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तड़पती रही बिटिया, नहीं पसीजा कोई
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Wed, 11 Mar 2015 02:41 AM IST
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हैलट में मंगलवार को स्ट्रेचर न मिलने के कारण एक बिटिया फर्श पर तड़पती रही, लेकिन किसी के पास इतना भी समय नहीं था कि उसका हालचाल जान ले। यह आलम तो तब था जब पास में ही खड़े प्रिंसिपल मातहतों को निर्देश दे रहे थे।
उनके साथ हैलट सीएमएस भी थे लेकिन किसी ने स्ट्रेचर की व्यवस्था तक नहीं कराई। बिहार के गोपालगंज निवासी रिक्शा चालक जयराम की बेटी सुमन (15) के फेफड़े में इंफेक्शन है। उसे टीबी की भी शिकायत है।
सोमवार को सुमन को मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में डॉ. जीएन द्विवेदी की यूनिट में भर्ती कराया गया था। मंगलवार को उसे एक्सरे कराने के लिए कहा गया। बाल रोग विभाग में स्ट्रेचर नहीं मिला तो पिता अपने रिक्शे से ही सुमन को किसी तरह लेकर रेडियोलॉजी विभाग पहुंचा।
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दो घंटे बाद एक्सरे हुआ। यहां भी स्ट्रेचर नहीं मिला तो पिता जयराम और मां कुंती देवी सुमन को लेकर जैसे तैसे वहां से निकले। दोनों थक गए थे। इस कारण आराम करने के लिए एसआईसी कार्यालय के सामने बैठ गए। अर्द्धबेहोशी की हालत में सुमन फर्श पर ही लेट गई।
इस बीच मेडिसिन वार्डों का निरीक्षण कर प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार एसआईसी कार्यालय के सामने आए। फर्श पर तड़प रही सुमन के पास ही खड़े होकर मातहतों को काफी देर तक निर्देश देते रहे लेकिन उसकी ओर ध्यान तक नहीं दिया।
हां, उनके जाने के बाद सीएमएस डॉ. सीएस सिंह की नजर बिटिया पर पड़ी लेकिन वह भी एक कर्मचारी को मौके पर भेजकर खुद चलते बने। मां कुंती ने बताया कि सोमवार को भर्ती कराने से अब तक उसके 15 सौ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। सभी दवाएं बाहर से मंगाई जा रही हैं।
इस संबंध में मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. नवनीत कुमार के फोन पर कॉल की गई। लेकिन उन्होंने फोन िरसीव नहीं िकया।
एचओडी ने जूनियर डॉक्टर से व्यवस्था को कहा
सुमन की दशा पर मीडिया कर्मियों ने बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव से बात की। विभागाध्यक्ष ने एक जूनियर डॉक्टर को निर्देश दिया कि वह बच्ची के इलाज की पूरी व्यवस्था करे।
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उनके साथ हैलट सीएमएस भी थे लेकिन किसी ने स्ट्रेचर की व्यवस्था तक नहीं कराई। बिहार के गोपालगंज निवासी रिक्शा चालक जयराम की बेटी सुमन (15) के फेफड़े में इंफेक्शन है। उसे टीबी की भी शिकायत है।
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सोमवार को सुमन को मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में डॉ. जीएन द्विवेदी की यूनिट में भर्ती कराया गया था। मंगलवार को उसे एक्सरे कराने के लिए कहा गया। बाल रोग विभाग में स्ट्रेचर नहीं मिला तो पिता अपने रिक्शे से ही सुमन को किसी तरह लेकर रेडियोलॉजी विभाग पहुंचा।
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दो घंटे बाद एक्सरे हुआ। यहां भी स्ट्रेचर नहीं मिला तो पिता जयराम और मां कुंती देवी सुमन को लेकर जैसे तैसे वहां से निकले। दोनों थक गए थे। इस कारण आराम करने के लिए एसआईसी कार्यालय के सामने बैठ गए। अर्द्धबेहोशी की हालत में सुमन फर्श पर ही लेट गई।
इस बीच मेडिसिन वार्डों का निरीक्षण कर प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार एसआईसी कार्यालय के सामने आए। फर्श पर तड़प रही सुमन के पास ही खड़े होकर मातहतों को काफी देर तक निर्देश देते रहे लेकिन उसकी ओर ध्यान तक नहीं दिया।
हां, उनके जाने के बाद सीएमएस डॉ. सीएस सिंह की नजर बिटिया पर पड़ी लेकिन वह भी एक कर्मचारी को मौके पर भेजकर खुद चलते बने। मां कुंती ने बताया कि सोमवार को भर्ती कराने से अब तक उसके 15 सौ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। सभी दवाएं बाहर से मंगाई जा रही हैं।
इस संबंध में मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. नवनीत कुमार के फोन पर कॉल की गई। लेकिन उन्होंने फोन िरसीव नहीं िकया।
एचओडी ने जूनियर डॉक्टर से व्यवस्था को कहा
सुमन की दशा पर मीडिया कर्मियों ने बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव से बात की। विभागाध्यक्ष ने एक जूनियर डॉक्टर को निर्देश दिया कि वह बच्ची के इलाज की पूरी व्यवस्था करे।