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Kanpur News: पुलिस अफसर बनकर अपराधियों को धूल चटाना चाहती हैं बेटियां
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महिला थाने में छात्रा अनामिका को एसओ का चार्ज देने के बाद सेल्यूट करतीं प्रभारी निरीक्षक निर्मल
- फोटो : महिला थाने में छात्रा अनामिका को एसओ का चार्ज देने के बाद सेल्यूट करतीं प्रभारी निरीक्षक निर्मला कुमारी
इटावा। अमर उजाला फाउंडेशन के दोस्त पुलिस कार्यक्रम के तहत बुधवार को पुलिस लाइन स्थित महिला थाने में आर्य कन्या इंटर कॉलेज की छात्राएं पहुंची। यहां उन्होंने महिला पुलिस अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने पुलिस का काम करने का तरीका समझते हुए खुद पुलिस अधिकारी बनकर अपराधियों को धूल चटाने की इच्छा जताई। इस दौरान महिला पुलिस अधिकारियों ने छात्राओं को अखबार का भी महत्व बताया। कहा कि अखबारों से ही सत्य और सही जानकारी मिलती है।
प्रभारी निरीक्षक निर्मला कुमारी और एसआई आकांक्षा सिंह ने छात्राओं को पुलिस में भर्ती होने का तरीका बताया। उन्हें अवगत कराया कि किस तरह की परीक्षा होती है। इसके बाद शारीरिक दक्षता के लिए किन चीजों की आवश्यकता होती है। प्रभारी निरीक्षक ने कहा कि एक बेटी के लिए वर्दी पहनना उसके पूरे परिवार के लिए गर्व की बात होती है।
छात्राओं को प्रभारी निरीक्षक ने थाना परिसर में बना मालखाना, कार्यालय, थाना प्रभारी का कक्ष आदि का भ्रमण कराया। साथ उन्होंने थाने में आने वाली शिकायतों का रजिस्टर दिखाया। कक्षा 12 की छात्रा अनामिका को कुछ देर के लिए थानाध्यक्ष की कुर्सी पर भी बैठाया गया। प्रभारी निरीक्षक ने खुद सेल्यूट मारते हुए अनामिका को कुर्सी सौंपी।
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इसके बाद अनामिका ने फरियाद लेकर आई राधा देवी की समस्या सुनीं। राधा ने पति पर परेशान करने का आरोप लगाकर शिकायत की। इस पर अनामिका ने थानाध्यक्ष के सीयूजी नंबर से राधा के पति को फोन मिलाकर खुद को पुलिस बताते हुए थाने आने की बात कही। कहा कि यदि अभी नहीं आओगे तो कार्रवाई करनी पड़ेगी। पारिवारिक मामला है, इसे शांति से निपटाया जा सकता है।
अनामिका को थानाध्यक्ष बना देख अन्य छात्राएं भी उत्साहित दिखीं। एसआई आकांक्षा ने कहा कि आप पुलिस को मित्र समझें। आप कभी भी किसी परेशानी में 1090 मिलाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। प्रधानाचार्य राखी देवी, शिक्षिका आशा वशिष्ठ, छाया सिंह, हेड कांस्टेबल साधना शर्मा, हेड कांस्टेबल रामादेवी, कांस्टेबल पूजा, सीमा तिवारी, अंजलि ,पिंकी यादव और पिंकी आदि मौजूद रहे।
कक्षा 12 की शुभी ने बताया कि कार्यक्रम के माध्यम से वह थाने का भ्रमण कर सकीं। पुलिस बनने की इच्छा बचपन से ही रही है लेकिन पुलिस की कार्यप्रणाली समझने का मौका पहली बार मिल सका। वहभी पुलिस बनकर देश की सेवा करेगी।
कक्षा 11 की रौनक ने बताया कि पुलिस देखकर ही डर लगता था। कभी कुछ कहने की हिम्मत नहीं पड़ती थी। इस आयोजन से हमेशा से रहने वाला डर खत्म हो गया। अब कभी पुलिस से खुलकर बात कर सकूंगी।
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प्रभारी निरीक्षक निर्मला कुमारी और एसआई आकांक्षा सिंह ने छात्राओं को पुलिस में भर्ती होने का तरीका बताया। उन्हें अवगत कराया कि किस तरह की परीक्षा होती है। इसके बाद शारीरिक दक्षता के लिए किन चीजों की आवश्यकता होती है। प्रभारी निरीक्षक ने कहा कि एक बेटी के लिए वर्दी पहनना उसके पूरे परिवार के लिए गर्व की बात होती है।
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छात्राओं को प्रभारी निरीक्षक ने थाना परिसर में बना मालखाना, कार्यालय, थाना प्रभारी का कक्ष आदि का भ्रमण कराया। साथ उन्होंने थाने में आने वाली शिकायतों का रजिस्टर दिखाया। कक्षा 12 की छात्रा अनामिका को कुछ देर के लिए थानाध्यक्ष की कुर्सी पर भी बैठाया गया। प्रभारी निरीक्षक ने खुद सेल्यूट मारते हुए अनामिका को कुर्सी सौंपी।
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इसके बाद अनामिका ने फरियाद लेकर आई राधा देवी की समस्या सुनीं। राधा ने पति पर परेशान करने का आरोप लगाकर शिकायत की। इस पर अनामिका ने थानाध्यक्ष के सीयूजी नंबर से राधा के पति को फोन मिलाकर खुद को पुलिस बताते हुए थाने आने की बात कही। कहा कि यदि अभी नहीं आओगे तो कार्रवाई करनी पड़ेगी। पारिवारिक मामला है, इसे शांति से निपटाया जा सकता है।
अनामिका को थानाध्यक्ष बना देख अन्य छात्राएं भी उत्साहित दिखीं। एसआई आकांक्षा ने कहा कि आप पुलिस को मित्र समझें। आप कभी भी किसी परेशानी में 1090 मिलाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। प्रधानाचार्य राखी देवी, शिक्षिका आशा वशिष्ठ, छाया सिंह, हेड कांस्टेबल साधना शर्मा, हेड कांस्टेबल रामादेवी, कांस्टेबल पूजा, सीमा तिवारी, अंजलि ,पिंकी यादव और पिंकी आदि मौजूद रहे।
कक्षा 12 की शुभी ने बताया कि कार्यक्रम के माध्यम से वह थाने का भ्रमण कर सकीं। पुलिस बनने की इच्छा बचपन से ही रही है लेकिन पुलिस की कार्यप्रणाली समझने का मौका पहली बार मिल सका। वहभी पुलिस बनकर देश की सेवा करेगी।
कक्षा 11 की रौनक ने बताया कि पुलिस देखकर ही डर लगता था। कभी कुछ कहने की हिम्मत नहीं पड़ती थी। इस आयोजन से हमेशा से रहने वाला डर खत्म हो गया। अब कभी पुलिस से खुलकर बात कर सकूंगी।