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चार गोवंश की मौत, गो आश्रय स्थल बदहाल
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कानपुर देहात। कोरोना काल मेें जिले के गोआश्रय स्थल बदहाली का शिकार हो गए हैं। कई जगहों पर पशुओं को सूखा भूसा खिलाया जा रहा है तो कहीं स्वच्छ पानी तक गायों को नहीं नसीब हो रहा है। बुधवार को करसा व बिलसरायां आश्रय स्थल में एक-एक गाय की मौत हो गई।
वहीं रसूलाबाद के पालनगर भैंसाया आश्रय स्थल में दो गोवंश ने दम तोड़ दिया। आश्रय स्थलों में गायों को पर्याप्त चारा न मिलने से उनकी काया जर्जर हो गई है। पशु चिकित्सक भी गायों के कुपोषित होने की बात कह रहे हैं। जिम्मेदार मवेशियों के लिए संसाधन जुटाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
जिले में अकबरपुर, पुखरायां, शिवली व रसूलाबाद को मिलाकर चार कान्हा गोशाला हैं, जबकि 33 गो आश्रय स्थल संचालित हैं। सभी में मिलाकर कुल गोवंश की संख्या 2855 है।
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दो गायों की मौत, अन्य की काया जर्जर
रसूलाबाद। ब्लॉक के भैंसाया पालनगर गो आश्रय स्थल में बुधवार को एक गाय व एक बछड़े की मौत हो गई। चार दिन पहले भी यहां एक गाय की मौत हुई थी। अब यहां कुल 94 गोवंश हैं। यहां 8 बोरी चोकर व भूसा का स्टॉक मिला।
गो सेवक संजय ने बताया कि प्रतिदिन एक बोरी चोकर 94 गायों को दिया जा रहा है। एक बोरी में 50 किलोग्राम चोकर आता है। ऐसे में प्रत्येक गाय के हिस्से में करीब आधा किलोग्राम चोकर आता है। प्रधान संजीव पाल ने बताया कि हरे चारे की व्यवस्था की जा रही है। मृत दो गोवंश को दफना दिया गया है।
159 गोवंश के लिए रखा मिला एक बोरी चोकर
सरवनखेड़ा ब्लॉक के बिलसराया गो आश्रय स्थल में हरा चारा व दाना के अभाव में अधिकांश गोवंश कमजोर हो गए हैं। बुधवार सुबह एक गाय की मौत हो गई। कुल 159 गोवंश हैं। सफाई के नाम पर खानापूरी होने से गंदगी है।
परिसर में जगह-जगह गोबर पड़ा है। 159 गायों के लिए सिर्फ एक बोरी चोकर रखा मिला। गायों को पर्याप्त चारा न मिलने से वह कमजोर गई हैं। ग्रामीणों की मानें तो अक्सर गायों की मौत होती रहती है। जिम्मेदार सूचना के बाद भी नहीं आते हैं।
15 दिन में सात गायों की मौत
सरवनखेड़ा ब्लॉक के करसा गो आश्रय स्थल में बुधवार को एक और गाय की मौत हो गई। यहां 15 दिन के अंदर सात गायों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी चारे की व्यवस्था दुुरुस्त नहीं की गई। हरा चारा व चोकर न मिलने से गायों की काया जर्जर हो गई है।
इससे वह बीमार होकर मौत का शिकार हो रही हैं। अभी भी तीन गाय खड़े होने में असमर्थ होने की वजह से एक जगह पड़ी हैं। अब आश्रय स्थल में कुल 84 गोवंश हैं। चारे के नाम पर सूखा भूसा रखा मिला। पानी तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। पानी की नांद खाली मिली। जबकि गर्मी में तीन टाइम ताजा पानी पिलाने की सलाह पशु चिकित्सक दे रहे हैं।
गायों को खिलाया जा रहा सड़ा भूसा
राजपुर ब्लॉक के सिल्हौला बुजुर्ग गांव में बने गोवंश आश्रय स्थल में 24 गोवंश हैं। उन्हें चारा खिलाने के लिए सड़ा भूसा पड़ा मिला। दो गो सेवक सर्जेंद्र कुमार व उमाशंकर तैनात हैं। मौके पर सिर्फ सर्जेंद्र कुमार मिले। नांद में सूखा खराब भूसा पड़ा था। जिसे गाय खा भी नहीं रही थीं।
छाया की व्यवस्था ठीक नहीं है। इससे गर्मी में गोवंश का बुरा हाल है। सफाई को लेकर जिम्मेदार लापरवाही कर रहे हैं। गोबर फैला पड़ा है। चोकर व खली आदि नहीं मिली। जबकि सचिव नीलम कटियार ने बताया कि 50 क्विंटल भूसा का भंडारण है। गायों को चोकर भी दिया जाता है।
कई महीने से नहीं गए सफाई कर्मी
संदलपुर ब्लॉक के गो आश्रय स्थल जसापुर में 28 गोवंश हैं। हरा चारा व चोकर के इंतजाम नहीं हैं। पेट भरने के लिए सूखा भूसा देकर काम चलाया जा रहा है। सफाई कर्मी कई महीने से आश्रय स्थल में नहीं गए। इससे वहां गंदगी फैली है। वहीं असवीं आश्रय स्थल में 35 गाय हैं।
गायों के पास में ही गोबर के ढेर लगे हैं। गंदगी के बीच गायों को चारा के नाम सूखा भूसा दिया जा रहा है। इससे गाय लगातार कमजोर होती जा रही हैं। एसडीएम सिकंदरा रमेश चंद्र ने इसकी जानकारी होने से इंकार किया। जबकि बीडीओ व एसडीएम को क्षेत्र के आश्रय स्थलों के निरीक्षण के निर्देश हैं।
छह माह से नहीं मिला मेहनताना
रसूलाबाद। पालनगर भैंसाया गोवंश आश्रय स्थल में संजय, जयनारायन, राजू, सुनील व सुशील समेत पांच गो सेवक तैनात हैं। इन्हें छह माह से मेहनताना नहीं मिला। इससे काम में इनका मन नहीं लग रहा है। सिर्फ खानापूरी की जा रही है।
गो सेवकों ने बताया कि पूरे दिन आश्रय स्थल में काम करने में बीत जाता है। वहीं घर के खर्च का कोई इंतजाम नहीं है। इससे परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। चूल्हे ठंडे होने की नौबत आ गई है। प्रधान संजीव पाल ने बताया कि अफसरों से बात कर गो सेवकों के पारिश्रमिक का भुगतान जल्द कराया जाएगा।
गर्मी की वजह से हरे चारे की व्यवस्था न हो पाने से समस्या आ रही है। अब सभी पशु चिकित्सा अधिकारियों को चरी का बीज उपलब्ध करा दिया गया है। जिसकी बोआई कराकर हरे चारे की व्यवस्था कराई जा रही है। साथ ही एक ही जगह बंद रहने से भी गाय कमजोर हुई हैं।
आश्रय स्थलों की लगातार मानीटरिंग करने के निर्देश सभी पशु चिकित्सा अधिकारियों को दिए जा चुके हैं। जिले स्तर से भी मानीटरिंग की जा रही है। व्यवस्था सुधारने की कोशिश चल रही है। - डॉ. डीएन लवानियां, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
पालनगर गो आश्रय स्थल में बीमारी से दो गायों की मौत हुई है। वहीं करसा और बिलसराया गो आश्रय स्थल में मवेशी आपस में लड़ गए थे। इससे वह घायल थे, जिससे उनकी मौत हो गई। गायों के लिए चारे की व्यवस्था करने के निर्देश बीडीओ को दिए गए हैं। करसा आश्रय स्थल की बीडीओ से नियमित रिपोर्ट मांगी जा रही है। - सौम्या पांडेय, सीडीओ
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वहीं रसूलाबाद के पालनगर भैंसाया आश्रय स्थल में दो गोवंश ने दम तोड़ दिया। आश्रय स्थलों में गायों को पर्याप्त चारा न मिलने से उनकी काया जर्जर हो गई है। पशु चिकित्सक भी गायों के कुपोषित होने की बात कह रहे हैं। जिम्मेदार मवेशियों के लिए संसाधन जुटाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
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जिले में अकबरपुर, पुखरायां, शिवली व रसूलाबाद को मिलाकर चार कान्हा गोशाला हैं, जबकि 33 गो आश्रय स्थल संचालित हैं। सभी में मिलाकर कुल गोवंश की संख्या 2855 है।
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दो गायों की मौत, अन्य की काया जर्जर
रसूलाबाद। ब्लॉक के भैंसाया पालनगर गो आश्रय स्थल में बुधवार को एक गाय व एक बछड़े की मौत हो गई। चार दिन पहले भी यहां एक गाय की मौत हुई थी। अब यहां कुल 94 गोवंश हैं। यहां 8 बोरी चोकर व भूसा का स्टॉक मिला।
गो सेवक संजय ने बताया कि प्रतिदिन एक बोरी चोकर 94 गायों को दिया जा रहा है। एक बोरी में 50 किलोग्राम चोकर आता है। ऐसे में प्रत्येक गाय के हिस्से में करीब आधा किलोग्राम चोकर आता है। प्रधान संजीव पाल ने बताया कि हरे चारे की व्यवस्था की जा रही है। मृत दो गोवंश को दफना दिया गया है।
159 गोवंश के लिए रखा मिला एक बोरी चोकर
सरवनखेड़ा ब्लॉक के बिलसराया गो आश्रय स्थल में हरा चारा व दाना के अभाव में अधिकांश गोवंश कमजोर हो गए हैं। बुधवार सुबह एक गाय की मौत हो गई। कुल 159 गोवंश हैं। सफाई के नाम पर खानापूरी होने से गंदगी है।
परिसर में जगह-जगह गोबर पड़ा है। 159 गायों के लिए सिर्फ एक बोरी चोकर रखा मिला। गायों को पर्याप्त चारा न मिलने से वह कमजोर गई हैं। ग्रामीणों की मानें तो अक्सर गायों की मौत होती रहती है। जिम्मेदार सूचना के बाद भी नहीं आते हैं।
15 दिन में सात गायों की मौत
सरवनखेड़ा ब्लॉक के करसा गो आश्रय स्थल में बुधवार को एक और गाय की मौत हो गई। यहां 15 दिन के अंदर सात गायों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी चारे की व्यवस्था दुुरुस्त नहीं की गई। हरा चारा व चोकर न मिलने से गायों की काया जर्जर हो गई है।
इससे वह बीमार होकर मौत का शिकार हो रही हैं। अभी भी तीन गाय खड़े होने में असमर्थ होने की वजह से एक जगह पड़ी हैं। अब आश्रय स्थल में कुल 84 गोवंश हैं। चारे के नाम पर सूखा भूसा रखा मिला। पानी तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। पानी की नांद खाली मिली। जबकि गर्मी में तीन टाइम ताजा पानी पिलाने की सलाह पशु चिकित्सक दे रहे हैं।
गायों को खिलाया जा रहा सड़ा भूसा
राजपुर ब्लॉक के सिल्हौला बुजुर्ग गांव में बने गोवंश आश्रय स्थल में 24 गोवंश हैं। उन्हें चारा खिलाने के लिए सड़ा भूसा पड़ा मिला। दो गो सेवक सर्जेंद्र कुमार व उमाशंकर तैनात हैं। मौके पर सिर्फ सर्जेंद्र कुमार मिले। नांद में सूखा खराब भूसा पड़ा था। जिसे गाय खा भी नहीं रही थीं।
छाया की व्यवस्था ठीक नहीं है। इससे गर्मी में गोवंश का बुरा हाल है। सफाई को लेकर जिम्मेदार लापरवाही कर रहे हैं। गोबर फैला पड़ा है। चोकर व खली आदि नहीं मिली। जबकि सचिव नीलम कटियार ने बताया कि 50 क्विंटल भूसा का भंडारण है। गायों को चोकर भी दिया जाता है।
कई महीने से नहीं गए सफाई कर्मी
संदलपुर ब्लॉक के गो आश्रय स्थल जसापुर में 28 गोवंश हैं। हरा चारा व चोकर के इंतजाम नहीं हैं। पेट भरने के लिए सूखा भूसा देकर काम चलाया जा रहा है। सफाई कर्मी कई महीने से आश्रय स्थल में नहीं गए। इससे वहां गंदगी फैली है। वहीं असवीं आश्रय स्थल में 35 गाय हैं।
गायों के पास में ही गोबर के ढेर लगे हैं। गंदगी के बीच गायों को चारा के नाम सूखा भूसा दिया जा रहा है। इससे गाय लगातार कमजोर होती जा रही हैं। एसडीएम सिकंदरा रमेश चंद्र ने इसकी जानकारी होने से इंकार किया। जबकि बीडीओ व एसडीएम को क्षेत्र के आश्रय स्थलों के निरीक्षण के निर्देश हैं।
छह माह से नहीं मिला मेहनताना
रसूलाबाद। पालनगर भैंसाया गोवंश आश्रय स्थल में संजय, जयनारायन, राजू, सुनील व सुशील समेत पांच गो सेवक तैनात हैं। इन्हें छह माह से मेहनताना नहीं मिला। इससे काम में इनका मन नहीं लग रहा है। सिर्फ खानापूरी की जा रही है।
गो सेवकों ने बताया कि पूरे दिन आश्रय स्थल में काम करने में बीत जाता है। वहीं घर के खर्च का कोई इंतजाम नहीं है। इससे परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। चूल्हे ठंडे होने की नौबत आ गई है। प्रधान संजीव पाल ने बताया कि अफसरों से बात कर गो सेवकों के पारिश्रमिक का भुगतान जल्द कराया जाएगा।
गर्मी की वजह से हरे चारे की व्यवस्था न हो पाने से समस्या आ रही है। अब सभी पशु चिकित्सा अधिकारियों को चरी का बीज उपलब्ध करा दिया गया है। जिसकी बोआई कराकर हरे चारे की व्यवस्था कराई जा रही है। साथ ही एक ही जगह बंद रहने से भी गाय कमजोर हुई हैं।
आश्रय स्थलों की लगातार मानीटरिंग करने के निर्देश सभी पशु चिकित्सा अधिकारियों को दिए जा चुके हैं। जिले स्तर से भी मानीटरिंग की जा रही है। व्यवस्था सुधारने की कोशिश चल रही है। - डॉ. डीएन लवानियां, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
पालनगर गो आश्रय स्थल में बीमारी से दो गायों की मौत हुई है। वहीं करसा और बिलसराया गो आश्रय स्थल में मवेशी आपस में लड़ गए थे। इससे वह घायल थे, जिससे उनकी मौत हो गई। गायों के लिए चारे की व्यवस्था करने के निर्देश बीडीओ को दिए गए हैं। करसा आश्रय स्थल की बीडीओ से नियमित रिपोर्ट मांगी जा रही है। - सौम्या पांडेय, सीडीओ