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काली कमाई में ‘नंबर वन’ निकला ये शहर
टीम डिजिटल/ अमर उजाला,कानपुर
Updated Thu, 06 Oct 2016 02:48 PM IST
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काला धन बाहर निकालने में नंबर वन निकला यूपी का ये शहर
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काली कमाई में पूरे भारत में कानपुर शहर ने सबसे पहला नंबर हासिल किया है। टैक्स देने की क्षमता के आकलन के आधार पर इनकम टैक्स डिपार्टमेन्ट ने कानपुर को पहले स्थान पर रखा है। इस शहर से अब तक 1725 करोड़ रुपये काला धन सरेंडर हुआ है।
प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त आनंद दीप ने कालाधन बाहर निकालने में कानपुर को देश में टॉप बताया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता के मुकाबले कानपुर बहुत छोटा शहर है लेकिन यहां के कारोबारियों ने केंद्र सरकार की इस स्कीम में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और इसे सफल बनाया। देश की बेहतरी की दिशा में उनके इस कदम की आयकर विभाग सराहना करता है।
मर्चेंट चैंबर सभागार मेें आयकर अधिकारियों के सम्मान समारोह में उन्होंने स्कीम के तहत घोषित आय की रकम का खुलासा तो नहीं किया लेकिन विभागीय सूत्र बताते हैं कि कानपुर का सालाना टैक्स करीब 2000 करोड़ रुपये का है। इसके मुकाबले करीब 1725 करोड़ रुपये कालाधन सरेंडर हुआ है।
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दिल्ली और मुंबई के लोग कानपुर से ज्यादा टैक्स भी देते हैं लेकिन टैक्स की तुलना में कालाधन जमा करने में दिलचस्पी कम ही दिखाई है।
प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त ने कहा कि उरई और बांदा जैसे बहुत पिछड़े छोटे शहर के कारोबारियों ने जिस तरह से आय की घोषणा की, यह बहुत अप्रत्याशित था।
मुख्य आयकर आयुक्त दुर्गाचरण दास ने कहा कि कानपुर जैसे शहर में तो टैक्स रिसर्च इंस्टीट्यूट की जरूरत है। इससे यहां के लोगों को टैक्स के बारे में जानकारी मिल सकेगी। टैक्स जमा करवाना भी एक कला है।
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प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त आनंद दीप ने कालाधन बाहर निकालने में कानपुर को देश में टॉप बताया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता के मुकाबले कानपुर बहुत छोटा शहर है लेकिन यहां के कारोबारियों ने केंद्र सरकार की इस स्कीम में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और इसे सफल बनाया। देश की बेहतरी की दिशा में उनके इस कदम की आयकर विभाग सराहना करता है।
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मर्चेंट चैंबर सभागार मेें आयकर अधिकारियों के सम्मान समारोह में उन्होंने स्कीम के तहत घोषित आय की रकम का खुलासा तो नहीं किया लेकिन विभागीय सूत्र बताते हैं कि कानपुर का सालाना टैक्स करीब 2000 करोड़ रुपये का है। इसके मुकाबले करीब 1725 करोड़ रुपये कालाधन सरेंडर हुआ है।
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दिल्ली और मुंबई के लोग कानपुर से ज्यादा टैक्स भी देते हैं लेकिन टैक्स की तुलना में कालाधन जमा करने में दिलचस्पी कम ही दिखाई है।
प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त ने कहा कि उरई और बांदा जैसे बहुत पिछड़े छोटे शहर के कारोबारियों ने जिस तरह से आय की घोषणा की, यह बहुत अप्रत्याशित था।
मुख्य आयकर आयुक्त दुर्गाचरण दास ने कहा कि कानपुर जैसे शहर में तो टैक्स रिसर्च इंस्टीट्यूट की जरूरत है। इससे यहां के लोगों को टैक्स के बारे में जानकारी मिल सकेगी। टैक्स जमा करवाना भी एक कला है।