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मां तुझे प्रणाम: मौत सामने थी, अजीजन बाई ने मांगी थी आजादी, उनकी टोली करती थी अंग्रेजों की जासूसी
Wed, 10 Aug 2022 11:11 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 10 Aug 2022 11:11 AM IST
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अजीजन बाई की प्रतिमा व फोटो
- फोटो : अमर उजाला
आजादी की लड़ाई में पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी कंधे से कंधा मिलाकर क्रांति की लौ को कभी धीमा होने नहीं दिया था। इन्हीं महिला क्रांतिकारियों में से एक थीं अजीजन बाई। वह पेशे से तवायफ थीं। उन्होंने मस्तानी टोली बनाकर लगभग 400 महिलाओं को अपने साथ जोड़ रखा था। टोली की महिलाएं रात में मुजरा करके अंग्रेजों की रणनीति का पता करती थीं दिन में सूचनाएं क्रांतिकारियों को बताती थीं।
एक जून 1857 को जब कानपुर में नाना साहब के नेतृत्व में तात्याटोपे, अजीमुल्ला खान, बालासाहब, सूबेदार टीका सिंह और शमसुद्दीन खान क्रांति की योजना बना रहे थे तो उनके साथ उस बैठक में अजीजन बाई भी थीं। 80 साल के इतिहासकार राम किशोर बाजपेई ने बताया कि अजीजन बाई मूलगंज की रोटी वाली गली में रहती थीं।
वहां पर अंग्रेज फौज के अफसर मुजरा देखने आया करते थे। एक दिन तात्याटोपे ने बिठूर में अजीजन बाई को नृत्य के लिए बुलाया था। तात्याटोपे इनाम स्वरूप अजीजन बाई को पैसे देने लगे तो अजीजन बाई ने इनकार करते हुए कहा कि मुझे पैसे नहीं अपनी सेना की वर्दी दे दीजिए। इसपर उन्होंने अजीजन बाई को अंग्रेजों की मुखबिरी करने का जिम्मा सौंपा था।
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एक जून 1857 को जब कानपुर में नाना साहब के नेतृत्व में तात्याटोपे, अजीमुल्ला खान, बालासाहब, सूबेदार टीका सिंह और शमसुद्दीन खान क्रांति की योजना बना रहे थे तो उनके साथ उस बैठक में अजीजन बाई भी थीं। 80 साल के इतिहासकार राम किशोर बाजपेई ने बताया कि अजीजन बाई मूलगंज की रोटी वाली गली में रहती थीं।
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वहां पर अंग्रेज फौज के अफसर मुजरा देखने आया करते थे। एक दिन तात्याटोपे ने बिठूर में अजीजन बाई को नृत्य के लिए बुलाया था। तात्याटोपे इनाम स्वरूप अजीजन बाई को पैसे देने लगे तो अजीजन बाई ने इनकार करते हुए कहा कि मुझे पैसे नहीं अपनी सेना की वर्दी दे दीजिए। इसपर उन्होंने अजीजन बाई को अंग्रेजों की मुखबिरी करने का जिम्मा सौंपा था।
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होली के दिन अजीजन बाई के कोठे पर ही क्रांतिकारियों ने हमला कर कई अंग्रेज सैनिकों को मौत के घाट उतारा था। बिठूर के युद्ध में पराजित होने पर नाना साहब और तात्याटोपे तो पलायन कर गए लेकिन अजीजन बाई पकड़ी गईं थीं। जनरल हैवलॉक ने उनसे कहा था कि गलतियों को स्वीकार कर क्षमा मांग लें, तात्याटोपे का पता बता दें तो उन्हें माफ कर दिया जाएगा, लेकिन अजीजन बाई ने मना कर दिया। उसी रात उन्हें तोप से उड़ा दिया गया था। नानाराव पार्क में लगी अजीजन बाई की प्रतिमा आज भी उनके बलिदान को याद दिलाती है।
मेले से अंग्रेजों ने किया था अगवा तब पहुंचीं थीं कानपुर
22 जनवरी 1824 को मध्य प्रदेश के राजगढ़ में जमींदार शमशेर सिंह के घर अजीजन बाई का जन्म हुआ था। तब उनका नाम अजंसा था। एक दिन मेले से अंग्रेज सिपाही उन्हें उठा ले गए थे। उन्हें लाठीमोहाल में कोठा मालकिन अम्मीजान को बेच दिया था।
मेले से अंग्रेजों ने किया था अगवा तब पहुंचीं थीं कानपुर
22 जनवरी 1824 को मध्य प्रदेश के राजगढ़ में जमींदार शमशेर सिंह के घर अजीजन बाई का जन्म हुआ था। तब उनका नाम अजंसा था। एक दिन मेले से अंग्रेज सिपाही उन्हें उठा ले गए थे। उन्हें लाठीमोहाल में कोठा मालकिन अम्मीजान को बेच दिया था।