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भाजपा नेता की मौत हॉस्पिटल में तोड़फोड़
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sun, 04 Jan 2015 02:45 AM IST
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टाट मिल चौराहा स्थित कृष्णा सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में शनिवार सुबह भाजपा किसान मोर्चा के नगर सचिव विनोद त्रिपाठी की मौत पर नाराज परिजनों और रिश्तेदारों ने जमकर तोड़फोड़ की।
डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कर्मचारियों और पैरा मेडिकल स्टाफ को पीटा। कई थानों की पुलिस ने स्थिति संभाली।
रेलबाजार पुलिस ने हॉस्पिटल के डायरेक्टर राघवेंद्र गर्ग की तहरीर पर 20-25 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
एसओ शाहिद सिद्दीकी के मुताबिक हॉस्पिटल में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज से तोड़फोड़ करने वालों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा नेता विनोद त्रिपाठी (38) जाजमऊ केडीए कॉलोनी निवासी राधेश्याम त्रिपाठी के बेटे थे। साले सुशील शुक्ला ने बताया कि विनोद को फेफड़ों में इंफेक्शन हो गया था।
27 दिसंबर को अचानक विनोद की हालत बिगड़ गई थी। उन्हें कृष्णा सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने विनोद को वायरल निमोनिया से पीड़ित बताया था।
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सुशील के अनुसार शनिवार सुबह विनोद की तबियत बिगड़ गई। परिजनों ने डॉक्टर को बुलाने को कहा पर कर्मचारियों ने अनसुना कर दिया। काफी देर बाद एक अटेंडेंट विनोद को देखने पहुंचा।
कुछ दवा देकर लौट गया। इसके बाद विनोद की सांसें थम गईं। डॉक्टर के विनोद को मृत घोषित करने पर परिजन आपे से बाहर हो गए। जमकर हास्पिटल में तोड़फोड़ की।
परिजनों का आरोप है कि अगर डॉक्टर समय पर विनोद का इलाज करते तो शायद उनकी जान बच जाती। सुशील का कहना है कि इलाज में लगभग तीन लाख रुपये खर्च हुए हैं।
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डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कर्मचारियों और पैरा मेडिकल स्टाफ को पीटा। कई थानों की पुलिस ने स्थिति संभाली।
रेलबाजार पुलिस ने हॉस्पिटल के डायरेक्टर राघवेंद्र गर्ग की तहरीर पर 20-25 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
एसओ शाहिद सिद्दीकी के मुताबिक हॉस्पिटल में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज से तोड़फोड़ करने वालों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा नेता विनोद त्रिपाठी (38) जाजमऊ केडीए कॉलोनी निवासी राधेश्याम त्रिपाठी के बेटे थे। साले सुशील शुक्ला ने बताया कि विनोद को फेफड़ों में इंफेक्शन हो गया था।
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27 दिसंबर को अचानक विनोद की हालत बिगड़ गई थी। उन्हें कृष्णा सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने विनोद को वायरल निमोनिया से पीड़ित बताया था।
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सुशील के अनुसार शनिवार सुबह विनोद की तबियत बिगड़ गई। परिजनों ने डॉक्टर को बुलाने को कहा पर कर्मचारियों ने अनसुना कर दिया। काफी देर बाद एक अटेंडेंट विनोद को देखने पहुंचा।
कुछ दवा देकर लौट गया। इसके बाद विनोद की सांसें थम गईं। डॉक्टर के विनोद को मृत घोषित करने पर परिजन आपे से बाहर हो गए। जमकर हास्पिटल में तोड़फोड़ की।
परिजनों का आरोप है कि अगर डॉक्टर समय पर विनोद का इलाज करते तो शायद उनकी जान बच जाती। सुशील का कहना है कि इलाज में लगभग तीन लाख रुपये खर्च हुए हैं।