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कोविड अस्पताल पहुंच एंबुलेंस में पड़ी-पड़ी मर गई महिला रोगी
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कानपुर। हैलट के कोविड अस्पताल में रोगी एक घंटे तक एंबुलेंस में पड़ी रही और उसकी मौत हो गई लेकिन उसे उतारने के लिए कोई नहीं आया। बर्रा की रहने वाली 55 साल की रोगी को पहले हैलट इमरजेंसी में भर्ती किया गया। यहां उसकी जांच की गई तो कोविड पॉजीटिव आई। इस पर इमरजेंसी के बाहर खड़ी एंबुलेंस से कोविड अस्पताल भेजा गया। वहां रोगी अस्पताल में भर्ती नहीं हो पाई और मौत हो गई। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया है।
रोगी पहले एक नर्सिंगहोम में भर्ती रही। उसे सांस की दिक्कत हो गई तो आक्सीजन लगाकर कार्डियोलॉजी भेज दिया गया। कार्डियोलॉजी से उसे हैलट इमरजेंसी रेफर कर दिया गया। यहां उसे भर्ती कर लिया गया। एंटीजन रैपिड कार्ड से वह कोरोना पॉजीटिव निकली तो उसे न्यूरो साइंस स्थित कोविड अस्पताल भेज दिया गया। रोगी को एंबुलेंस से भेजा गया लेकिन वहां कोई उतारने नहीं आया और उसकी मौत हो गई।
डाक्टरों का कहना है कि रोगी को भेजने के पहले कोविड अस्पताल में बेड खाली होने के संबंध में पूछ लिया गया था। रोगी का आक्सीजन सेच्युरेशन लेवल 52 फीसदी था। आक्सीजन लगाने के बाद 54 फीसदी तक गया जो गंभीर हालत की निशानी है। हैलट की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रिचा गिरि का कहना है कि इस मामले में जांच कराएंगे। जब जानकारी थी तो रोगी को उतारने में क्यों देरी की गई? इसकी जांच होगी।
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राजधानी के ड्राइवर को टरकाते रहे अस्पताल, मौत : राजधानी एक्सप्रेस के 52 साल के ड्राइवर की शनिवार देर रात कोरोना संक्रमण के चलते हैलट में मौत हो गई। निजी पैथोलॉजी में कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद वह अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती होने के लिए भटकते रहे थे। वह लोको अस्पताल भी गए थे जहां उन्हें कोविड अस्पताल जाने की सलाह दी गई। हैलट-उर्सला से वापस भेजने के बाद आखिरकार सिफारिश से उन्हें हैलट कोविड वार्ड में शनिवार सुबह भर्ती कराया गया और देर रात 12:30 बजे उनकी मौत हो गई। ड्राइवर की तबीयत 18 जुलाई को खराब हुई थी।
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रोगी पहले एक नर्सिंगहोम में भर्ती रही। उसे सांस की दिक्कत हो गई तो आक्सीजन लगाकर कार्डियोलॉजी भेज दिया गया। कार्डियोलॉजी से उसे हैलट इमरजेंसी रेफर कर दिया गया। यहां उसे भर्ती कर लिया गया। एंटीजन रैपिड कार्ड से वह कोरोना पॉजीटिव निकली तो उसे न्यूरो साइंस स्थित कोविड अस्पताल भेज दिया गया। रोगी को एंबुलेंस से भेजा गया लेकिन वहां कोई उतारने नहीं आया और उसकी मौत हो गई।
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डाक्टरों का कहना है कि रोगी को भेजने के पहले कोविड अस्पताल में बेड खाली होने के संबंध में पूछ लिया गया था। रोगी का आक्सीजन सेच्युरेशन लेवल 52 फीसदी था। आक्सीजन लगाने के बाद 54 फीसदी तक गया जो गंभीर हालत की निशानी है। हैलट की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रिचा गिरि का कहना है कि इस मामले में जांच कराएंगे। जब जानकारी थी तो रोगी को उतारने में क्यों देरी की गई? इसकी जांच होगी।
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राजधानी के ड्राइवर को टरकाते रहे अस्पताल, मौत : राजधानी एक्सप्रेस के 52 साल के ड्राइवर की शनिवार देर रात कोरोना संक्रमण के चलते हैलट में मौत हो गई। निजी पैथोलॉजी में कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद वह अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती होने के लिए भटकते रहे थे। वह लोको अस्पताल भी गए थे जहां उन्हें कोविड अस्पताल जाने की सलाह दी गई। हैलट-उर्सला से वापस भेजने के बाद आखिरकार सिफारिश से उन्हें हैलट कोविड वार्ड में शनिवार सुबह भर्ती कराया गया और देर रात 12:30 बजे उनकी मौत हो गई। ड्राइवर की तबीयत 18 जुलाई को खराब हुई थी।