{"_id":"6070952f8ebc3ec8967e1217","slug":"daku-ka-putra-bhi-maidaan-me-kanpur-news-knp622545584","type":"story","status":"publish","title_hn":"पूर्व डकैत खडग सिंह की पत्नी और जेल में बंद राधे का बेटा प्रधान पद का प्रत्याशी---","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पूर्व डकैत खडग सिंह की पत्नी और जेल में बंद राधे का बेटा प्रधान पद का प्रत्याशी---
विज्ञापन
चित्रकूट/मानिकपुर। डकैतों की आमद से अभी तक कोई भी चुनाव अछूते नहीं रहे। अबकी भी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पूर्व में डाकू रह चुके और अब सामान्य जीवन यापन कर रहे खडग सिंह की पत्नी निवर्तमान प्रधान माया देवी और 12 साल से जेल में बंद छह लाख के इनामी और पुलिस एनकाउंटर में मारे गए कुख्यात डाकू ददुआ का दाहिना हाथ रहे डाकू राधे का बेटे अरिमर्दन सिंह सोनू ने सदर ब्लाक के शीतलपुर तरौंहा गांव से प्रधान पद के लिए नामांकनपत्र दाखिल किया है।
शीतलपुर तरौंहा गांव में डाकू राधे की पत्नी सत्यवती लगातार दो बार प्रधान रह चुकी हैं। अबकी उसके बेटे अरिमर्दन सिंह सोनू ने नामांकन कर विपक्षियों समेत जिला प्रशासन को चुनौती दी है। अरिमर्दन ने अपने मां सत्यवती की सीट पर प्रधानी पद के लिए दावा ठोंका है। इस सीट पर सन् 2000 से लेकर 2010 तक लगातार डाकू राधे की पत्नी का कब्जा रहा। माना जाता है कि डाकू ददुआ की हनक और डाकू राधे के फरमान से ही सत्यवती प्रधान बनी थी। अब हालात बदल चुके हैं, ददुआ मारा जा चुका है और राधे जेल में है, ऐसे में अब राधे के पुत्र के लिए प्रधानी की सीट जीतनी कांटों से कम नहीं होगी। उधर, अरिमर्दन और उसके परिजनों का दावा है कि अपराध की दुनिया से उनका वास्ता नहीं है।
ग्रामीणों की मदद के लिए कई साल से काम कर रहे हैं, ऐसे में वह भी चुनाव लड़ने का अधिकारी है। उधर, पूर्व में डाकू रह चुका खडग सिंह की पत्नी निवर्तमान प्रधान मायादेवी ने भी मडैययन सीट से प्रधान पद के लिए दोबारा नामांकन किया। बताया यह भी जाता है कि खुद खडग सिंह ने भी अपने नाम से नामांकनपत्र दाखिल किया है। हालांकि, इसकी अभी पुष्टि नहीं हो पाई। वहीं, हाल ही में जिला पुलिस ने एसटीएफ के साथ मिलकर डाकू गौरी यादव गैंग के खिलाफ अभियान चलाया है। जिसका नतीजा यह हुआ है कि मानिकपुर ब्लाक क्षेत्र के ददरीमाफी गांव से डेढ़ लाख रुपये के इनामी डाकू गौरी यादव की निवर्तमान प्रधान मां राजरानी ने अबकी पर्चा तक नहीं भर सकी। (संवाद)
विज्ञापन
नामांकन कराने वाले सभी को एक हलफनामे में शपथपत्र देना होता है, जिसमें पूरा ब्योरा होता है। आरओ जांच कराते हैं और किसी तथ्य को छिपाने पर आवेदन रद्द तक हो सकता है। इस मामले में संबंधित के खिलाफ अदालत का फैसला भी मुख्य आधार माना जाता है।
-शुभ्रांत कुमार शुक्ल, जिलाधिकारी
नामांकन करने वाले अपराधी या उनके परिजनों पर खास नजर रहती है। किसी भी हालत में चुनाव में गलत तरीके से प्रचार और दबाव बनाने की छूट नहीं होती। ऐसा करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होती है। चुनाव प्रक्रिया में किसी तरह का खलल नहीं पड़ना चाहिए।
-अंकित मित्तल, पुलिस अधीक्षक
ग्राम प्रधान पद के लिए 731 पत्र जमा हुए हैं, जिसमें खडग सिंह नाम के आदमी ने नामांकन कराया है कि नहीं, अभी याद नहीं है।
-सुनील कुमार, बीडीओ मानिकपुर
विज्ञापन
शीतलपुर तरौंहा गांव में डाकू राधे की पत्नी सत्यवती लगातार दो बार प्रधान रह चुकी हैं। अबकी उसके बेटे अरिमर्दन सिंह सोनू ने नामांकन कर विपक्षियों समेत जिला प्रशासन को चुनौती दी है। अरिमर्दन ने अपने मां सत्यवती की सीट पर प्रधानी पद के लिए दावा ठोंका है। इस सीट पर सन् 2000 से लेकर 2010 तक लगातार डाकू राधे की पत्नी का कब्जा रहा। माना जाता है कि डाकू ददुआ की हनक और डाकू राधे के फरमान से ही सत्यवती प्रधान बनी थी। अब हालात बदल चुके हैं, ददुआ मारा जा चुका है और राधे जेल में है, ऐसे में अब राधे के पुत्र के लिए प्रधानी की सीट जीतनी कांटों से कम नहीं होगी। उधर, अरिमर्दन और उसके परिजनों का दावा है कि अपराध की दुनिया से उनका वास्ता नहीं है।
विज्ञापन
ग्रामीणों की मदद के लिए कई साल से काम कर रहे हैं, ऐसे में वह भी चुनाव लड़ने का अधिकारी है। उधर, पूर्व में डाकू रह चुका खडग सिंह की पत्नी निवर्तमान प्रधान मायादेवी ने भी मडैययन सीट से प्रधान पद के लिए दोबारा नामांकन किया। बताया यह भी जाता है कि खुद खडग सिंह ने भी अपने नाम से नामांकनपत्र दाखिल किया है। हालांकि, इसकी अभी पुष्टि नहीं हो पाई। वहीं, हाल ही में जिला पुलिस ने एसटीएफ के साथ मिलकर डाकू गौरी यादव गैंग के खिलाफ अभियान चलाया है। जिसका नतीजा यह हुआ है कि मानिकपुर ब्लाक क्षेत्र के ददरीमाफी गांव से डेढ़ लाख रुपये के इनामी डाकू गौरी यादव की निवर्तमान प्रधान मां राजरानी ने अबकी पर्चा तक नहीं भर सकी। (संवाद)
विज्ञापन
नामांकन कराने वाले सभी को एक हलफनामे में शपथपत्र देना होता है, जिसमें पूरा ब्योरा होता है। आरओ जांच कराते हैं और किसी तथ्य को छिपाने पर आवेदन रद्द तक हो सकता है। इस मामले में संबंधित के खिलाफ अदालत का फैसला भी मुख्य आधार माना जाता है।
-शुभ्रांत कुमार शुक्ल, जिलाधिकारी
नामांकन करने वाले अपराधी या उनके परिजनों पर खास नजर रहती है। किसी भी हालत में चुनाव में गलत तरीके से प्रचार और दबाव बनाने की छूट नहीं होती। ऐसा करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होती है। चुनाव प्रक्रिया में किसी तरह का खलल नहीं पड़ना चाहिए।
-अंकित मित्तल, पुलिस अधीक्षक
ग्राम प्रधान पद के लिए 731 पत्र जमा हुए हैं, जिसमें खडग सिंह नाम के आदमी ने नामांकन कराया है कि नहीं, अभी याद नहीं है।
-सुनील कुमार, बीडीओ मानिकपुर