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सीएसजेएमयू: शिक्षक अनुमोदन में फर्जीवाड़े का हुआ खुलासा, जांच में सामने आई चौंकाने वाली हकीकत
Thu, 17 Jan 2019 12:52 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 17 Jan 2019 12:52 PM IST
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कानपुर स्थित छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) से संबद्ध महाविद्यालयों में शिक्षकों की अनुमोदन प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इसका एक ताजा मामला सामने आया है।
पूज्य भाऊराव देवरस महाविद्यालय, सरवनखेड़ा, कानपुर देहात में वनस्पति विज्ञान विभाग की प्रवक्ता प्रगति ओमर का आरोप है कि चार साल पहले उसका देवरस कॉलेज से किसी ने अनुमोदन निरस्त करा दिया और फिर गुपचुप तरीके से एमएससी की मार्कशीट में नाम परिवर्तित करके औरैया के श्याम सुंदर प्यारेलाल गुप्ता महाविद्यालय में अनुमोदित करा दिया।
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पूज्य भाऊराव देवरस महाविद्यालय, सरवनखेड़ा, कानपुर देहात में वनस्पति विज्ञान विभाग की प्रवक्ता प्रगति ओमर का आरोप है कि चार साल पहले उसका देवरस कॉलेज से किसी ने अनुमोदन निरस्त करा दिया और फिर गुपचुप तरीके से एमएससी की मार्कशीट में नाम परिवर्तित करके औरैया के श्याम सुंदर प्यारेलाल गुप्ता महाविद्यालय में अनुमोदित करा दिया।
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हैरानी की बात है कि चार साल तक प्रगति को इस बात की भनक तक नहीं लगी। कुछ दिन पहले जब प्रगति ने विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर वरिष्ठता सूची देखी, तो उसका नाम औरैया के कॉलेज से जुड़ा मिला।
इसकी उन्होंने शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे नाराज शिक्षिका बुधवार को एमएलसी अरुण पाठक के पास पहुंच गई। एमएलसी ने शिक्षिका की समस्या सुनने के बाद उनके साथ कुलपति से मिलने पहुंचे और पूरा घटनाक्रम बताया। कुलपति ने मामले की जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
इसकी उन्होंने शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे नाराज शिक्षिका बुधवार को एमएलसी अरुण पाठक के पास पहुंच गई। एमएलसी ने शिक्षिका की समस्या सुनने के बाद उनके साथ कुलपति से मिलने पहुंचे और पूरा घटनाक्रम बताया। कुलपति ने मामले की जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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ऐसे किया कारनामा
डीएवी कॉलेज से वर्ष 2008 में पदम कुमार गुप्ता की बेटी प्रगति ओमर ने वनस्पति विज्ञान से एमएससी किया था। इसके बाद वर्ष 2012 में पीएचडी की। प्रगति का 6 फरवरी 13 को पूज्य भाऊराव देवरस महाविद्यालय सरवनखेड़ा, कानपुर देहात में वनस्पति विज्ञान-प्रवक्ता पद पर अनुमोदन हुआ था।
प्रगति तब से निरंतर कॉलेज में पढ़ा रही है। इसी बीच किसी ने प्रगति की एमएससी अंकतालिका में हेराफेरी कर प्रगति से नाम बदलकर प्रति ओमर करवा दिया। फिर प्रगति के नाम से ही विश्वविद्यालय में आवेदन किया गया कि उसका अनुमोदन पूज्य भाऊराव देवरस महाविद्यालय सरवनखेड़ा से निरस्त कर श्याम सुंदर प्यारेलाल गुप्ता महाविद्यालय, औरैया कर दिया जाए। इस आवेदन पर विवि ने 6 मार्च 14 को प्रति ओमर का अनुमोदन औरैया के लिए कर दिया।
डीएवी कॉलेज से वर्ष 2008 में पदम कुमार गुप्ता की बेटी प्रगति ओमर ने वनस्पति विज्ञान से एमएससी किया था। इसके बाद वर्ष 2012 में पीएचडी की। प्रगति का 6 फरवरी 13 को पूज्य भाऊराव देवरस महाविद्यालय सरवनखेड़ा, कानपुर देहात में वनस्पति विज्ञान-प्रवक्ता पद पर अनुमोदन हुआ था।
प्रगति तब से निरंतर कॉलेज में पढ़ा रही है। इसी बीच किसी ने प्रगति की एमएससी अंकतालिका में हेराफेरी कर प्रगति से नाम बदलकर प्रति ओमर करवा दिया। फिर प्रगति के नाम से ही विश्वविद्यालय में आवेदन किया गया कि उसका अनुमोदन पूज्य भाऊराव देवरस महाविद्यालय सरवनखेड़ा से निरस्त कर श्याम सुंदर प्यारेलाल गुप्ता महाविद्यालय, औरैया कर दिया जाए। इस आवेदन पर विवि ने 6 मार्च 14 को प्रति ओमर का अनुमोदन औरैया के लिए कर दिया।
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कहीं कॉलेजों का खेल तो नहीं
प्रगति का अनुमोदन निरस्त होने के बावजूद उसे पूज्य भाऊराव देवरस महाविद्यालय प्रशासन चार साल से वेतन देता रहा। ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं कि कहीं ये कॉलेज प्रबंधन का ही तो खेल नहीं है। इसके पहले भी शिक्षकों के नाम फर्जी अनुमोदन के मामले सामने आते रहे हैं।
एक-एक शिक्षक के नाम पर कई कॉलेजों में अनुमोदन हुए हैं। एमएलसी अरुण पाठक ने कहा कि, सवाल है कि दस्तावेज को मिलाए बिना अनुमोदन में कैसे बदलाव हुआ। साक्षात्कार भी बिना सत्यापन के हुआ। कॉलेज और विवि की सूची में अलग-अलग नाम है, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं। वहीं, विवि की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी।
प्रगति का अनुमोदन निरस्त होने के बावजूद उसे पूज्य भाऊराव देवरस महाविद्यालय प्रशासन चार साल से वेतन देता रहा। ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं कि कहीं ये कॉलेज प्रबंधन का ही तो खेल नहीं है। इसके पहले भी शिक्षकों के नाम फर्जी अनुमोदन के मामले सामने आते रहे हैं।
एक-एक शिक्षक के नाम पर कई कॉलेजों में अनुमोदन हुए हैं। एमएलसी अरुण पाठक ने कहा कि, सवाल है कि दस्तावेज को मिलाए बिना अनुमोदन में कैसे बदलाव हुआ। साक्षात्कार भी बिना सत्यापन के हुआ। कॉलेज और विवि की सूची में अलग-अलग नाम है, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं। वहीं, विवि की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी।