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Kanpur News: एल्युमीनियम के बर्तनों में एमडीएम नहीं पक रहीं बीमारियां

Thu, 02 Oct 2025 02:12 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 02 Oct 2025 02:12 AM IST
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Cooking MDM in aluminum utensils does not cause diseases
कानपुर। एल्युमीनियम के बर्तनों में खाना पकाने से लीचिंग (धातु के भोजन में घुलने) का खतरा होता है। इससे बच्चों की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसे देखते हुए मार्च 2024 में मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण की निदेशक कंचन वर्मा ने यूपी के सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर स्टील के बर्तनों में खाना बनाने और बच्चों को खिलाने के निर्देश दिए थे। स्टील के बर्तन खरीदने के लिए बजट भी जारी किया गया था। इसके बावजूद इस पर अमल नहीं हुआ। संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में मंगलवार को शहर के कई परिषदीय विद्यालयों में एमडीएम एल्युमिनियम के बड़े भगोनों में ही पकता मिला। यहां मिले शिक्षकों का कहना था कि स्टील के मुकाबले एल्युमिनियम के भगोने बड़े और हल्के होते हैं इसलिए खाना जल्दी पक जाता है। (संवाद)
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केस एक पतारा
प्राथमिक विद्यालय पतारा : दो भगोनों में बनता 122 बच्चों का भोजन

प्राथमिक विद्यालय पतारा प्रथम में 122 बच्चों का एमडीएम बनता है। मंगलवार को यहां एमडीएम एल्युमिनियम के दो बड़े भगोनों में पक रहा था। पूछने पर इंचार्ज प्रधानाध्यापिका माला गुप्ता ने बताया कि आठ माह पहले बीएसए के आदेश पर 20 हजार के नए बर्तन खरीदे गए थे, जिनमें एल्युमिनियम के कुकर, भगोने आदि शामिल हैं। यह बर्तन आकार में बड़े होने के कारण खाना जल्दी पक जाता है। इन बर्तनों की फोटो भी बीएसए को भेजी गई थी।
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केस 2 घाटमपुर
कंपोजिट विद्यालय भदरस : 417 बच्चों के स्वास्थ्य का नहीं ध्यान

कंपोजिट विद्यालय भदरस में कुल 417 बच्चों के लिए मिड-डे मील बनता है। रसोई छोटी होने की वजह से भोजन हॉल में तैयार किया जाता है। यहां एल्युमिनियम के चार बड़े भगोने हैं। भोजन अभी भी इन्हीं में बनाया जाता है। प्रधानाध्यापक मो. शकील ने बताया कि उन्होंने जुलाई में विद्यालय जॉइन किया था तब यही बर्तन थे। अब इतनी जल्दी स्टील के बर्तन लेंगे तो पुराने का क्या करेंगे।
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केस 3 ककवन
पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय औरोंताहरपुर : यहां अभी भी एल्युमिनियम के भगोने

औरोंताहरपुर स्थित पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय का हाल भी कुछ अलग नहीं है। स्कूल में पढ़ने वाले 289 बच्चों का भोजन एल्युमिनियम के बर्तनों में पकाया जाता है। मंगलवार को यहां रसोइया एल्युमिनियम के बड़े भगोने में सब्जी बनातीं नजर आईं। शिक्षकों और प्रधानाचार्य का कहना है कि स्टील के इतने बड़े बर्तन नहीं होने से एल्युमिनियम के बर्तन का ही इस्तेमाल किया जाता है।

वर्जन
मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण से आदेश जारी होने के 15 दिन बाद ही हमने सभी खंड शिक्षा अधिकारी एवं विद्यालयों के लिए पत्र जारी किया था। इसमें स्टील के बर्तनों में मध्यान्ह भोजन पकाने के लिए कहा गया था। यदि स्कूलों में इसका पालन नहीं हो रहा है तो जांच कर विभागीय कार्रवाई करेंगे।--सुरजीत कुमार सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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कुछ वर्ष पहले आदर्श किचन बनाने का आदेश आया था। इसके तहत शहर के 1518 स्कूलों के लिए बच्चों के नामांकन के अनुसार बजट मिला था। इसमें पचास बच्चों तक 10 हजार, सौ बच्चों तक 15 हजार और तीन सौ बच्चों तक 20 हजार रुपये स्कूलों को आवंटित किए गए थे। हर पांच वर्ष में बर्तन खरीदने के लिए यह राशि स्कूलों को दी जाती है। --- सौरभ पांडेय, जिला समन्वयक, मध्यान्ह भोजन


एल्युमिनियम के बर्तन में खाना बनाने के नुकसान
बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार एल्युमिनियम के बर्तनों में खाना पकाने और खाने से कई हानियां हैं। भोजन के साथ एल्युमिनियम पेट में जाता है तो यह आयरन और कैल्शियम सोखना शुरू कर देता है, जिससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त अस्थि रोग, आंखों की बीमारियां, अतिसार, अतिअम्लता, खट्टी डकार, पेट दर्द, कोलाइटिस तथा मुंह में बार-बार सूजन और एक्जिमा जैसी समस्याएं होने का खतरा रहता है। हैलट के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. यशवंत राव का कहना है कि अगर बच्चों के लिए लगातार एल्युमिनियम के बर्तनों में खाना बनाया जाए और वह लंबे समय तक स्टोर भी किया जाए तो इसका सीधा असर किडनी पर पड़ता है। जिनकी किडनी पहले से प्रभावित हैं उनके लिए खतरा दोगुना बढ़ जाता है।
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