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कोरोना ने फिर थाम दी न्यायिक काम की रफ्तार, जिला जज व सीएमएम कोर्ट कर रही वर्चुअल सुनवाई
Sat, 10 Apr 2021 09:21 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 10 Apr 2021 09:21 AM IST
सार
- वीडियो कांफ्रेंसिंग से हो रही बंदियों की पेशी व रिमांड
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कोरोना संक्रमण के चलते अदालती कामकाज एक बार फिर प्रभावित हो गया है। हाईकोर्ट के निर्देश पर जहां जिला जज और सीएमएम की अदालतों में वर्चुअल सुनवाई शुरू हो गई है वहीं अन्य अदालतों में भी बंदियों की पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही हो रही है। गुरुवार को भी पॉक्सो कोर्ट ने छेड़छाड़ के अभियुक्त को वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही सजा सुनाई थी।
पिछले साल मार्च में लगे लॉकडाउन के बाद लगभग छह माह तक अदालती कामकाज ठप रहा था। अधिवक्ताओं की मांग पर पहली बार न्यायालय भवन से बाहर राजकीय इंटर कॉलेज में वर्चुअल कोर्ट की व्यवस्था की गई थी जहां कानपुर में पहली बार तत्कालीन जिला जज अशोक कुमार सिंह ने दहेज हत्या के एक मुकदमे में जेल में बंद पति को वीडियो कॉल और जमानत पर बाहर ससुर को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सजा भी सुनाई थी।
इसके बाद न्यायालय भवन में भी लगभग दो माह तक वर्चुअल कामकाज ही होता रहा। संक्रमण का खतरा धीरे-धीरे कम होने और हाईकोर्ट के निर्देश पर जनवरी से कामकाज सामान्य हुआ था लेकिन दोबारा संक्रमण ने एक बार फिर कामकाज पर रोक लगा दी है।
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अदालतों में गवाही बंद हो गई हैं। बंदियों की पेशी और रिमांड का काम भी वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही हो रहा है। सिर्फ जरूरी मामलों की सुनवाई पर ही जोर दिया जा रहा है। वहीं हाईकोर्ट द्वारा कुछ न्यायिक अधिकारियों के स्थानांतरण से भी कामकाज प्रभावित हो रहा है।
नए अधिकारियों को 12 अप्रैल तक कार्यभार संभालना है। हालांकि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा किए गए स्थानांतरण के बाद नए आदेश के तहत अधिकारियों को 31 मई तक नया कार्यभार ग्रहण करने की छूट दी गई है। इससे शहर के अधिकारियों में भी उम्मीद जगी है।
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पिछले साल मार्च में लगे लॉकडाउन के बाद लगभग छह माह तक अदालती कामकाज ठप रहा था। अधिवक्ताओं की मांग पर पहली बार न्यायालय भवन से बाहर राजकीय इंटर कॉलेज में वर्चुअल कोर्ट की व्यवस्था की गई थी जहां कानपुर में पहली बार तत्कालीन जिला जज अशोक कुमार सिंह ने दहेज हत्या के एक मुकदमे में जेल में बंद पति को वीडियो कॉल और जमानत पर बाहर ससुर को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सजा भी सुनाई थी।
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इसके बाद न्यायालय भवन में भी लगभग दो माह तक वर्चुअल कामकाज ही होता रहा। संक्रमण का खतरा धीरे-धीरे कम होने और हाईकोर्ट के निर्देश पर जनवरी से कामकाज सामान्य हुआ था लेकिन दोबारा संक्रमण ने एक बार फिर कामकाज पर रोक लगा दी है।
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अदालतों में गवाही बंद हो गई हैं। बंदियों की पेशी और रिमांड का काम भी वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही हो रहा है। सिर्फ जरूरी मामलों की सुनवाई पर ही जोर दिया जा रहा है। वहीं हाईकोर्ट द्वारा कुछ न्यायिक अधिकारियों के स्थानांतरण से भी कामकाज प्रभावित हो रहा है।
नए अधिकारियों को 12 अप्रैल तक कार्यभार संभालना है। हालांकि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा किए गए स्थानांतरण के बाद नए आदेश के तहत अधिकारियों को 31 मई तक नया कार्यभार ग्रहण करने की छूट दी गई है। इससे शहर के अधिकारियों में भी उम्मीद जगी है।