{"_id":"821504b44d92bab3375c9b19c4b7709d","slug":"csa-university-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘मैडम’ का फोन और कुल पति का होम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘मैडम’ का फोन और कुल पति का होम
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Thu, 29 Jan 2015 03:19 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में शिक्षकों की सीधी भर्ती और प्रमोशन का ठेका लेने वाली ‘मैडम’ का कनेक्शन कुलपति प्रो. मुन्ना सिंह के आवास से है।
इस मामले में भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले डॉ. प्रभाकांत के मोबाइल की कॉल डिटेल से यह सच सामने आया है। इसके साथ ही एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि कुलपति आवास पर लगे टेलीफोन का इस्तेमाल करते हुए सीधी भर्ती और प्रमोशन का ठेका लेने वाली ‘मैडम’ का कुलपति से क्या संबंध है?
कुलपति ने आखिर किस महिला को अपने आवास के फोन से इस तरह बात करने की इजाजत दी है? निजी जांच-पड़ताल में यह तथ्य सामने आए हैं कि कुलपति आवास में लगे बेसिक टेलीफोन से 6 मई 2014 को ‘मैडम’ ने भर्ती के लिए सौदेबाजी की बातचीत डॉ. प्रभाकांत मिश्रा से की थी।
विज्ञापन
प्रभाकांत ने ही राज्यपाल राम नाईक से इस मामले की शिकायत की थी। जिस पर राज्यपाल ने भर्ती प्रक्रिया पर जांच पूरी होने तक रोक लगा दी है। इस संबंध में कुलपति मुन्ना सिंह से उनका पक्ष जानने के काफी प्रयास किए गए, मगर कोई जवाब नहीं मिला।
रिकॉर्ड के मुताबिक मोबाइल नंबर 9919183055 पर कुलपति आवास के बेसिक टेलीफोन नंबर (0512253345 ) से इनकमिंग कॉल है।
बीएसएनएल का बेसिक टेलीफोन नंबर 0512-2533458 कुलपति कैंप कार्यालय यानी आवास पर लगा है। कनेक्शन रिसर्च प्लानिंग कोआर्डिनेशन के नाम से है।
बेनाझाबर एक्सचेंज से जुड़े इस टेलीफोन की बिलिंग वीसी रेजीडेंस के नाम से होती है। पूर्व कुलपति डॉ. रामनाथ का नाम भी बिलिंग के पुराने रिकॉर्ड में है। इस टेलीफोन का कनेक्शन 5 अक्तूबर 2004 को हुआ था।
इसकी कॉल डिटेल चेक कराई जाए तो वे आरोपों को पुख्ता आधार दे सकती हैं। कॉल डिटेल में कॉल ड्यूरेशन और वॉयस रिकॉर्डिंग का कॉल ड्यूरेशन एक दूसरे को पूरी तरह से सपोर्ट कर रहे हैं।
मैडम और डॉ. प्रभाकांत के बीच कुल 10 मिनट 4 सेकेंड तक बातचीत हुई है। वार्तालाप की वॉयस रिकार्डिंग 10 मिनट 3 सेंकेंड है।
कॉल डिटेल प्रभाकांत के मोबाइल पर इनकमिंग की पुष्टि कर रही है तो मैडम की ओर से शुरुआती संबोधन -प्रभाकांत जी बोल रहे हैं? इसकी पुष्टि कर रहा है।
कॉल डिटेल में और वायस रिकॉर्डिंग में बातचीत की अवधि में महज एक सेकेंड का फर्क है। इस मामले में जिस तरह के टेक्निकल साक्ष्य हैं, वॉयस के नमूने लेकर बड़ी आसानी से सच्चाई तक पहुंचा जा सकता है।
वहीं डॉ. प्रभाकांत मिश्रा के मोबाइल की कॉल डिटेल सामने आने के बाद कुलपति प्रो. मुन्ना सिंह से मोबाइल फोन पर बातचीत करने की कोशिश की गई लेकिन बात नहीं हो सकी।
बुधवार को अपराह्न 4:46 बजे कुलपति को उनके मोबाइल नंबर पर एसएमएस किया गया। एसएमएस के जरिए ही कुलपति से पूछा गया कि आपके आवास के बेसिक टेलीफोन से किस महिला ने प्रभाकांत को फोन करके शिक्षकों की सीधी भर्ती और प्रमोशन का ठेका लिया है।
महिला का आपसे क्या संबंध हैं। इसका कोई जवाब नहीं आया है लेकिन ‘अमर उजाला’ यह भरोसा दिलाता है कि कुलपति जब भी अपना पक्ष रखेंगे, उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
विज्ञापन
इस मामले में भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले डॉ. प्रभाकांत के मोबाइल की कॉल डिटेल से यह सच सामने आया है। इसके साथ ही एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि कुलपति आवास पर लगे टेलीफोन का इस्तेमाल करते हुए सीधी भर्ती और प्रमोशन का ठेका लेने वाली ‘मैडम’ का कुलपति से क्या संबंध है?
विज्ञापन
कुलपति ने आखिर किस महिला को अपने आवास के फोन से इस तरह बात करने की इजाजत दी है? निजी जांच-पड़ताल में यह तथ्य सामने आए हैं कि कुलपति आवास में लगे बेसिक टेलीफोन से 6 मई 2014 को ‘मैडम’ ने भर्ती के लिए सौदेबाजी की बातचीत डॉ. प्रभाकांत मिश्रा से की थी।
विज्ञापन
प्रभाकांत ने ही राज्यपाल राम नाईक से इस मामले की शिकायत की थी। जिस पर राज्यपाल ने भर्ती प्रक्रिया पर जांच पूरी होने तक रोक लगा दी है। इस संबंध में कुलपति मुन्ना सिंह से उनका पक्ष जानने के काफी प्रयास किए गए, मगर कोई जवाब नहीं मिला।
रिकॉर्ड के मुताबिक मोबाइल नंबर 9919183055 पर कुलपति आवास के बेसिक टेलीफोन नंबर (0512253345 ) से इनकमिंग कॉल है।
बीएसएनएल का बेसिक टेलीफोन नंबर 0512-2533458 कुलपति कैंप कार्यालय यानी आवास पर लगा है। कनेक्शन रिसर्च प्लानिंग कोआर्डिनेशन के नाम से है।
बेनाझाबर एक्सचेंज से जुड़े इस टेलीफोन की बिलिंग वीसी रेजीडेंस के नाम से होती है। पूर्व कुलपति डॉ. रामनाथ का नाम भी बिलिंग के पुराने रिकॉर्ड में है। इस टेलीफोन का कनेक्शन 5 अक्तूबर 2004 को हुआ था।
इसकी कॉल डिटेल चेक कराई जाए तो वे आरोपों को पुख्ता आधार दे सकती हैं। कॉल डिटेल में कॉल ड्यूरेशन और वॉयस रिकॉर्डिंग का कॉल ड्यूरेशन एक दूसरे को पूरी तरह से सपोर्ट कर रहे हैं।
मैडम और डॉ. प्रभाकांत के बीच कुल 10 मिनट 4 सेकेंड तक बातचीत हुई है। वार्तालाप की वॉयस रिकार्डिंग 10 मिनट 3 सेंकेंड है।
कॉल डिटेल प्रभाकांत के मोबाइल पर इनकमिंग की पुष्टि कर रही है तो मैडम की ओर से शुरुआती संबोधन -प्रभाकांत जी बोल रहे हैं? इसकी पुष्टि कर रहा है।
कॉल डिटेल में और वायस रिकॉर्डिंग में बातचीत की अवधि में महज एक सेकेंड का फर्क है। इस मामले में जिस तरह के टेक्निकल साक्ष्य हैं, वॉयस के नमूने लेकर बड़ी आसानी से सच्चाई तक पहुंचा जा सकता है।
वहीं डॉ. प्रभाकांत मिश्रा के मोबाइल की कॉल डिटेल सामने आने के बाद कुलपति प्रो. मुन्ना सिंह से मोबाइल फोन पर बातचीत करने की कोशिश की गई लेकिन बात नहीं हो सकी।
बुधवार को अपराह्न 4:46 बजे कुलपति को उनके मोबाइल नंबर पर एसएमएस किया गया। एसएमएस के जरिए ही कुलपति से पूछा गया कि आपके आवास के बेसिक टेलीफोन से किस महिला ने प्रभाकांत को फोन करके शिक्षकों की सीधी भर्ती और प्रमोशन का ठेका लिया है।
महिला का आपसे क्या संबंध हैं। इसका कोई जवाब नहीं आया है लेकिन ‘अमर उजाला’ यह भरोसा दिलाता है कि कुलपति जब भी अपना पक्ष रखेंगे, उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।