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कछुओं की सात किलो झिल्लियों के साथ दो तस्कर दबोचे गए
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इटावा। रेलवे स्टेशन के पास शनिवार रात एसटीएफ लखनऊ और वन विभाग की टीम ने सात किलो कछुओं की झिल्लियाें के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया है। ये झिल्लियां अलीगढ़ के रास्ते बुलंदशहर पहुंचाई जानी थीं, जहां से इसे पश्चिम बंगाल भेजा जाना था। तस्करों का कहना है कि उनका अवैध धंधा औरैया, कानपुर के क्षेत्रों में भी फैला है।
एसटीएफ लखनऊ और वन विभाग की टीम को शनिवार रात कछुओं की झिल्लियों की तस्करी की सूचना मिली। इस पर टीमों ने मुखबिर के साथ रेलवे स्टेशन के बाहर घेराबंदी कर दी। मुखबिर के इशारे पर पुलिस स्वचालित ट्राई साइकिल पर बैठे इटावा निवासी देवेंद्र उर्फ सीटू और उसके साथ मौजूद पश्चिम बंगाल के चौबीस परगना निवासी कार्तिक घोष को दबोच लिया।
सीटू के बैग की तलाशी में ढाई किलो और कार्तिक के बैग से साढे़ चार किलो कछुओं की झिल्लियां बरामद हुईं हैं। पूछताछ के दौरान दोनों तस्करों ने बताया कि उन्हें इन झिल्लियों को अलीगढ़ होते हुए बुलंदशहर के सयाना कस्बे में राजू सिंह के यहां पहुंचाना था, जहां से इन्हें पश्चिम बंगाल भेजा जाना था। सीटू ने बताया कि वह यहां की नदियों से कछुओं को पकड़ता है और कार्तिक घोष को बेच देता है।
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एसटीएफ के शिवेंद्र सिंह ने बताया कि पूछताछ में तस्करों ने कबूला है कि उनका अवैध धंधा इटावा के अलावा कानपुर और औरैया के क्षेत्रों में फैला है। तस्कर यहां से भी कछुओं को खरीदकर पश्चिम बंगाल भेजते हैं।
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एसटीएफ लखनऊ और वन विभाग की टीम को शनिवार रात कछुओं की झिल्लियों की तस्करी की सूचना मिली। इस पर टीमों ने मुखबिर के साथ रेलवे स्टेशन के बाहर घेराबंदी कर दी। मुखबिर के इशारे पर पुलिस स्वचालित ट्राई साइकिल पर बैठे इटावा निवासी देवेंद्र उर्फ सीटू और उसके साथ मौजूद पश्चिम बंगाल के चौबीस परगना निवासी कार्तिक घोष को दबोच लिया।
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सीटू के बैग की तलाशी में ढाई किलो और कार्तिक के बैग से साढे़ चार किलो कछुओं की झिल्लियां बरामद हुईं हैं। पूछताछ के दौरान दोनों तस्करों ने बताया कि उन्हें इन झिल्लियों को अलीगढ़ होते हुए बुलंदशहर के सयाना कस्बे में राजू सिंह के यहां पहुंचाना था, जहां से इन्हें पश्चिम बंगाल भेजा जाना था। सीटू ने बताया कि वह यहां की नदियों से कछुओं को पकड़ता है और कार्तिक घोष को बेच देता है।
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एसटीएफ के शिवेंद्र सिंह ने बताया कि पूछताछ में तस्करों ने कबूला है कि उनका अवैध धंधा इटावा के अलावा कानपुर और औरैया के क्षेत्रों में फैला है। तस्कर यहां से भी कछुओं को खरीदकर पश्चिम बंगाल भेजते हैं।