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Corona in Kanpur: तीसरी लहर में भी नॉन कोविड रोगियों के इलाज का अधूरा इंतजाम
Sat, 08 Jan 2022 08:26 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 08 Jan 2022 08:26 PM IST
सार
उर्सला के आईसीयू को शासन की मान्यता न होने के कारण इसे प्रशिक्षित स्टाफ नहीं मिल रहा है। साथ ही आईसीयू के संसाधन भी नहीं मिलते। इसे जुगाड़ से चलाया जा रहा है। इसी तरह सीटी स्कैन मशीन का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक नहीं लग पाई।
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हैलट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। दूसरी लहर में कोविड स्टेटस पाने वाले नर्सिंगहोमों को अलर्ट कर दिया गया है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने नए नर्सिंगहोमों को भी तैयारी रखने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, नॉन कोविड मरीजों के इलाज की व्यवस्था नहीं की गई है।
हैलट के कोविड अस्पतालों में संक्रमित भर्ती होने के बाद नॉन कोविड मरीजों के इलाज की व्यवस्था घटा दी जाएगी पर नॉन कोविड उर्सला और केपीएम अस्पताल को तैयार नहीं किया गया है। कोविड की पहली और दूसरी लहर में सबसे अधिक तकलीफ नॉन कोविड रोगियों को भुगतनी पड़ी।
क्रोनिक रोगी इलाज के लिए परेशान रहे। साथ ही नए नॉन कोविड रोगियों को भी कहीं भर्ती नहीं किया गया। ओपीडी स्तर पर ही दवाएं देकर घर भेज दिया गया। अब कोरोना की तीसरी लहर में भी नॉन कोविड की स्थिति दूसरी लहर जैसी ही है।
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उर्सला के पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) में दो वेंटिलेटर तो लगे हैं, लेकिन एनेस्थेटिस्ट की कमी से इसे चालू नहीं किया जा सका। इससे जिन बच्चों को वेंटिलेटर की जरूरत होती है, उन्हें हैलट रेफर किया जाता है। हैलट में बेड फुल होने के कारण परिजन मरीजों को लेकर निजी अस्पताल में भटकते हैं।
आईसीयू को अब तक मान्यता नहीं
उर्सला के आईसीयू को शासन की मान्यता न होने के कारण इसे प्रशिक्षित स्टाफ नहीं मिल रहा है। साथ ही आईसीयू के संसाधन भी नहीं मिलते। इसे जुगाड़ से चलाया जा रहा है। इसी तरह सीटी स्कैन मशीन का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक नहीं लग पाई। इससे मरीजों जांच कराने के लिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों पर जाना पड़ रहा है। उर्सला के सीएमएस डॉ. अनिल निगम का कहना है कि प्रस्ताव भेजे गए। उसके बाद रिमाइंडर भी भेजे जा रहे हैं, लेकिन मंजूरी अब तक नहीं मिली।
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हैलट के कोविड अस्पतालों में संक्रमित भर्ती होने के बाद नॉन कोविड मरीजों के इलाज की व्यवस्था घटा दी जाएगी पर नॉन कोविड उर्सला और केपीएम अस्पताल को तैयार नहीं किया गया है। कोविड की पहली और दूसरी लहर में सबसे अधिक तकलीफ नॉन कोविड रोगियों को भुगतनी पड़ी।
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क्रोनिक रोगी इलाज के लिए परेशान रहे। साथ ही नए नॉन कोविड रोगियों को भी कहीं भर्ती नहीं किया गया। ओपीडी स्तर पर ही दवाएं देकर घर भेज दिया गया। अब कोरोना की तीसरी लहर में भी नॉन कोविड की स्थिति दूसरी लहर जैसी ही है।
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उर्सला के पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) में दो वेंटिलेटर तो लगे हैं, लेकिन एनेस्थेटिस्ट की कमी से इसे चालू नहीं किया जा सका। इससे जिन बच्चों को वेंटिलेटर की जरूरत होती है, उन्हें हैलट रेफर किया जाता है। हैलट में बेड फुल होने के कारण परिजन मरीजों को लेकर निजी अस्पताल में भटकते हैं।
आईसीयू को अब तक मान्यता नहीं
उर्सला के आईसीयू को शासन की मान्यता न होने के कारण इसे प्रशिक्षित स्टाफ नहीं मिल रहा है। साथ ही आईसीयू के संसाधन भी नहीं मिलते। इसे जुगाड़ से चलाया जा रहा है। इसी तरह सीटी स्कैन मशीन का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक नहीं लग पाई। इससे मरीजों जांच कराने के लिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों पर जाना पड़ रहा है। उर्सला के सीएमएस डॉ. अनिल निगम का कहना है कि प्रस्ताव भेजे गए। उसके बाद रिमाइंडर भी भेजे जा रहे हैं, लेकिन मंजूरी अब तक नहीं मिली।