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क्या अब नहीं लौटेगा अनुभव!

Sun, 07 Dec 2014 02:43 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर Updated Sun, 07 Dec 2014 02:43 AM IST
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anubhav kinapping case
कल्याणपुर से तीन महीने पहले अगवा हुए डॉ. वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशन सेंटर के आठवीं के छात्र अनुभव सिंह के साथ कोई अनहोनी हो चुकी है क्या?
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क्राइम ब्रांच टीम ने शनिवार को मामले में संदिग्ध हेड कांस्टेबल के बेटे अमित उर्फ रिंकू को पकड़ा तो अनहोनी का आशंका गहरा गई।
अमित मदारपुर उन्नाव में अपने मामा के घर छिपकर रह रहा था। अब तक की जांच के बाद आईजी आशुतोष पांडेय ने भी अनुभव के साथ अनहोनी की आशंका जताई है।
आईजी का कहना है कि वारदात में अमित के साथ कल्याणपुर और फर्रुखाबाद के दो लोग शामिल रहे हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें रवाना हो गईं हैं।
इस मामले में अमित की कांस्टेबल पत्नी और हेड कांस्टेबल पिता पर भी कार्रवाई की जाएगी। कानपुर देहात में तैनात हेड कांस्टेबल को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है।
अनुभव आवास विकास-तीन निवासी कोचिंग संचालक अजय सिंह राणा का इकलौता बेटा है। वह नौ जुलाई को स्कूल से लौटने के बाद दोपहर में साइकिल लेकर घर से निकला था।
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इसके बाद से उसका कोई अता-पता नहीं है। अजय ने बेटे के अपहरण की आशंका जताते हुए कल्याणपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।
छानबीन के दौरान पुलिस को पनकी नहर के किनारे अनुभव की साइकिल और कपड़े मिले थे। पुलिस ने गोताखोरों की टीम को नहर में अनुभव की तलाश में उतारा पर उसका पता नहीं चला था।
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पुलिस को नहर वाले रास्ते में लगे एक सीसीटीवी कैमरे में अनुभव एक लड़के के साथ जाता दिखाई दिया था। कुछ दिनों बाद अनुभव के पिता अजय ने कानपुर देहात पुलिस लाइन में तैनात हेड कांस्टेबल बनवारी लाल के बेटे अमित उर्फ रिंकू पर बेटे के अपहरण की आशंका जताई थी।
अजय का कहना था कि अमित उनके परिवार की करीबी लड़की से छेड़खानी करता था। इसका विरोध करने अमित ने बेटे को अगवा किया।
अनुभव का पता न चलने पर करीब दो महीने पहले अजय के प्रार्थना पत्र पर आईजी ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी। सबइंस्पेक्टर संजय कुमार ने कई बार आरोपी को पूछताछ के लिए बुलाया।
उसके घर दबिश भी दी लेकिन वह न तो हाथ आया और न ही कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। इससे अमित पर संदेह और गहरा गया। कोर्ट ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया।
इसके बाद भी अमित हाजिर नहीं हुआ। इस पर एसआई ने कल्याणपुर थाने में 28 नवंबर को कांस्टेबल बनवारी के खिलाफ आरोपी बेटे को प्रश्रय देने (आईपीसी की धारा 216) की एफआईआर दर्ज कराई।
इसके बाद एसपी कानपुर देहात ने उसे सस्पेंड कर दिया था।
सूत्रों की मानें तो करीब 20 दिन पहले विवेचक सबइंस्पेक्टर को पता चला कि अमित उन्नाव में अपने मामा के घर में छिपा है। पुलिस टीम ने वहां दबिश दी पुलिस पर हमला बोल दिया गया।
पथराव और फायरिंग भी हुई थी। तब पुलिस टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा था। शनिवार शाम पुलिस और क्राइम ब्रांच टीम ने अमित के मामा के घर में दबिश देकर उसे दबोच लिया।
टीम देर रात तक अमित से पूछताछ में जुटी रही। सूत्रों का कहना है कि अमित देर रात तक पुलिस टीम से झूठ बोलता रहा। आखिर में टूट गया और सब सच बता दिया।
अमित की पत्नी भी कांस्टेबल है। उसने नवंबर के आखिरी हफ्ते में अमित के खिलाफ मारपीट और प्रताड़ित करने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस इसे अमित की पत्नी की पेशबंदी मान रही है।
ताकि अमित के खिलाफ कुछ हो तो उस पर आंच न आए।  आईजी भी इस तर्क से सहमत हैं। उनका मानना है कि महिला कांस्टेबल ने सोची समझी साजिश के तहत पति पर एफआईआर लिखाई है।

अमित को प्रश्रय देने वाले परिवार और रिश्तेदारों को बख्शा नहीं जाएगा। आईजी का कहना है कि अमित के साथ वारदात में शामिल दो अन्य लोगों के पकड़ने जाने के बाद पूरा मामला खुल जाएगा।
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