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Kanpur News: आरटीई में गड़बड़ी के आरोप में डीएम, बीएसए समेत पांच से जवाब तलब
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कानपुर। आरटीई में पात्र को प्रवेश न देने और अपात्रों के चयन के आरोपों को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। न्यायालय ने इस पर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए सुरजीत कुमार सिंह, सदर बाजार खंड शिक्षा अधिकारी शालिनी गुप्ता समेत दो निजी विद्यालयों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
परमट निवासी अंकित अग्रवाल ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया कि उनकी पुत्री अक्षयानी अग्रवाल का आरटीई में आवेदन होने के बावजूद विद्यालय आवंटन में नाम नहीं दिया गया, जबकि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आवेदन करने वाले कुछ अभ्यर्थियों को निजी विद्यालयों में प्रवेश दे दिया गया। याचिकाकर्ता ने बताया कि मामले में पांच उदाहरण प्रस्तुत कर बीएसए कार्यालय व जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का रुख किया।
वहीं, हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से स्पष्ट जवाब मांगा कि याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत पांच उदाहरणों में आवंटन निरस्त क्यों नहीं किया गया, चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन किस आधार पर किया गया, जांच अधिकारी ने समय से रिपोर्ट क्यों नहीं सौंपी, अनियमितता के बावजूद मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया और आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में उपलब्ध रिक्त सीटों पर पुनर्विचार क्यों नहीं किया गया।
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परमट निवासी अंकित अग्रवाल ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया कि उनकी पुत्री अक्षयानी अग्रवाल का आरटीई में आवेदन होने के बावजूद विद्यालय आवंटन में नाम नहीं दिया गया, जबकि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आवेदन करने वाले कुछ अभ्यर्थियों को निजी विद्यालयों में प्रवेश दे दिया गया। याचिकाकर्ता ने बताया कि मामले में पांच उदाहरण प्रस्तुत कर बीएसए कार्यालय व जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का रुख किया।
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वहीं, हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से स्पष्ट जवाब मांगा कि याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत पांच उदाहरणों में आवंटन निरस्त क्यों नहीं किया गया, चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन किस आधार पर किया गया, जांच अधिकारी ने समय से रिपोर्ट क्यों नहीं सौंपी, अनियमितता के बावजूद मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया और आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में उपलब्ध रिक्त सीटों पर पुनर्विचार क्यों नहीं किया गया।
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