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Kanpur News: अनुसंधान परिषद के नियमों के खिलाफ कृषि वैज्ञानिकों का प्रदर्शन
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इटावा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के नये नियमों में फेरबदल करने को लेकर कृषि विज्ञान केंद्र के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। कृषि वैज्ञानिकों ने केंद्र के बाहर बैठकर प्रभारी डॉ. एमके सिंह की अगुवाई में काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि परिषद के नये नियम उनके खिलाफ हैं। प्रभारी ने बताया कि विभाग की निदेशक की ओर से जो पत्र जारी किया गया है, जिसके तहत वैज्ञानिकों को गैर-शैक्षणिक माना है। वैज्ञानिकों की सेवानिवृत्ति उम्र भी घटा दी गई है। इसके साथ ही केबीके के वैज्ञानिकों को मिलने वाले सभी लाभाें से वंचित कर दिया गया है। वैज्ञानिकों को न ही पुरानी पेंशन दी जा रही है और न ही नई पेंशन स्कीम में उन्हें शामिल किया जा रहा है।
इसके चलते सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें पारिवारिक भरण पोषण में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कृषि वैज्ञानिकों ने मांगों को लेकर निदेशक को पत्र भेजा है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. वी.बी जायसवाल ने बताया कि पांच दिसंबर को मृदा स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। इस बार कृषि वैज्ञानिकों ने इस दिवस का भी बहिष्कार किया है। प्रदर्शन में डॉ.भूपेंद्र सिंह, डॉ. सुनीता मिश्रा, डॉ. भूपेंद्र चौहान, हरेंद्र, प्रवीन सिंह, प्रमोद सहित कई लोग शामिल रहे।
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कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि परिषद के नये नियम उनके खिलाफ हैं। प्रभारी ने बताया कि विभाग की निदेशक की ओर से जो पत्र जारी किया गया है, जिसके तहत वैज्ञानिकों को गैर-शैक्षणिक माना है। वैज्ञानिकों की सेवानिवृत्ति उम्र भी घटा दी गई है। इसके साथ ही केबीके के वैज्ञानिकों को मिलने वाले सभी लाभाें से वंचित कर दिया गया है। वैज्ञानिकों को न ही पुरानी पेंशन दी जा रही है और न ही नई पेंशन स्कीम में उन्हें शामिल किया जा रहा है।
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इसके चलते सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें पारिवारिक भरण पोषण में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कृषि वैज्ञानिकों ने मांगों को लेकर निदेशक को पत्र भेजा है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. वी.बी जायसवाल ने बताया कि पांच दिसंबर को मृदा स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। इस बार कृषि वैज्ञानिकों ने इस दिवस का भी बहिष्कार किया है। प्रदर्शन में डॉ.भूपेंद्र सिंह, डॉ. सुनीता मिश्रा, डॉ. भूपेंद्र चौहान, हरेंद्र, प्रवीन सिंह, प्रमोद सहित कई लोग शामिल रहे।
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