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कोरोना संक्रमित को हैलट अस्पताल ने भर्ती करने से किया इनकार, इलाज मिलने में देरी से चली गई जान
Sat, 25 Jul 2020 04:42 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 25 Jul 2020 04:42 PM IST
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हैलट अस्पताल
- फोटो : amar ujala
कानपुर में प्रदेश सरकार भले ही रोज कोविड मरीजों की जान बचाने के लिए नए-नए निर्देश दे रही हो लेकिन अस्पतालों का हाल खराब होता जा रहा है। एक दिन पहले कोरोना पॉजिटिव को जहां पहले निजी अस्पताल ने बिना ऑक्सीजन सिलिंडर के रेफर कर दिया वहीं हैलट में उसे भर्ती करने से मना कर दिया गया।
किसी तरह सिफारिश लगाने के बाद कांशीराम अस्पताल में संक्रमित को भर्ती किया गया। जहां शुक्रवार सुबह उसकी मौत हो गई। सीओडी मजदूर पंचायत और ओईएफ कर्मचारी यूनियन के एक पदाधिकारी को कुछ दिनों पहले टायफाइड हुआ था। इलाज घर पर चल रहा था।
20 जुलाई को डॉक्टर के कहने पर निजी पैथोलॉजी से कोविड जांच कराई तो वह पॉजिटिव निकले। परिजनों ने स्वरूप नगर स्थित निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। बेटे के मुताबिक गुरुवार रात 11 बजे अस्पताल की ओर से फोन आया और पिता को ले जाने के लिए कह दिया।
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इस दौरान इन लोगों ने न तो ऑक्सीजन की व्यवस्था की और न ही एंबुलेंस दी। किसी तरह पिता को लेकर हैलट पहुंचे तो वहां बेड न होने की बात कहकर भर्ती करने से मना कर दिया गया। फिर सर्वोदय नगर स्थित एक निजी अस्पताल ले गए। वहां भी भर्ती नहीं किया गया।
कांशीराम अस्पताल में कई लोगों के फोन कराने के बाद सुबह चार बजे भर्ती किया गया। सुबह 6 बजे वहां से फोन आया कि पिता की मौत हो गई है। बेटे का आरोप है कि हैलट में यदि उनके पिता को भर्ती कर लिया जाता तो जान बच सकती थी।
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किसी तरह सिफारिश लगाने के बाद कांशीराम अस्पताल में संक्रमित को भर्ती किया गया। जहां शुक्रवार सुबह उसकी मौत हो गई। सीओडी मजदूर पंचायत और ओईएफ कर्मचारी यूनियन के एक पदाधिकारी को कुछ दिनों पहले टायफाइड हुआ था। इलाज घर पर चल रहा था।
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20 जुलाई को डॉक्टर के कहने पर निजी पैथोलॉजी से कोविड जांच कराई तो वह पॉजिटिव निकले। परिजनों ने स्वरूप नगर स्थित निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। बेटे के मुताबिक गुरुवार रात 11 बजे अस्पताल की ओर से फोन आया और पिता को ले जाने के लिए कह दिया।
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इस दौरान इन लोगों ने न तो ऑक्सीजन की व्यवस्था की और न ही एंबुलेंस दी। किसी तरह पिता को लेकर हैलट पहुंचे तो वहां बेड न होने की बात कहकर भर्ती करने से मना कर दिया गया। फिर सर्वोदय नगर स्थित एक निजी अस्पताल ले गए। वहां भी भर्ती नहीं किया गया।
कांशीराम अस्पताल में कई लोगों के फोन कराने के बाद सुबह चार बजे भर्ती किया गया। सुबह 6 बजे वहां से फोन आया कि पिता की मौत हो गई है। बेटे का आरोप है कि हैलट में यदि उनके पिता को भर्ती कर लिया जाता तो जान बच सकती थी।