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विकास दुबे के पकड़े जाने के बाद गांवों में खुलीं दुकानें
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- फोटो : DEHAT
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बिल्हौर (कानपुर)। चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में दो जुलाई की रात कुख्यात विकास दुबे द्वारा सीओ बिल्हौर समेत आठ पुलिस कर्मियों को गोलियों से मौत के घाट उतार दिए जाने के बाद गांव के मोहल्ले तक खाली हो गए थे। गुरुवार की सुबह जैसे ही विकास दुबे के उज्जैन में पकड़े जाने की सूचना मिली ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। इसके बाद सात दिनों से बंद बिकरू और भीटी गांवों में बंद पड़ी दुकानें खुलीं।
पुलिस सख्ती व कुख्यात विकास दुबे की दहशत से बिकरू, भीटी, कंजती, पूरा बुजुर्ग, बोझा गांवों के पुरूष सदस्य अपने-अपने घरों से भाग गए थे। घरों में सिर्फ महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग ही बचे थे। विकास के उज्जैन में पकड़े जाने की सूचना मिलने के बाद इन गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली, और गांव में दुकानें खुली। लोगों की चहलकदमी कुछ दिखाई दी, वहीं बच्चों ने सावन में झूला का भी लुत्फ उठाया।
उधर, विकास दुबे की कोठी, पंचायत भवन समेत घटनास्थल व उसके आसपास घरों-गली में सिर्फ पुलिस और मीडिया कर्मियों की आवक नजर आती है। गुरुवार को बउआ और प्रभात के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद उनके परिजनों की रोने की आवाजें घटनास्थल के पास सुनाई देती रहीं।
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पुलिस सख्ती व कुख्यात विकास दुबे की दहशत से बिकरू, भीटी, कंजती, पूरा बुजुर्ग, बोझा गांवों के पुरूष सदस्य अपने-अपने घरों से भाग गए थे। घरों में सिर्फ महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग ही बचे थे। विकास के उज्जैन में पकड़े जाने की सूचना मिलने के बाद इन गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली, और गांव में दुकानें खुली। लोगों की चहलकदमी कुछ दिखाई दी, वहीं बच्चों ने सावन में झूला का भी लुत्फ उठाया।
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उधर, विकास दुबे की कोठी, पंचायत भवन समेत घटनास्थल व उसके आसपास घरों-गली में सिर्फ पुलिस और मीडिया कर्मियों की आवक नजर आती है। गुरुवार को बउआ और प्रभात के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद उनके परिजनों की रोने की आवाजें घटनास्थल के पास सुनाई देती रहीं।
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