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यादें: दिलीप कुमार ने हसरत मोहानी की गजल सुना बांधा था समां, कानपुर में यहां रुककर नेपाल की तराई जाते थे ट्रेजेडी किंग

Thu, 08 Jul 2021 11:11 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 08 Jul 2021 11:11 AM IST
सार

हजरत दादा मियां की खानकाह के सज्जादानशीं सैयद अबुल बरकात नजमी ने बताया कि इस मुशायरे में दिलीप कुमार ने कहा था कि अगर मोहानी सिर्फ शायर होते तो दुनिया के बड़े शख्स होते। मोहानी का यह शेर ‘कट गया कैद में माहे रमजां भी हसरत, गर्ज के सामान न सहर का था, न इफ्तारी का’ भी सुनाया।

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Dilip Kumar was deeply attached to kanpur up
दिलीप कुमार की फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बॉलीवुड के ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार की यादें कानपुर से भी जुड़ी हैं। खासतौर पर वर्ष 1960 में कमला क्लब का मुशायरा यादगार है। इसमें दिलीप कुमार ने हसरत मोहानी पर तकरीर की थी, जो यादों के दस्तावेज का अहम हिस्सा बन गईं।
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इस मुशायरे की शुरुआत दिलीप कुमार ने हसरत मोहनी के इस शेर ‘खिरद का नाम जुनूं पड़ गया, जुनूं का खिरद, जो चाहे आप का हुस्न-ए-करिश्मा साज करे’ से की थी। इसके बाद दिलीप कुमार ने मोहानी के जीवन के हर पहलू पर रोशनी डाली।
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हजरत दादा मियां की खानकाह के सज्जादानशीं सैयद अबुल बरकात नजमी ने बताया कि इस मुशायरे में दिलीप कुमार ने कहा था कि अगर मोहानी सिर्फ शायर होते तो दुनिया के बड़े शख्स होते। मोहानी का यह शेर ‘कट गया कैद में माहे रमजां भी हसरत, गर्ज के सामान न सहर का था, न इफ्तारी का’ भी सुनाया।
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इसके बाद चुपके-चुपके रात दिन, आंसू बहाना याद है... पूरी गजल रवानी के साथ दिलीप कुमार ने सुनाई। नजमी ने बताया कि दिलीप कुमार बशीर इस्टेट के मम्मू मियां के पास बहुत आते थे। मम्मू मियां का नेपाल की तराई में फार्म हाउस था। दिलीप कुमार पहले कानपुर आते और फिर पिकनिक और शिकार के लिए वहां जाते थे।


कमला क्लब के मुशायरे में भी वह मम्मू मियां के कहने के बाद ही आए थे। जब उनसे कहा गया कि मुशायरे में आना है तो बोले कि ठीक है, शिकार का इंतजाम भी कर लेना। वह बताते हैं कि एक बार शरद पवार के चुनाव प्रचार के लिए हम जावेद हबीब के साथ मुंबई गए। फिर शरद पवार के साथ दिलीप कुमार से मिलने गए। तो उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया कि हिंदू-मुस्लिम की बात मत करना, चुनाव है तो फिर नीतियां बताइये।
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