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कानपुर: सात रोगियों में डेंगू की पुष्टि...बुखार के सौ रोगी आए, रिएक्टिव आर्थराइटिस के मरीज सबसे ज्यादा

Sun, 24 Sep 2023 01:30 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 24 Sep 2023 01:30 PM IST
सार

Kanpur News: डेंगू के लक्षण वाले सौ रोगियों की जांच होने पर दो से पांच फीसदी ही को संक्रमण की पुष्टि हो रही है। रोगी निगेटिव निकल रहे हैं। इनमें सभी लक्षण डेंगू के रहते हैं। जो रोगी आ रहे हैं, उनके बुखार की अवधि बताने पर ही डॉक्टर तय करते हैं कि एनएस-1 जांच होगी कि आईजीएम।

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Dengue confirmed in seven patients, Hundred patients came with fever, highest number of patients with reactive
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कानपुर में हाई ग्रेड फीवर के सौ रोगी और मिले हैं। सात रोगियों में डेंगू की पुष्टि हुई है। सात रोगियों को हैलट इमरजेंसी में भर्ती किया गया है। हैलट की मेडिसिन में बुखार के 50 रोगी आए। इसके अलावा 35 रोगी ऐसे भी थे जिनका बुखार ठीक हो गया लेकिन शरीर के जोड़ों में दर्द है।

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रोगियों को रिएक्टिव आर्थराइटिस हो गई। रोगियों में बुखार उतर जाने के बाद अभी लिवर की समस्या बनी हुई है। इनके लिवर के एंजाइम बढ़े हुए हैं। साथ ही कमजोरी और सांस में भी दिक्कत है। यूडीएसपी पोर्टल में डेंगू के सात रोगियों की सूची जारी की गई। इनमें छह शहर के और एक फतेहपुर का है।
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कोयलानगर, चंद्रनगर, पाल्हेपुर, सरसौल, उर्सला परिसर, गोविंदनगर में डेंगू संक्रमित मिले। एक रोगी की रिपीट जांच पॉजिटिव आई है। पोर्टल में बुखार के 37 रोगियों की सूची जारी की गई है। हैलट ओपीडी में 50 और उर्सला में 13 बुखार के रोगी आए हैं। जिला मलेरिया अधिकारी एके सिंह ने बताया कि जहां घनात्मक रोगी मिल रहे हैं।

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41 घरों में मच्छर का लार्वा मिला
वहां दवा का छिड़काव करा दिया जा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों के 41 घरों में मच्छर का लार्वा मिला है। उसे नष्ट करा गया। एक रोगी की मौत के बाद सिकठिया गांव में निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कैंप लगाया गया। गांव में 26 रोगियों के सैंपल लिए गए। इनमें 16 मलेरिया और पांच सैंपल डेंगू की जांच के लिए भेजे गए हैं।

डेंगू को पकड़ने के लिए की जा रही डबल जांच
डेंगू के लक्षण वाले सौ रोगियों की जांच होने पर दो से पांच फीसदी ही को संक्रमण की पुष्टि हो रही है। रोगी निगेटिव निकल रहे हैं। इनमें सभी लक्षण डेंगू के रहते हैं। जो रोगी आ रहे हैं, उनके बुखार की अवधि बताने पर ही डॉक्टर तय करते हैं कि एनएस-1 जांच होगी कि आईजीएम।

बुखार आने की अवधि एक से लेकर पांच दिन
अगर रोगी ने धोखे से बुखार आने की अवधि गलत बता दी, तो इन दो जांचों में कोई एक करने पर रिपोर्ट निगेटिव आ सकती है। स्थिति को देखते हुए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रो बाॅयोलॉजी विभाग ने अब दोनों जांचें करनी शुरू कर दी हैं। जिला मलेरिया अधिकारी एके सिंह ने बताया कि प्रोटोकॉल के लिहाज से अगर बुखार आने की अवधि एक से लेकर पांच दिन है, तो एनएस-1 जांच की जाती है।

माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग दोनों जांचें कर रहा है
अगर पांच दिन से अधिक हो गए तो आईजीएम जांच होती हैं। आईजीएम एंटीबॉडी टेस्ट होता है। रोगी में एंटीबॉडी पांच दिन के बाद बनती है। इसके पहले एंटी बॉडीज नहीं होती। एनएस-1 में एंटीजन की जांच होती है। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज का माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग दोनों जांचें कर रहा है। अगर रोगी बुखार की अवधि गलत बताता है तो भी डेंगू का संक्रमण पता चल जाएगा।

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