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इटावा: 10 वर्षीय मूक-बधिर बालक की गला रेतकर हत्या, इस हालत में मिला शव
Mon, 07 Sep 2020 07:14 PM IST
शिखा पांडेय
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, इटावा
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, इटावा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 07 Sep 2020 07:14 PM IST
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बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
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इटावा जिले में चकरनगर क्षेत्र के बिठौली थानांतर्गत गांव गता में सोमवार सुबह एक 10 वर्षीय बालक की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या करने के बाद उसका शव गांव के बाहर खेत में फेंक दिया गया। राहगीरों की सूचना पर परिजन और पुलिस पहुंची।
फोरेंसिक टीम या डॉग स्कवॉड की मदद न लेकर सीधे पोस्टमॉर्टम के लिए शव भिजवाने पर परिजनों ने गुस्सा व्यक्त किया इस पर सीओ चकरनगर ने समझा कर शांत किया। थाना बिठौली के गता गांव में खेतों पर मोर के पंख बीनने गए मूकबधिर 10 वर्षीय नितिन उर्फ बोरे पुत्र संतोष दोहरे की गला रेत कर हत्या कर दी गई।
उसका शव गांव के बाहर खेत में फेंक दिया गया। पिता संतोष कुमार दोहरे ने बताया कि नितिन सोमवार को सुबह 7-8 बजे के आसपास घर से चाय पीकर खेतों की ओर मोर के पंखों को बीनने के लिए अकेला रोज तरह गया था।
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लगभग 10 बजे के आसपास ग्रामीणों से सूचना मिली की नितिन को किसी ने मार डाला है। खेतों पर जाकर देखा तो नितिन का गला रेतकर उसकी हत्या कर दी गई थी। बिलखते परिजनों कह रहे थे कि गांव में हमारी किसी से किसी प्रकार की कोई दुश्मनी नहीं है तो हमारे बच्चे की हत्या क्यों कर दी गई।
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फोरेंसिक टीम या डॉग स्कवॉड की मदद न लेकर सीधे पोस्टमॉर्टम के लिए शव भिजवाने पर परिजनों ने गुस्सा व्यक्त किया इस पर सीओ चकरनगर ने समझा कर शांत किया। थाना बिठौली के गता गांव में खेतों पर मोर के पंख बीनने गए मूकबधिर 10 वर्षीय नितिन उर्फ बोरे पुत्र संतोष दोहरे की गला रेत कर हत्या कर दी गई।
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उसका शव गांव के बाहर खेत में फेंक दिया गया। पिता संतोष कुमार दोहरे ने बताया कि नितिन सोमवार को सुबह 7-8 बजे के आसपास घर से चाय पीकर खेतों की ओर मोर के पंखों को बीनने के लिए अकेला रोज तरह गया था।
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लगभग 10 बजे के आसपास ग्रामीणों से सूचना मिली की नितिन को किसी ने मार डाला है। खेतों पर जाकर देखा तो नितिन का गला रेतकर उसकी हत्या कर दी गई थी। बिलखते परिजनों कह रहे थे कि गांव में हमारी किसी से किसी प्रकार की कोई दुश्मनी नहीं है तो हमारे बच्चे की हत्या क्यों कर दी गई।
सूचना के तीन घंटे बाद पहुंची पुलिस
संतोष ने बताया कि घटना की सूचना पुलिस को दी तो तीन घंटे इंतजार के बाद पुलिस आई। इतना ही नहीं, पुलिस बिना कोई जांच पड़ताल किए नितिन के शव को कपड़े में लपेट कर जिला अस्पताल मोर्चरी ले गए। घटनास्थल पर फोरेंसिक, डॉग स्कवॉड आदि कुछ नहीं पहुंचा। गुस्साए परिजनों को वहां पहुंचे सीओ चकरनगर मस्सा सिंह ने शांत किया और कहा कि समय न होने के कारण शव को तत्काल डॉक्टरी परीक्षण के लिए भेज दिया गया है, किसी भी प्रकार के सबूत नहीं मिटे हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद हत्यारे को नहीं छोड़ा जाएगा।
हत्या या जंगली जानवर का हमला ?
नितिन सारा दिन गांव की गलियों में इधर-उधर घूमता रहता था। आखिर उसकी किस से क्या दुश्मनी हो सकती है जो उसकी निर्मम हत्या कर दी गई। ग्रामीणों की मानें तो नितिन ने कोई ऐसा गोपनीय काम होते हुए देख लिया हो जिसका रहस्य उजागर न हो इसलिए दरिंदे ने उसकी हत्या कर शव फेंक दिया हो। उन्हें यह भी शंका है कि किसी जंगली जानवर ने इसे अपना तो कहीं शिकार नहीं बना लिया।
बेहद सीधा सादा है मजदूर परिवार
संतोष दोहरे के दोनों ही पुत्र मूकबधिर हैं। परिवार मजदूरी करने वाला और बेहद सीधा-सादा है। मां सीमा भी एक सीधी सरल गृहिणी है। वह सोचकर परेशान हैं कि आखिर उनके बच्चे की किसी से क्या दुश्मनी हो सकती है जो इतनी बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया।
संतोष ने बताया कि घटना की सूचना पुलिस को दी तो तीन घंटे इंतजार के बाद पुलिस आई। इतना ही नहीं, पुलिस बिना कोई जांच पड़ताल किए नितिन के शव को कपड़े में लपेट कर जिला अस्पताल मोर्चरी ले गए। घटनास्थल पर फोरेंसिक, डॉग स्कवॉड आदि कुछ नहीं पहुंचा। गुस्साए परिजनों को वहां पहुंचे सीओ चकरनगर मस्सा सिंह ने शांत किया और कहा कि समय न होने के कारण शव को तत्काल डॉक्टरी परीक्षण के लिए भेज दिया गया है, किसी भी प्रकार के सबूत नहीं मिटे हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद हत्यारे को नहीं छोड़ा जाएगा।
हत्या या जंगली जानवर का हमला ?
नितिन सारा दिन गांव की गलियों में इधर-उधर घूमता रहता था। आखिर उसकी किस से क्या दुश्मनी हो सकती है जो उसकी निर्मम हत्या कर दी गई। ग्रामीणों की मानें तो नितिन ने कोई ऐसा गोपनीय काम होते हुए देख लिया हो जिसका रहस्य उजागर न हो इसलिए दरिंदे ने उसकी हत्या कर शव फेंक दिया हो। उन्हें यह भी शंका है कि किसी जंगली जानवर ने इसे अपना तो कहीं शिकार नहीं बना लिया।
बेहद सीधा सादा है मजदूर परिवार
संतोष दोहरे के दोनों ही पुत्र मूकबधिर हैं। परिवार मजदूरी करने वाला और बेहद सीधा-सादा है। मां सीमा भी एक सीधी सरल गृहिणी है। वह सोचकर परेशान हैं कि आखिर उनके बच्चे की किसी से क्या दुश्मनी हो सकती है जो इतनी बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया।