{"_id":"61837f70aa9d59428a435a28","slug":"diwali-2021-laxmi-ganesh-puja-vidhi-shubh-muhurat-time","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Diwali 2021: मां लक्ष्मी का पूजन 28 गुना ज्यादा फायदेमंद, जानिए शुभ मुहूर्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Diwali 2021: मां लक्ष्मी का पूजन 28 गुना ज्यादा फायदेमंद, जानिए शुभ मुहूर्त
Thu, 04 Nov 2021 12:08 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 04 Nov 2021 12:08 PM IST
सार
भगवान राम के अयोध्या आगमन के बाद लक्ष्मी और विष्णु के पूजन का प्रचलन हुआ। गणेश जी बुद्धि के दाता तो लक्ष्मी जी धन वाहक हैं। महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए दीपक जलाए जाते हैं। इस बार मां लक्ष्मी का पूजन 28 गुना ज्यादा फायदेमंद होगा।
विज्ञापन
माता लक्ष्मी और गणेश पूजा
- फोटो : istock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दीपावली को दीप पूजन का पहला मुहूर्त प्रदोष का है। जो शाम 5:15 से 7:40 तक है, इस कालखंड में वृष स्थिर लग्न है। इसके बाद शाम 5:52 बजे से 7:40 बजे तक पूजा करने का सबसे उत्तम मुहूर्त है। यह जानकारी पद्मेश इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक साइंसेस के संस्थापक अध्यक्ष पं. केए दुबे पद्मेश ने दी।
उन्होंने बताया कि स्थिर लग्न सिंह, रात्रि 12:20 से 2:34 बजे तक है। महानिशीथ काल का पूजन रात्रि 11:19 से 12:11 बजे तक रहेगा। शाम 5:15 से 8:29 बजे तक अमृतचर की चौघड़िया बेला है। रात्रि 11:43 से 1:20 बजे के मध्य लाभ की चौघडिया बेला है।
व्यापारी लोग अपने संस्थान वृश्चिक लग्न सुबह 7:09 से 9:40 बजे के मध्य, कुंभ लग्न दोपहर 1:14 से 2:45 बजे के मध्य पूजा करें। पं. दीपक पांडेय ने बताया कि भगवान राम के अयोध्या आगमन के बाद लक्ष्मी और विष्णु के पूजन का प्रचलन हुआ। गणेश जी बुद्धि के दाता तो लक्ष्मी जी धन वाहक हैं। महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए दीपक जलाए जाते हैं। इस बार मां लक्ष्मी का पूजन 28 गुना ज्यादा फायदेमंद होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि स्थिर लग्न सिंह, रात्रि 12:20 से 2:34 बजे तक है। महानिशीथ काल का पूजन रात्रि 11:19 से 12:11 बजे तक रहेगा। शाम 5:15 से 8:29 बजे तक अमृतचर की चौघड़िया बेला है। रात्रि 11:43 से 1:20 बजे के मध्य लाभ की चौघडिया बेला है।
विज्ञापन
व्यापारी लोग अपने संस्थान वृश्चिक लग्न सुबह 7:09 से 9:40 बजे के मध्य, कुंभ लग्न दोपहर 1:14 से 2:45 बजे के मध्य पूजा करें। पं. दीपक पांडेय ने बताया कि भगवान राम के अयोध्या आगमन के बाद लक्ष्मी और विष्णु के पूजन का प्रचलन हुआ। गणेश जी बुद्धि के दाता तो लक्ष्मी जी धन वाहक हैं। महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए दीपक जलाए जाते हैं। इस बार मां लक्ष्मी का पूजन 28 गुना ज्यादा फायदेमंद होगा।
विज्ञापन
राशि के अनुसार भगवान को अर्पित करे चीजें
मेष - मोदक
वृष - इत्र
मिथुन - यज्ञोपवीत
कर्क - चंदन
सिंह - मदार पुष्प
कन्या - समी पत्र
तुला - हल्दी
वृश्चिक - इलायची
धनु - कैथा
मकर - कपूर
कुंभ - दूर्वा
मीन - सिंदूर
मेष - मोदक
वृष - इत्र
मिथुन - यज्ञोपवीत
कर्क - चंदन
सिंह - मदार पुष्प
कन्या - समी पत्र
तुला - हल्दी
वृश्चिक - इलायची
धनु - कैथा
मकर - कपूर
कुंभ - दूर्वा
मीन - सिंदूर