार किया गया है।