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UP: एआई डीपफेक से साइबर ठग बना रहे लोगों को निशाना, हूबहू आवाज और पुलिस की डीपी लगे नंबर से आती है कॉल

Sat, 13 Apr 2024 01:06 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sat, 13 Apr 2024 01:06 PM IST
सार

Kanpur News: एडीसीपी कहते हैं कि इस नई तरह की साइबर ठगी में कोडर और डिकोडर टेक्नोलॉजी की मदद ली जाती है। मार्केट में मौजूद डीपफेक बनाने से जुड़े एप की मदद से आसानी से वीडियो बनाया जा रहा है। ऐसे में जितना सतर्क रहेंगे, उतना ही नुकसान से बचाव होगा।

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Cyber thugs are targeting people with AI deepfakes, calls come from the same number with identical voice and
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पिछले एक हफ्ते में तीन केस दर्ज हुए हैं जिनमें डीपफेक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर पीड़ित को उसके ही परिवार के किसी सदस्य की आवाज में कॉल कर दबाव में लिया गया। हालांकि अगर थोड़ी सी सावधानी बरती जाए तो ऐसी ठगी से बचा जा सकता है। एडीसीपी क्राइम मनीष सोनकर कहते हैं कि अगर आपके पास इस तरह का फोन आए, तो सबसे पहले उस कॉल को काट दें।

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इसके बाद अपने उसी रिश्तेदार या करीबी को तत्काल सामान्य कॉल कर घटना के बारे में जानकारी करें।  ऐसा हो सकता है कि आपके फोन से सामान्य कॉल न जाए। अगर ऐसा होता है तो भी परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि साइबर ठग सर्वर जाम कर देते हैं ताकि कॉल न जा सके। ऐसे में संबंधित व्यक्ति के व्हाट्सएप नंबर पर वॉइस या वीडियो कॉल कर मामले की तस्दीक कर साइबर ठगी से बचा जा सकता है।

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केस एक
पनकी रतनपुर कॉलोनी निवासी दिनेश सिंह के पास व्हाट्सएप वॉयस कॉल आई जिसमें पहले उसके भतीजे मनोज सिंह की आवाज में साइबर ठग ने बचाने की गुहार लगाई। इसके बाद खुद को सचेंडी थाने में तैनात पुलिस कर्मी बता भतीजे के दुष्कर्म व हत्या के मामले में फंसने की बात कहकर जेल भेजने की धमकी दी। डरे दिनेश से कॉल करने वाले ने दो लाख रुपये मांग लिए। घबराकर संदीप ने एक लाख रुपये बताए गए खाते में डाल दिया।

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केस दो
आईआईटी कानपुर में पढ़ाई कर रहे छात्र उत्कर्ष की मां के पास 3 अप्रैल को साइबर ठग ने व्हाट्सएप कॉल कर बेटे के दुष्कर्म व हत्या के मामले में फंसने की बात कही। फिर बेटे की आवाज में कहा गया कि मां, मुझे उसे दोस्तों ने फंसा दिया है, बचा लो। बेटे की हूबहू आवाज में मदद मांगे जाने पर मां ने आनन फानन चालीस हजार रुपये बताए गए खाते में जमा करा दिए। हालांकि जब बेटे से कॉल कर बात की तो साइबर ठगी का पता चला।

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ऐसे बनाया जाता है दबाव
आम तौर पर किसी करीबी रिश्तेदार के नाम पर ही पीड़ित को निशाना बनाया जाता है। पुलिस कर्मी की फोटो वाले नंबर से व्हाट्सएप कॉल आती है और आवाज पीड़ित के करीबी की होती है, जिसमें वह डरा हुआ मदद की गुहार लगाता है। मिलती जुलती आवाज की वजह से लोग अक्सर हड़बड़ा जाते हैं। इसके बाद पुलिस कर्मी की डीपी लगे व्हाट्सएप नंबर से कॉल कर अर्दब में लेकर किसी अपराध में फंसने का हवाला देकर छोड़ने के एवज में हजारों लाखों रुपये की डिमांड करते हैं।

क्या है डीपफेक
डीपफेक की इन दिनों काफी चर्चा है। सोशल मीडिया प्रयोग करने वालों से लेकर फिल्म जगत के लोग इस टेक्नोलॉजी से काफी डरे हुए हैं। साथ ही, इसे इंसानों की निजता के लिए खतरा बता रहे हैं। किसी रियल वीडियो में दूसरे के चेहरे को लगा कर देने को डीपफेक नाम दिया गया है, जिससे आप लोग यकीन मान लें। डीपफेक से वीडियो और फोटो को बनाया जाता है। इसमें मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया जाता है। इसमें वीडियो और ऑडियो को टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर की मदद बनाया जाता है। इसी डीपफेक से वीडियो बनाया जाता है।

कोडर और डिकोडर टेक्नॉलाजी की ली जा रही मदद
एडीसीपी कहते हैं कि इस नई तरह की साइबर ठगी में कोडर और डिकोडर टेक्नोलॉजी की मदद ली जाती है। डिकोडर से पहले किसी इंसान के चेहरे को हावभाव और बनावट की गहन जांच करता है। इसके बाद किसी फर्जी चेहरे पर इसे लगाया जाता है, जिससे हूबहू फर्जी वीडियो और फोटो को बनाया जा सकता है। मार्केट में मौजूद डीपफेक बनाने से जुड़े एप की मदद से आसानी से वीडियो बनाया जा रहा है। ऐसे में जितना सतर्क रहेंगे, उतना ही नुकसान से बचाव होगा।

कॉल आए तो ये कदम उठाएं

  • 1930 नेशनल टोल फ्री नंबर पर जानकारी दें।
  • साइबर क्राइम के थाने में सूचना दें।
  • साइबर हेल्प डेस्क पर तुरंत जानकारी दें।
  • अपने परिवार के सभी सदस्यों को इस तरह की ठगी की जानकारी दें।
  • किसी सदस्य की कॉल आने पर सांसत में न पड़े, कॉल कर पुष्टि करें।

मैसेज, फोन या वीडियो से कोई धमकी देता है, तो फौरन स्थानीय थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएं। अगर आपसे गलती हुई है तो पुलिस को बताइए ताकि आपकी समय रहते मदद की जा सके। जितनी जल्दी साइबर ठगी की सूचना पुलिस को दी जाएगी, उतनी ज्यादा संभावना रुपये वापस दिलाने की होती है।  -हरीश चंदर, एडिशनल पुलिस कमिश्नर कानपुर

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