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Kanpur News: सीएसए में शिक्षकों से पांच साल के कामकाज का ब्योरा तलब
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कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) प्रशासन अब शिक्षकों के पांच साल के कार्यों का ब्योरा एकत्र कर रहा है। इसी आधार पर विवि प्रशासन शिक्षकों का आकलन करेगा। विवि ने आर्गेनिक खेती के प्रोजेक्ट को भी अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत इस साल से अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं को शिक्षकों के नेतृत्व में खेती का प्रायोगिक अनुभव कराया जाएगा।
दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की नाराजगी के बाद उनकी ओर से दिए गए दिशा निर्देश के अनुसार सीएसए ने स्वयं को ढालना शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों से पिछले पांच साल के काम काज का ब्योरा मांगा गया है। इसमें शिक्षकों से पीएचडी और शोध कार्य की जानकारी मांगी गई है।
कितने शिक्षकों ने छात्रों को जैविक खेती की जानकारी दी और उनको इसके लिए प्रेरित किया इसका विवरण भी पूछा गया है। इसके अलावा कितने छात्रों ने सीएसए से अर्जित ज्ञान का उपयोग व्यावहारिक रूप में किया और कितने ने स्वयं की खेती में बदलाव किया इसकी भी जानकारी मांगी गई है।
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राज्यपाल की मंशा के अनुरूप शिक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर एक कार्य योजना तैयार करने का भी प्रस्ताव है। विश्वविद्यालय प्रशासन अब यह जानकारी भी जुटा रहा है कि क्या छात्र-छात्राओं को विवि के कृषि फार्मों पर प्रायोगिक खेती करने का मौका दिया जा सकता है।
इससे विश्वविद्यालय की बीज उत्पादन शृंखला भी मजबूत होगी और छात्र-छात्राओं को सीखने का भी मौका मिलेगा। कुलपति प्रो. आनंद कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षकों के पिछले पांच साल के कामकाज का डाटा जुटाया जा रहा है। इसी आधार पर नए शिक्षण सत्र के लिए कार्य योजना तैयार की जाएगी।
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दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की नाराजगी के बाद उनकी ओर से दिए गए दिशा निर्देश के अनुसार सीएसए ने स्वयं को ढालना शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों से पिछले पांच साल के काम काज का ब्योरा मांगा गया है। इसमें शिक्षकों से पीएचडी और शोध कार्य की जानकारी मांगी गई है।
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कितने शिक्षकों ने छात्रों को जैविक खेती की जानकारी दी और उनको इसके लिए प्रेरित किया इसका विवरण भी पूछा गया है। इसके अलावा कितने छात्रों ने सीएसए से अर्जित ज्ञान का उपयोग व्यावहारिक रूप में किया और कितने ने स्वयं की खेती में बदलाव किया इसकी भी जानकारी मांगी गई है।
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राज्यपाल की मंशा के अनुरूप शिक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर एक कार्य योजना तैयार करने का भी प्रस्ताव है। विश्वविद्यालय प्रशासन अब यह जानकारी भी जुटा रहा है कि क्या छात्र-छात्राओं को विवि के कृषि फार्मों पर प्रायोगिक खेती करने का मौका दिया जा सकता है।
इससे विश्वविद्यालय की बीज उत्पादन शृंखला भी मजबूत होगी और छात्र-छात्राओं को सीखने का भी मौका मिलेगा। कुलपति प्रो. आनंद कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षकों के पिछले पांच साल के कामकाज का डाटा जुटाया जा रहा है। इसी आधार पर नए शिक्षण सत्र के लिए कार्य योजना तैयार की जाएगी।