{"_id":"60c43b518ebc3ef43952574a","slug":"coronavirus-news-problem-of-diabetes-increased-in-patients","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मुसीबत: कोरोना को तो हराया पर डायबिटीज ने छकाया, अस्पताल में इलाज कराने वाले 80 फीसदी कोरोना विजेताओं को दिक्कत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुसीबत: कोरोना को तो हराया पर डायबिटीज ने छकाया, अस्पताल में इलाज कराने वाले 80 फीसदी कोरोना विजेताओं को दिक्कत
Sat, 12 Jun 2021 10:16 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 12 Jun 2021 10:16 AM IST
सार
खासतौर पर अस्पताल में भर्ती होकर ठीक होने वाले 80 फीसदी रोगी हाई ब्लड शुगर की परेशानी झेल रहे हैं। कुछ का तो टैबलेट से काम चल जा रहा है, लेकिन ज्यादातर को इंसुलिन लेनी पड़ रही है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कोरोना से ठीक होने के बाद रोगियों को डायबिटीज हो रही है। जिन लोगों को संक्रमण से पहले कभी हाई ब्लड शुगर नहीं रही। अब हालात यह हैं कि बिना इंसुलिन उनका काम नहीं चल पा रहा है। इनमें बड़ी उम्र के लोग तो हैं ही, 25 और 30 साल के युवा भी डायबिटिक हो गए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संक्रमण ने पैंक्रियाज की बीटा सेल नष्ट कर दी है। इससे ब्लड शुगर बढ़ गई है। साथ ही स्टेरॉयड लेने और संक्रमण के कारण बढ़े हारमोंस ने भी ब्लड शुगर बढ़ाई है। पोस्ट कोविड रोगियों का इलाज कर रहे विशेषज्ञों के यहां सैंपल सर्वे में यह बात सामने आई है। खासतौर पर अस्पताल में भर्ती होकर ठीक होने वाले 80 फीसदी रोगी हाई ब्लड शुगर की परेशानी झेल रहे हैं। कुछ का तो टैबलेट से काम चल जा रहा है, लेकिन ज्यादातर को इंसुलिन लेनी पड़ रही है।
केस : 01
पनकी के रहने वाले 25 साल के एक फार्मासिस्ट को कोरोना संक्रमण के बाद हैलट में भर्ती किया गया। उनकी तबीयत ठीक हो गई, लेकिन ब्लड शुगर लेवल बहुत हाई हो गया। बाद में जांच कराई और विशेषज्ञ के यहां दवा ली। इसके बाद भी शुगर कंट्रोल नहीं हुई। अब उन्हें बराबर इंसुलिन लेनी पड़ रही है। संक्रमण से उनके पैंक्रियाज की बीटा सेल डैमेज हो गई है।
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केस : दो
स्वरूपनगर के रहनेे वाले 45 साल के व्यक्ति का कोरोना संक्रमण के बाद लगातार ब्लड शुगर लेवल हाई बना हुआ है। रोगी का इलाज एक निजी कोविड अस्पताल में हुआ था। इलाज के दौरान उन्हें हाई लेवल स्टेरॉयड दिया गया। इसके पहले उन्हें हाई ब्लड शुगर नहीं थी। अब उन्हें डायबेेटोलॉजिस्ट ने इंसुलिन पर रखा है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संक्रमण ने पैंक्रियाज की बीटा सेल नष्ट कर दी है। इससे ब्लड शुगर बढ़ गई है। साथ ही स्टेरॉयड लेने और संक्रमण के कारण बढ़े हारमोंस ने भी ब्लड शुगर बढ़ाई है। पोस्ट कोविड रोगियों का इलाज कर रहे विशेषज्ञों के यहां सैंपल सर्वे में यह बात सामने आई है। खासतौर पर अस्पताल में भर्ती होकर ठीक होने वाले 80 फीसदी रोगी हाई ब्लड शुगर की परेशानी झेल रहे हैं। कुछ का तो टैबलेट से काम चल जा रहा है, लेकिन ज्यादातर को इंसुलिन लेनी पड़ रही है।
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केस : 01
पनकी के रहने वाले 25 साल के एक फार्मासिस्ट को कोरोना संक्रमण के बाद हैलट में भर्ती किया गया। उनकी तबीयत ठीक हो गई, लेकिन ब्लड शुगर लेवल बहुत हाई हो गया। बाद में जांच कराई और विशेषज्ञ के यहां दवा ली। इसके बाद भी शुगर कंट्रोल नहीं हुई। अब उन्हें बराबर इंसुलिन लेनी पड़ रही है। संक्रमण से उनके पैंक्रियाज की बीटा सेल डैमेज हो गई है।
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केस : दो
स्वरूपनगर के रहनेे वाले 45 साल के व्यक्ति का कोरोना संक्रमण के बाद लगातार ब्लड शुगर लेवल हाई बना हुआ है। रोगी का इलाज एक निजी कोविड अस्पताल में हुआ था। इलाज के दौरान उन्हें हाई लेवल स्टेरॉयड दिया गया। इसके पहले उन्हें हाई ब्लड शुगर नहीं थी। अब उन्हें डायबेेटोलॉजिस्ट ने इंसुलिन पर रखा है।
ब्लड शुगर बढ़ने के चार मुख्य कारण
- कोरोना संक्रमण से एडरीनलीन, नॉर एडरीनलीन आदि केमिकल का रिसाव बढ़ गया। इससे ब्लड शुगर बढ़ी और प्रीडायबिटिक स्थिति के लोग डायबिटिक में आ गए।
- कोरोना वायरस के संक्रमण ने पैंक्रियाज की बीटा कोशिकाओं को नष्ट कर दिया। इन्हीं कोशिकाओं में इंसुलिन बनती है। बीटा कोशिकाएं नष्ट होने से डायबिटीज हो गई।
- स्टेरॉयड के अंधाधुंध इस्तेमाल से ब्लड शुगर बढ़ हो जाती है। स्टेरॉयड बंद होने के बाद भी बहुतों में दिक्कत बनी रहती है।
- बहुत से लोगों को हल्की हाई ब्लड शुगर रहती है, पता नहीं रहता है। संक्रमण के बाद लेवल अधिक हो जाता है, जो जांच से पता चलता है।
- कोरोना संक्रमण से एडरीनलीन, नॉर एडरीनलीन आदि केमिकल का रिसाव बढ़ गया। इससे ब्लड शुगर बढ़ी और प्रीडायबिटिक स्थिति के लोग डायबिटिक में आ गए।
- कोरोना वायरस के संक्रमण ने पैंक्रियाज की बीटा कोशिकाओं को नष्ट कर दिया। इन्हीं कोशिकाओं में इंसुलिन बनती है। बीटा कोशिकाएं नष्ट होने से डायबिटीज हो गई।
- स्टेरॉयड के अंधाधुंध इस्तेमाल से ब्लड शुगर बढ़ हो जाती है। स्टेरॉयड बंद होने के बाद भी बहुतों में दिक्कत बनी रहती है।
- बहुत से लोगों को हल्की हाई ब्लड शुगर रहती है, पता नहीं रहता है। संक्रमण के बाद लेवल अधिक हो जाता है, जो जांच से पता चलता है।
कोरोना के इलाज के बाद बहुत से लोग डायबिटीज की चपेट में आ रहे हैं। इनमें 30-35 साल के युवा भी हैं। स्टेरॉयड लेने से भी ब्लड शुगर बढ़ती है और कुछ की संक्रमण के कारण बीटा सेल डैमेज हो गई हैं। पोस्ट कोविड डायबिटीज के रोगियों की संख्या बढ़ रही है।- डॉ. ब्रजमोहन, पूर्व अध्यक्ष कानपुर डायबिटीज एसोसिएशन