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‘पटरी पर ब्लास्ट करने को कहा था, तुमने तोड़ी क्यों’, इस कॉल रिकॉर्डिंग से मची सनसनी
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 20 Jan 2017 08:41 AM IST
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मोतिहारी में चलता है ट्रैक उखाड़ने का ट्रेनिंग कैंप
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पुखरायां में 20 नवंबर को इंदौर-पटना एक्सप्रेस के पलटने के हादसे में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस (आईएसआई) के शामिल होने के पुख्ता सबूत मिले हैं। जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय आईएसआई एजेंट नेपाल निवासी बृजकिशोर गिरी के दो खास गुर्गों राजू पटेल और जुबैर अहमद की मौजूदगी शहर में थी। मोतिहारी (बिहार) पुलिस से कानपुर के एक पुलिस अफसर को ऐसे सबूत और बातचीत की रिकार्डिंग मिली है। सूत्रों की मानें तो रिकार्डिंग में नेपाल में रहने वाला आईएसआई एजेंट बृजकिशोर गिरी, राजू पटेल और जुबैर अहमद से कह रहा है कि ‘तुम लोगों को पटरी ब्लास्ट करने को कहा गया था और उखाड़कर चले आए। अब तुम लोगों को पैसे वापस करने होंगे।‘ पुलिस बिहार निवासी राजू और जुबैर को कानपुर और पुखरायां में संरक्षण देने वालों और दोनों के संपर्क में रहने वालों की तलाश मेें जुट गई है। कई लोगों को रडार पर लिया गया है।
मंगलवार को मोतिहारी (बिहार) पुलिस ने आईएसआई से जुड़े मोती पासवान, मुकेश यादव, उमाशंकर प्रसाद उर्फ उमाशंकर पटेल को पकड़ा था। पूछताछ में मोती ने कबूल किया कि पुखरायां रेल हादसे के पीछे आईएसआई का हाथ है। आईएसआई एजेंट बृजकिशोर गिरी के कहने पर मोती, आदापुर मोतिहारी निवासी जुबैर और राजू कानपुर गए थे और हादसे को अंजाम दिया।
उधर, एटीएस के आईजी असीम अरुण, एटीएस कानपुर यूनिट के सीओ मनीष सोनकर, सीओ कल्याणपुर संजीव दीक्षित की टीम मोतिहारी पहुंचकर कस्टडी रिमांड पर लिए गए मोती पासवान, मुकेश यादव, उमाशंकर प्रसाद उर्फ उमाशंकर पटेल से पूछताछ कर रही है। इनसे यूपी पुलिस और एटीएस को महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, इनके आधार पर एटीएस और पुलिस ने काम शुरू कर दिया है। एंटी टेरेरिस्ट स्क्वायड (एटीएस) और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की टीमें शहर में कई लोगों पर नजर रखे हैं। कई को उठाया भी गया है, हालांकि पुलिस अफसर इस बारे में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
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मोतिहारी में चलता ट्रेनिंग कैंप
एटीएस और पुलिस अफसरों को पता चला है कि नेपाल में बैठकर आईएसआई एजेंट बृजकिशोर गिरी मोतिहारी में ट्रेनिंग कैंप भी चलाता था। वह बिहार के युवाओं को पैसों का लालच देकर आईएसआई से जोड़ता था। इसके बाद मोतिहारी में ही रेलवे के रिटायर्ड गैंगमैनों और की-मैनों के माध्यम से अपने गुर्गों को रेल पटरी उखाड़ने, पटरी में बम फिट करने की ट्रेनिंग दिलाता था। इसके बाद पैसा देकर इनसे ट्रेन उड़ाने और पटरी उखाड़ने, ट्रैक डिस्टर्ब करने का काम कराता था। इसकी पुष्टि बृजकिशोर गिरी और राजू व जुबैर के बीच मोबाइल पर हुई बातचीत से हुई है। इसकी रिकार्डिंग, राजू और जुबैर के फोटोग्राफ्स भी कानपुर पुलिस को मिल गए हैं।
एनआईए करेगी जांच
पुखरायां रेल हादसे के साथ ही रूरा में ट्रेन पलटने और मंधना में ट्रेन पलटाने की साजिश की जांच भी नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) करेगी। पुलिस अफसरों के मुताबिक जल्द ही बिठूर थाने, जीआरपी कानपुर, जीआरपी झांसी और आरपीएफ कन्नौज में दर्ज मामले एनआईए को सौंप दिए जाएंगे।
कानपुर में हुए थे ये हादसे
20 नवंबर- कानपुर देहात में कानपुर-झांसी रेलरूट पर पुखरायां स्टेशन के पास 20 नवंबर को तड़के तीन बजे के आसपास इंदौर-पटना एक्सप्रेस पलट गई थी। इसमें 152 लोगों की मौत हुई थी और 300 से अधिक लोग घायल हुए थे।
28 दिसंबर- कानपुर-हावड़ा रेलरूट के रूरा स्टेशन के पास 28 दिसंबर को सियालदह-अजमेर एक्सप्रेस पलट गई थी। इसमें 70 से अधिक लोग घायल हुए थे।
31 दिसंबर-31 दिसंबर की आधी रात के बाद कानपुर-फर्रूखाबाद रेल रूट के मंधना में ट्रेन पलटाने की साजिश की गई थी। यहां पटरी काट दी गई थी और 50 से अधिक पेंड्रॉल क्लिप निकाल दी गईं थीं। गनीमत रही कि उस समय गुजने वाली फर्रूखाबाद पैसेंजर काफी लेट थी और फिर ट्रैक पेट्रोलिंग के दौरान गैंगमैनों को इसका पता चल गया था। इसलिए कोई ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त नहीं हुई थी।
12 जनवरी-कानपुर-लखनऊ रेलमार्ग पर शुक्लागंज के पास मालगाड़ी पटरी से उतर गई थी। मालगाड़ी से 20 मिनट पहले ही इस रूट से टाटा-छपरा एक्सप्रेस गुजरी थी।
सिमी से जुड़े लोगों पर नजर
पुखरायां रेल हादसे में आईएसआई का नाम सामने आने के बाद पुलिस और खुफिया इकाइयों के अधिकारियों में खलबली मच गई है। अफसर स्लीपिंग माड्यूल्स और सिमी से जुड़े रहे लोगों की सुरागकशी में जुट गई है। पुखरायां समेत अन्य रेल हादसों के वक्त सिमी के पुराने लोगों की लोकेशन कहां थी, जैसी जानकारियां जुटाई जा रही हैं। पिछले सालों में पकड़े गए आईएसआई एजेंटों को संरक्षण देने वालों के बारे में भी छानबीन की जा रही है। पुलिस टीमें चकेरी, जाजमऊ, बाबूपुरवा, रेल बाजार, बिठूर, कोहना, कल्याणपुर जैसे मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में छानबीन कर रही हैं। पुलिस जेल में बंद आईएसआई एजेंटों से भी गुपचुप तरीके से बातचीत करने की कवायद में भी जुट गई है।
जेल से छूटे माओवादियों पर भी नजर
रेल हादसे में नक्सली और आईएसआई का कनेक्शन सामने आने के बाद पुलिस ने शहर में माओवादियों की गतिविधियों और संपर्कों के बारे में पड़ताल शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक नौबस्ता में आठ फरवरी 2010 को माओवादी कृपाशंकर, बंशीधर उर्फ चिंतक, दीपक राम, राजेंद्र दास, शिवराज सिंह, नवीन उर्फ अशोक, बच्चा प्रसाद और बलराज को पकड़ा गया था। इसके पास से माओवादियों से जुड़ीं साहित्यिक पुस्तकें भी मिली थीं। इसमें कृपाशंकर को छोड़कर सभी जमानत पर छूट चुके हैं। अब पुलिस जेल से रिहा माओवादियों के बारे में छानबीन कर रही है कि वह इस वक्त कहां हैं और क्या कर रहे हैं।
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मंगलवार को मोतिहारी (बिहार) पुलिस ने आईएसआई से जुड़े मोती पासवान, मुकेश यादव, उमाशंकर प्रसाद उर्फ उमाशंकर पटेल को पकड़ा था। पूछताछ में मोती ने कबूल किया कि पुखरायां रेल हादसे के पीछे आईएसआई का हाथ है। आईएसआई एजेंट बृजकिशोर गिरी के कहने पर मोती, आदापुर मोतिहारी निवासी जुबैर और राजू कानपुर गए थे और हादसे को अंजाम दिया।
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उधर, एटीएस के आईजी असीम अरुण, एटीएस कानपुर यूनिट के सीओ मनीष सोनकर, सीओ कल्याणपुर संजीव दीक्षित की टीम मोतिहारी पहुंचकर कस्टडी रिमांड पर लिए गए मोती पासवान, मुकेश यादव, उमाशंकर प्रसाद उर्फ उमाशंकर पटेल से पूछताछ कर रही है। इनसे यूपी पुलिस और एटीएस को महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, इनके आधार पर एटीएस और पुलिस ने काम शुरू कर दिया है। एंटी टेरेरिस्ट स्क्वायड (एटीएस) और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की टीमें शहर में कई लोगों पर नजर रखे हैं। कई को उठाया भी गया है, हालांकि पुलिस अफसर इस बारे में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
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मोतिहारी में चलता ट्रेनिंग कैंप
एटीएस और पुलिस अफसरों को पता चला है कि नेपाल में बैठकर आईएसआई एजेंट बृजकिशोर गिरी मोतिहारी में ट्रेनिंग कैंप भी चलाता था। वह बिहार के युवाओं को पैसों का लालच देकर आईएसआई से जोड़ता था। इसके बाद मोतिहारी में ही रेलवे के रिटायर्ड गैंगमैनों और की-मैनों के माध्यम से अपने गुर्गों को रेल पटरी उखाड़ने, पटरी में बम फिट करने की ट्रेनिंग दिलाता था। इसके बाद पैसा देकर इनसे ट्रेन उड़ाने और पटरी उखाड़ने, ट्रैक डिस्टर्ब करने का काम कराता था। इसकी पुष्टि बृजकिशोर गिरी और राजू व जुबैर के बीच मोबाइल पर हुई बातचीत से हुई है। इसकी रिकार्डिंग, राजू और जुबैर के फोटोग्राफ्स भी कानपुर पुलिस को मिल गए हैं।
एनआईए करेगी जांच
पुखरायां रेल हादसे के साथ ही रूरा में ट्रेन पलटने और मंधना में ट्रेन पलटाने की साजिश की जांच भी नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) करेगी। पुलिस अफसरों के मुताबिक जल्द ही बिठूर थाने, जीआरपी कानपुर, जीआरपी झांसी और आरपीएफ कन्नौज में दर्ज मामले एनआईए को सौंप दिए जाएंगे।
कानपुर में हुए थे ये हादसे
20 नवंबर- कानपुर देहात में कानपुर-झांसी रेलरूट पर पुखरायां स्टेशन के पास 20 नवंबर को तड़के तीन बजे के आसपास इंदौर-पटना एक्सप्रेस पलट गई थी। इसमें 152 लोगों की मौत हुई थी और 300 से अधिक लोग घायल हुए थे।
28 दिसंबर- कानपुर-हावड़ा रेलरूट के रूरा स्टेशन के पास 28 दिसंबर को सियालदह-अजमेर एक्सप्रेस पलट गई थी। इसमें 70 से अधिक लोग घायल हुए थे।
31 दिसंबर-31 दिसंबर की आधी रात के बाद कानपुर-फर्रूखाबाद रेल रूट के मंधना में ट्रेन पलटाने की साजिश की गई थी। यहां पटरी काट दी गई थी और 50 से अधिक पेंड्रॉल क्लिप निकाल दी गईं थीं। गनीमत रही कि उस समय गुजने वाली फर्रूखाबाद पैसेंजर काफी लेट थी और फिर ट्रैक पेट्रोलिंग के दौरान गैंगमैनों को इसका पता चल गया था। इसलिए कोई ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त नहीं हुई थी।
12 जनवरी-कानपुर-लखनऊ रेलमार्ग पर शुक्लागंज के पास मालगाड़ी पटरी से उतर गई थी। मालगाड़ी से 20 मिनट पहले ही इस रूट से टाटा-छपरा एक्सप्रेस गुजरी थी।
सिमी से जुड़े लोगों पर नजर
पुखरायां रेल हादसे में आईएसआई का नाम सामने आने के बाद पुलिस और खुफिया इकाइयों के अधिकारियों में खलबली मच गई है। अफसर स्लीपिंग माड्यूल्स और सिमी से जुड़े रहे लोगों की सुरागकशी में जुट गई है। पुखरायां समेत अन्य रेल हादसों के वक्त सिमी के पुराने लोगों की लोकेशन कहां थी, जैसी जानकारियां जुटाई जा रही हैं। पिछले सालों में पकड़े गए आईएसआई एजेंटों को संरक्षण देने वालों के बारे में भी छानबीन की जा रही है। पुलिस टीमें चकेरी, जाजमऊ, बाबूपुरवा, रेल बाजार, बिठूर, कोहना, कल्याणपुर जैसे मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में छानबीन कर रही हैं। पुलिस जेल में बंद आईएसआई एजेंटों से भी गुपचुप तरीके से बातचीत करने की कवायद में भी जुट गई है।
जेल से छूटे माओवादियों पर भी नजर
रेल हादसे में नक्सली और आईएसआई का कनेक्शन सामने आने के बाद पुलिस ने शहर में माओवादियों की गतिविधियों और संपर्कों के बारे में पड़ताल शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक नौबस्ता में आठ फरवरी 2010 को माओवादी कृपाशंकर, बंशीधर उर्फ चिंतक, दीपक राम, राजेंद्र दास, शिवराज सिंह, नवीन उर्फ अशोक, बच्चा प्रसाद और बलराज को पकड़ा गया था। इसके पास से माओवादियों से जुड़ीं साहित्यिक पुस्तकें भी मिली थीं। इसमें कृपाशंकर को छोड़कर सभी जमानत पर छूट चुके हैं। अब पुलिस जेल से रिहा माओवादियों के बारे में छानबीन कर रही है कि वह इस वक्त कहां हैं और क्या कर रहे हैं।