Banda Suicide: कर्ज में डूबे किसान ने की आत्महत्या, फसल नष्ट होने से था दुखी, पिता ने भी जहर खाकर दी थी जान
जसपुरा कस्बा में कर्ज में डूबे किसान ने फसल नष्ट होने से दुखी होकर आत्महत्या कर ली। गुरुवार शाम को खेत गया, तो देखा कि फसल को नीलगाय चट कर गई हैं। इसके बाद खेत से लौटकर उसने फांसी लगा ली। चाचा का आरोप है कि बैंक से कई बार कर्ज अदायगी का नोटिस आ चुका था।
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बांदा जिले में कर्ज में डूबे किसान ने नील गायों द्वारा फसल नष्ट करने से दुखी होकर जान दे दी। शाम को वह खेत में बर्बाद फसल को देखकर लौटा और फंदे पर झूल गया। कर्ज अदायगी के लिए बैंक से भी कई बार नोटिस आ चुका था। पुलिस खुदकुशी का कारण पता होने से इनकार कर रही है।
जसपुरा कस्बा निवासी कुलदीप सिंह (25) तीन भाई और एक बहन में सबसे बड़ा था। गुरुवार देर शाम उसने घर से कुछ दूरी पर बने पशुबाड़े में मफलर से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजन जब पशुबाड़े की तरफ गए, तो घटना की जानकारी हुई।
कुलदीप के चाचा राजेंद्र सिंह ने बताया कि करीब 13 वर्ष पहले उसके पिता सुरेंद्र सिंह की मौत हो गई थी। पिता के हिस्से का तीन बीघा खेत है। कुलदीप इसी खेत में फसल बोकर व मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करता था। इस बार उसने खेत में गेहूं की फसल बोई है।
बैंक का लगभग 50 हजार रुपये कर्ज था
शाम को फसल देखकर घर पहुंचा तो काफी व्यथित था। पूछने पर बताया कि नील गायों ने करीब डेढ़ बीघा फसल पूरी तरह से नष्ट कर दी है। बैंक का भी करीब दो लाख 50 हजार रुपये कर्ज है, वहां से भी कई बार नोटिस आ चुके हैं। अब कैसे कर्ज चुकाएगा।
पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा
उसे समझाकर किसी तरह शांत किया था। करीब पौने सात बजे वह बिना बताए घर से निकला और पशुबाड़े में जाकर फंदा लगा गया। पुलिस ने पंचनामा भरकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। थानाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि घटना की जानकारी मिली है। अभी आत्महत्या का कारण पता नहीं चला है।
पिता ने भी जहर खाकर की थी आत्महत्या
कुलदीप के पिता ने भी करीब दस वर्ष जहर खाकर जान दी थी। पिता ने ही बैंक से कर्ज लिया था, जिसे अदा करने के लिए बैंक से नोटिस आ रहा था। कुलदीप ने गेहूं की फसल होने पर कुछ रुपये जमा करने की बात कही थी, लेकिन फसल तैयार होने से पहले ही नष्ट होने के चलते उसने यह कदम उठाया।
कुलदीप के चाचा राजेंद्र सिंह ने बताया कि हम तीन भाई थे। हमारे पिता के पास करीब नौ बीघा जमीन थी। बंटवारे के दौरान तीनों भाइयों के हिस्से में तीन-तीन बीघा जमीन आई थी। कुलदीप के पिता ने करीब 12 वर्ष पहले पैलानी कस्बा की एक बैंक से कर्ज लिया था। कितने रुपये कर्ज लिया था इसकी जानकारी नहीं है।
परिवार पालने के लिए मजदूरी भी करता था
उन्होंने एक बार भी कर्ज जमा नहीं किया था। वर्ष 2013 में उन्होंने भी जहर खाकर जान दे दी थी। उनके परिवार में पत्नी ममता के अलावा तीन बेटे व एक बेटी है। कुलदीप सबसे बड़ा था। पिता की मौत के बाद परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। परिवार का पेट पालने के लिए वह खेती के अलावा मजदूरी भी करता था।
बैंक से लगातार आ रहे थे नोटिस
पिछले कई माह से बैंक से नोटिस आ रहा था। तीन माह पहले भी बैंक से नोटिस आया था। तब कुलदीप ने गेहूं की फसल होने पर कुछ रुपये जमा करने की बात कही थी। कुलदीप बैंक का करीब ढाई लाख रुपये कर्ज होने की बात बता रहा था। लेकिन फसल तैयार होने से पहले ही नील गाय ने नष्ट कर दी।