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झींझक की नौ समितियों में डीएपी का टोटा, निजी दुकानदारों ने शुरू की कालाबाजारी
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मंगलपुर साधन सहकारी समिति में लटकता ताला। (संवाद)
- फोटो : AKBARPUR
झींझक। एक ओर जहां मौसम की मार से किसान बेहाल हैं, वहीं दूसरी तरफ समितियों में खाद का टोटा होने से राई, सरसों व आलू की फसल बुआई पर ग्रहण लगा हुआ है। ऐसे मेें किसान परेशान हैं।
हालत यह है कि झींझक ब्लॉक की नौ साधन सहकारी समितियों में डीएपी नहीं है। इसका फायदा निजी दुकानदार उठाते हुए जमकर कालाबाजारी कर रहे हैं। किसानों से प्रति बोरी सौ से दो सौ रुपये अधिक वसूले जा रहे हैं।
ब्लॉक क्षेत्र की साधन सहकारी समिति मंगलपुर, किशौरा, खमहैला, औरंगाबाद डालचंद्र, पिलख, बान बाजार, बनीपारा व बिरिया रसूलाबाद में डीएपी न होने के कारण किसान परेशान हैं।
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वही झींझक क्रय विक्रय समिति काफी दिनों से बंद चल रही है। ऐसे में किसानों को डीएपी नहीं मिल पा रही। जबकि ब्लॉक अधिकारियों का कहना है कि समितियों में 4500 बोरी डीएपी पहुंचाने के लिए एक माह पूर्व विभाग में चेक लगाई जा चुकी है, लेकिन खाद नहीं आ पा रही है।
वहीं इफ्को के प्राइवेट लाइसेंसधारियों के पास खाद उपलब्ध है। समितियों में डीएपी की जो बोरी 1200 रुपये में मिलती है, निजी दुकानदार सौ से दो सौ रुपये अधिक मेें बिक्री कर रहे हैं। किसान भी मजबूरन मनमाने दामों पर खाद खरीदते हैं। अगर किसी ने विरोध किया तो उसे बैरंग लौटा दिया जाता है।
झींझक ब्लॉक की समितियों में डीएपी क्यों नहीं पहुंच पाई है, इसकी जानकारी कर जल्द ही खाद भेजी जाएगी। - देवेंद्र वर्मन, सहायक निबंधक, सहकारिता
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हालत यह है कि झींझक ब्लॉक की नौ साधन सहकारी समितियों में डीएपी नहीं है। इसका फायदा निजी दुकानदार उठाते हुए जमकर कालाबाजारी कर रहे हैं। किसानों से प्रति बोरी सौ से दो सौ रुपये अधिक वसूले जा रहे हैं।
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ब्लॉक क्षेत्र की साधन सहकारी समिति मंगलपुर, किशौरा, खमहैला, औरंगाबाद डालचंद्र, पिलख, बान बाजार, बनीपारा व बिरिया रसूलाबाद में डीएपी न होने के कारण किसान परेशान हैं।
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वही झींझक क्रय विक्रय समिति काफी दिनों से बंद चल रही है। ऐसे में किसानों को डीएपी नहीं मिल पा रही। जबकि ब्लॉक अधिकारियों का कहना है कि समितियों में 4500 बोरी डीएपी पहुंचाने के लिए एक माह पूर्व विभाग में चेक लगाई जा चुकी है, लेकिन खाद नहीं आ पा रही है।
वहीं इफ्को के प्राइवेट लाइसेंसधारियों के पास खाद उपलब्ध है। समितियों में डीएपी की जो बोरी 1200 रुपये में मिलती है, निजी दुकानदार सौ से दो सौ रुपये अधिक मेें बिक्री कर रहे हैं। किसान भी मजबूरन मनमाने दामों पर खाद खरीदते हैं। अगर किसी ने विरोध किया तो उसे बैरंग लौटा दिया जाता है।
झींझक ब्लॉक की समितियों में डीएपी क्यों नहीं पहुंच पाई है, इसकी जानकारी कर जल्द ही खाद भेजी जाएगी। - देवेंद्र वर्मन, सहायक निबंधक, सहकारिता