सड़क हादसों में मौतों में कानपुर देश में पांचवें नंबर पर, 2019 में 692 लोगों की गई जान
बेतरतीब यातायात, खराब सड़कें, तेज रफ्तार और यातायात नियमों के उल्लंघन से हादसे और मौतें दोनों बढ़े हैं। जनवरी 2019 से दिसंबर-2019 के बीच दिल्ली में 1463, जयपुर में 1283, चेन्नई में 1283 और बंगलुरू में 768 लोगों ने सड़क हादसों में दम तोड़ा। कानपुर में इस अवधि में 692 लोगों की जान गई। कानपुर के आंकड़े इसलिए भी हैरान करने वाले हैं कि बाकी चार शहरों के मुकाबले कानपुर की आबादी कम है।
दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में कानपुर में हादसों की तीव्रता और गंभीरता 45.5 फीसदी है। ये दर सबसे ज्यादा है। यहां हर दूसरे हादसे में एक जान गई। आंकड़ों के मुताबिक कानपुर में प्रति 100 हादसों में 45 से अधिक लोगों की जानें गईं। दिल्ली में यह दर 26.1, जयपुर में 30, चेन्नई में 18.4 और बंगलुरु में 16.4 है।
उत्तर प्रदेश देश में टॉप पर
पूरे देश की बात करें तो 2019 में सड़क हादसों में उत्तर प्रदेश देश में टॉप पर रहा। इस साल देश में सड़क हादसों में 1 लाख 51 हजार 113 लोगों की मौत हुई, जिनमें यूपी में 22 हजार 655 लोग मरे। यह कुल मौतों का 15 प्रतिशत है। यूपी के बाद महाराष्ट्र 8.5 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 7.4 प्रतिशत मौतें हुईं। देश में सड़क हादसों में 0 से 18 साल तक के 2688 बच्चों की मौत हुईं। इनमें 24 प्रतिशत बच्चे यूपी के शामिल हैं।
आंकड़े चिंताजनक हैं। यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। जीटी रोड समेत शहर के आसपास के हाईवे पर सख्ती और बढ़ाई जाएगी जिससे सड़क हादसों को कम किया जा सके। इसके लिए अभियान भी चलाया जाएगा।
बसंत लाल, एसपी ट्रैफिक