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Kanpur News: सिलिंडर संकट ने डाला ईद की तैयारियों पर असर
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कानपुर। रमजान और ईद की तैयारी के बीच मुस्लिम समाज को गैस सिलिंडर की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या के कारण सहरी और इफ्तारी के लिए खाना तैयार करने में भी परेशानियां हो रही हैं। लोगों का कहना है कि अगर ऐसे ही रहा तो त्यौहार की खुशियां फीकी पड़ जाएंगी।
मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि सिलिंडर की अनुपलब्धता ने उनकी दैनिक दिनचर्या को बाधित कर दिया है। रमजान के दौरान सुबह जल्दी सहरी और शाम को इफ्तारी के लिए खाना बनाना जरूरी होता है। ऐसे समय में गैस सिलिंडर न मिलना उनकी धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में बाधा डाल रहा है। कई परिवारों को लकड़ी या अन्य पारंपरिक ईंधन का उपयोग करना पड़ रहा है। ईद का त्याैहार नजदीक होने के कारण घरों में पकवान बनाने और मेहमानों के स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं। सिलिंडर की कमी इन तैयारियों में एक बड़ी चुनौती बन गई है। स्थानीय प्रशासन और गैस एजेंसियों से इस समस्या के शीघ्र समाधान की मांग की जा रही है।
कोयले या लकड़ी के चूल्हे जलाने पड़ेंगे
सुबह सहरी से लेकर इफ्तारी और रात के खाने तक रमजान में कई तरह की पकवान बनाए जाते हैं। अब तो गर्मी पड़ने लगी है। सभी कुछ ताजा ही बनाना पड़ता है। सिलिंडर न रहने पर कोयले या लकड़ी के चूल्हे जलाने पड़ेंगे। - अक्सा, चमनगंज
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सहरी में सबसे ज्यादा गैस की जरूरत
15 दिन से सिलिंडर बुक कर रहे हैं। अभी तक बुकिंग ही नहीं हुई है। दूसरा सिलिंडर भी खत्म होने वाला है। त्यौहार का समय है। इस समय तो सहरी में सबसे ज्यादा गैस की जरूरत पड़ती है। - इंतजार हुसैन, बेकनगंज
त्यौहार की खुशी तो फीकी
ईद आने वाली है। ईद में तो कई सारे पकवान बनते हैं। तीन दिन तक मेहमानों का आना जाना लगा रहता है। ऐसे में सिलिंडर की किल्लत से त्यौहार की खुशी तो फीकी हो जा रही है। - फरहा शोएब, चमनगंज
पहले से बुक हो गया सिलिंडर
मेरे ससुर तौकीर अहमद के नाम सिलिंडर गैस का कनेक्शन है। हमने 15 मार्च को बुक कराने पहुंचे तो बताया गया कि एक मार्च को आपकी बुकिंग हो चुकी है। हमारा सिलिंडर भी खत्म होने वाला है। अगर नहीं मिला तो कैसे त्यौहार मना सकेंगे। - शरियत, रावतपुर रोशन नगर
बेकनगंज निवासी जहां आरा ने बताया कि सिलिंडर लेने के लिए दो दिन से लाइन लगानी पड़ रही है। खाने-पीने की परेशानी है। सिलिंडर तो मिल नहीं रहा। ऐसे में तो लग रहा है दोबारा पुराने ढर्रे पर चूल्हा जलाने पर ही आना पड़ेगा। कभी सहरी में देर से उठे तो गैस चूल्हे से जल्दी सेंवई, सूतफेनी या हलवा जैसी चीजें तैयार हो जाती हैं। अब सहरी में कौन चूल्हा लेकर फूंकने बैठेगा। ऐसे में तो हमारी सहरी भी छूट जाएगी।
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मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि सिलिंडर की अनुपलब्धता ने उनकी दैनिक दिनचर्या को बाधित कर दिया है। रमजान के दौरान सुबह जल्दी सहरी और शाम को इफ्तारी के लिए खाना बनाना जरूरी होता है। ऐसे समय में गैस सिलिंडर न मिलना उनकी धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में बाधा डाल रहा है। कई परिवारों को लकड़ी या अन्य पारंपरिक ईंधन का उपयोग करना पड़ रहा है। ईद का त्याैहार नजदीक होने के कारण घरों में पकवान बनाने और मेहमानों के स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं। सिलिंडर की कमी इन तैयारियों में एक बड़ी चुनौती बन गई है। स्थानीय प्रशासन और गैस एजेंसियों से इस समस्या के शीघ्र समाधान की मांग की जा रही है।
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कोयले या लकड़ी के चूल्हे जलाने पड़ेंगे
सुबह सहरी से लेकर इफ्तारी और रात के खाने तक रमजान में कई तरह की पकवान बनाए जाते हैं। अब तो गर्मी पड़ने लगी है। सभी कुछ ताजा ही बनाना पड़ता है। सिलिंडर न रहने पर कोयले या लकड़ी के चूल्हे जलाने पड़ेंगे। - अक्सा, चमनगंज
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सहरी में सबसे ज्यादा गैस की जरूरत
15 दिन से सिलिंडर बुक कर रहे हैं। अभी तक बुकिंग ही नहीं हुई है। दूसरा सिलिंडर भी खत्म होने वाला है। त्यौहार का समय है। इस समय तो सहरी में सबसे ज्यादा गैस की जरूरत पड़ती है। - इंतजार हुसैन, बेकनगंज
त्यौहार की खुशी तो फीकी
ईद आने वाली है। ईद में तो कई सारे पकवान बनते हैं। तीन दिन तक मेहमानों का आना जाना लगा रहता है। ऐसे में सिलिंडर की किल्लत से त्यौहार की खुशी तो फीकी हो जा रही है। - फरहा शोएब, चमनगंज
पहले से बुक हो गया सिलिंडर
मेरे ससुर तौकीर अहमद के नाम सिलिंडर गैस का कनेक्शन है। हमने 15 मार्च को बुक कराने पहुंचे तो बताया गया कि एक मार्च को आपकी बुकिंग हो चुकी है। हमारा सिलिंडर भी खत्म होने वाला है। अगर नहीं मिला तो कैसे त्यौहार मना सकेंगे। - शरियत, रावतपुर रोशन नगर
बेकनगंज निवासी जहां आरा ने बताया कि सिलिंडर लेने के लिए दो दिन से लाइन लगानी पड़ रही है। खाने-पीने की परेशानी है। सिलिंडर तो मिल नहीं रहा। ऐसे में तो लग रहा है दोबारा पुराने ढर्रे पर चूल्हा जलाने पर ही आना पड़ेगा। कभी सहरी में देर से उठे तो गैस चूल्हे से जल्दी सेंवई, सूतफेनी या हलवा जैसी चीजें तैयार हो जाती हैं। अब सहरी में कौन चूल्हा लेकर फूंकने बैठेगा। ऐसे में तो हमारी सहरी भी छूट जाएगी।