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दांदरपुर: गांव में पसरा सन्नाटा, दहशत में कट रहे दिन-रात

Sat, 28 Jun 2025 12:42 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 28 Jun 2025 12:42 AM IST
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Dandarpur: Silence prevails in the village, days and nights are spent in fear
इटावा/बकेवर। दांदरपुर गांव के बाहर गुरुवार को दोपहर में हुए बवाल के बाद ग्रामीणों की रात जागकर बीती। शुक्रवार की सुबह भी दहशत और बवाल की चर्चाओं के साथ हुई। दिनभर लोग गांव के बाहर एक दूसरे से चर्चाएं करते रहे। मोबाइल से अपडेट भी लेते रहे। दूसरी ओर, गांव के प्रवेश मार्गाें पर तैनात पुलिस व पीएसी की टीमों ने पूछताछ के बाद ही बाहरी लोगों को गांव में प्रवेश करने दिया।
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गुरुवार की दोपहर में लगभग तीन घंटे दांदरपुर गांव के बाहर चले बवाल को लेकर ग्रामीणों में शुक्रवार को भी दहशत नजर आई। वहीं, गांव के प्रमुख तीनों रास्तों पर पुलिस और पीएसी की टीम तैनात रही। गांव के अंदर प्रभारी निरीक्षक बलराम मिश्रा कुछ सिपाहियों के साथ तैनात रहे। बाहरी लोगों को पूछताछ के बाद गांव में जाने दिया। सुबह कम ही लोग गांव से बाहर गए। इस वजह से सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।
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दोपहर को लगभग एक बजे गीता देवी अपने घर के बाहर परिवार के साथ बैठी थीं। उन्होंने बताया कि अच्छी खासी भागवत कथा शुरू हुई थी, लेकिन कथावाचक ने अपनी जाति छिपाकर हम लोगों को धोखा देकर भावनाओं को ठेस पहुंचाई। इसके बाद छेड़छाड़ करके गांव के लोगों को आक्रोशित कर दिया। बोलीं कि कथावाचक होकर इस तरह की चीजें उन्हें शोभा नहीं देतीं। बताया कि गुरुवार के बवाल के बाद गांव से बाहर जाने में डर लग रहा है। आसपास के गांवों में जिन लोगों के खेत हैं, वह भी अकेले जाने से बच रहे हैं।
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वहीं, थोड़ी सी दूरी पर चबूतरे के सामने बनी दीवार के पास गांव की दो महिलाएं मोबाइल फोन में गांव की खबरें सुन रही थीं। पूछने पर बताया कि लला कथावाचक होकर इतना झूठ बोल रहे हैं। ऐसे में उनके झूठ को ही सुन रहे हैं।
कार्यक्रम में यजमान बने व्यक्ति भी अपने घर के बाहर चबूतरे पर गुमसुम बैठे थे। पूछने पर बताया कि हम तो गुजरात में रहते हैं। वहां पर कोटे की दुकान है। गांव में भागवत कथा होने की जानकारी होने पर आए थे। सोचा था कि भागवत कथा होने के बाद चले जाएंगे, लेकिन मुसीबत में फंस गए। बताया कि कब जा पाएंगे यह भी नहीं पता। मानसिक तनाव की वजह से नींद नहीं आती है। कथावाचक ने हम लोगों से ही नहीं जालौन वाले पाठक बाबा से भी झूठ बोला। यदि सही जाति बता देते तो हम लोग उनसे कथा ही नहीं कराते। न ही वह छेड़खानी जैसी हरकत करते। बताया कि आक्रोश में युवकों ने मारपीट और बाल तो काटे हैं पर पेशाब छिड़कने वाला आरोप बदनाम करने वाला है।


गांव के नितिन भी गांव के लोगों के साथ पेड़ के नीचे बैठे थे। उन्होंने बताया कि वह खेतीबाड़ी करते हैं। गुरुवार को हुए बवाल के बाद अब खेत तक जाने में डर लगता है। निवाड़ीकला-लुधियानी रोड पर तो गुरुवार के बाद से गए ही नहीं हैं।
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