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कागजों में कांटैक्ट ट्रेसिंग, निष्क्रिय पड़ीं आरआरटी
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कानपुर देहात। जिले में कोरोना संक्रमितों के संपर्क में आने वाले लोगों की जांच के नाम पर जमकर लापरवाही की जा रही है। नियमों के अनुसार एक संक्रमित के संपर्क में आए 25 लोगों की जांच की जानी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है।
यही कारण है कि जिले में संक्रमितों की संख्या घटने का नाम नहीं ले रही है। वहीं जिन गांवों में बुखार पीड़ित ग्रामीणों की संख्या अधिक है वहां आरआरटी टीम सैंपल लेने तक नहीं पहुंच रही है। इससे जिले में आरआरटी की सक्रियता पर सवाल उठने लगे हैं।
एक अप्रैल से 17 मई तक जिले में करीब 70 हजार लोगों की जांच हो चुकी है। इसमें अभी तक तीन हजार 926 लोग संक्रमित निकल चुके हैं। कोरोना संक्रमितों के संपर्क में आने वाले लोगों की जांच के लिए दस ब्लॉकों में 60 आरआरटी टीमें बनाई गईं। इन्हें प्रति संक्रमित के संपर्क में आए कम से कम 25 लोगों की जांच के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जांच के नाम पर महज कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं।
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राजपुर क्षेत्र के बैना गांव मेें 17 अप्रैल से अब तक कुल 44 कोरोना संक्रमित निकले। नियमानुसार करीब 1100 लोगों की जांच होनी चाहिए, लेकिन अभी तक सिर्फ 238 लोगों का सैंपल लेकर जांच कराई गई। यही हाल रसूलाबाद, संदलपुर सहित अन्य ब्लॉक क्षेत्र के गांवों का है। बड़ी बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग बुखार के मामले में भी लापरवाही कर रहा है।
जिले के कई गांवों में एक सैकड़ा से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। दबाव पड़ने पर कुछ गांवों में टीम गई, दवा देकर औपचारिकता पूरी कर दी। जबकि गांव के बीमार अन्य लोगों का सैंपल तक लेना उचित नहीं समझा। विभाग के मुताबिक अभी तक किसी भी गांव से एक सैंपल तक नहीं लिया गया है।
नौ गांवों में बुखार से हो चुकी 52 की मौत
संदलपुर। संदलपुर ब्लॉक के नौ गांवों में बुखार का प्रकोप ज्यादा देखने को मिल रहा है। यहां अभी तक 52 लोगों की बुखार से मौत हो चुकी है। 150 से अधिक लोग बीमार हैं। बड़ी बात यह है कि एक भी गांवों में स्वास्थ्य टीम नहीं पहुंची। इससे न तो उन्हें बेहतर उपचार मिल पा रहा है। न ही उनकी जांच हो पा रही है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद ब्लॉक के जरौली में 13, नैपलापुर में 10, अमौली में 16, कसोलर में 15, संदलपुर, जगदीशपुर, प्रयागपुर, हवासपुर में एक-एक लोगों की बुखार से मौत हो चुकी है। इन गांवों में काफी संख्या में लोग बीमार पड़े हैं। नैपलापुर गांव के संतोष कुमार, डबरापुर गांव के प्रधान रमेश चंद्र कुशवाहा ने बताया कि मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी गई।
शनिवार को टीम गांव पहुंची। वहां दो लोगों की कोविड जांच के लिए सैंपल लेने के बाद वह गांव से चले गए। जबकि उन्हें अन्य लोगों को भी बुखार आने की जानकार दी गई, लेकिन उन्होंने अनसुना कर दिया। अभी लोग बुखार से परेशान हैं। झोलाछाप से इलाज कराने को मजबूर है।
33 गांवों में एक का भी नहीं लिया गया सैंपल
संदलपुर। ब्लॉक के 33 ऐसे गांव हैं, जहां अब 67 कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आ चुके हैं। मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को भी है। इसके बाद भी संक्रमितों के संपर्क में आए एक भी व्यक्ति का कोरोना जांच के लिए सैंपल नहीं लिया गया। ग्रामीणों की माने तो इन गांवों में आरआर टीम तक नहीं पहुंची है।
विभागीय सूत्रों की माने तो हवासपुर सीएचसी में आने वाले फरीदपुर निर्टरा, चकही, जलालपुर, भंदेमऊ, तेरा, ररौख आदि 33 गांवों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद 67 लोग कोरोना पॉजिटिव निकल चुके हैं। संबंधित एरिया को हॉटस्पॉट भी बनाया गया, लेकिन गांव के एक भी ऐसे व्यक्ति का सैंपल नहीं लिया गया, जो संक्रमित के संपर्क में रहा हो।
होम आइसोलेट मरीजों तक नहीं पहुंच रही दवा
संदलपुर। चुनाव के दौरान अलग-अलग गांव के दो लोग कोरोना पॉजिटिव निकले थे। सीएचसी से फोन पर उन्हें रिपोर्ट की जानकारी दी गई। इसके बाद विभाग की ओर से न तो दवा पहुंचाई गई, न ही किसी ने फोन पर उनके हाल जाने। हालात यह है कि अब वह गांव में खुलेआम घूम रहे हैं। गांव के अन्य लोग दहशत में हैं। इसके बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
दस-दस संक्रमित के सापेक्ष कम लोगों का लिया सैंपल
रसूलाबाद। रसूलाबाद ब्लॉक के सौंज व माल का पुरवा गांव में अब तक दस-दस संक्रमित निकल चुके हैं। नियमानुसार इन गांव में संपर्क में आए 250-250 लोगों की जांच होनी चाहिए, लेकिन इन गांवों में भी विभाग की ओर से लापरवाही की गई। विभाग के मुताबिक सौंज में महज 78 व माल का पुरवा में 82 लोगों की जांच के लिए सैंपल लिया गया।
बुजुर्ग संक्रमित होने के बाद ठीक भी हो गया, विभाग को पता नहीं
कानपुर देहात। झींझक कस्बे के एक मोहल्ले में एक बुुजुर्ग ने बुखार आने के बाद कानपुर के निजी अस्पताल में जांच कराई। वहां एंटीजन किट जांच में कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। दावा किया जाता है कि जांच कहीं भी हो रिपोर्ट पोर्टल पर डाली जाती है।
जिससे संबंधित जिले के स्वास्थ्य विभाग को जानकारी हो सके और संक्रमित का उपचार हो सके, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बुजुर्ग स्वयं होम आइसोलेट रहकर निजी अस्पताल से उपचार कराने के बाद ठीक हो गया। संपर्क में आने वाले लोग घूमते रहे।
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यही कारण है कि जिले में संक्रमितों की संख्या घटने का नाम नहीं ले रही है। वहीं जिन गांवों में बुखार पीड़ित ग्रामीणों की संख्या अधिक है वहां आरआरटी टीम सैंपल लेने तक नहीं पहुंच रही है। इससे जिले में आरआरटी की सक्रियता पर सवाल उठने लगे हैं।
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एक अप्रैल से 17 मई तक जिले में करीब 70 हजार लोगों की जांच हो चुकी है। इसमें अभी तक तीन हजार 926 लोग संक्रमित निकल चुके हैं। कोरोना संक्रमितों के संपर्क में आने वाले लोगों की जांच के लिए दस ब्लॉकों में 60 आरआरटी टीमें बनाई गईं। इन्हें प्रति संक्रमित के संपर्क में आए कम से कम 25 लोगों की जांच के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जांच के नाम पर महज कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं।
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राजपुर क्षेत्र के बैना गांव मेें 17 अप्रैल से अब तक कुल 44 कोरोना संक्रमित निकले। नियमानुसार करीब 1100 लोगों की जांच होनी चाहिए, लेकिन अभी तक सिर्फ 238 लोगों का सैंपल लेकर जांच कराई गई। यही हाल रसूलाबाद, संदलपुर सहित अन्य ब्लॉक क्षेत्र के गांवों का है। बड़ी बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग बुखार के मामले में भी लापरवाही कर रहा है।
जिले के कई गांवों में एक सैकड़ा से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। दबाव पड़ने पर कुछ गांवों में टीम गई, दवा देकर औपचारिकता पूरी कर दी। जबकि गांव के बीमार अन्य लोगों का सैंपल तक लेना उचित नहीं समझा। विभाग के मुताबिक अभी तक किसी भी गांव से एक सैंपल तक नहीं लिया गया है।
नौ गांवों में बुखार से हो चुकी 52 की मौत
संदलपुर। संदलपुर ब्लॉक के नौ गांवों में बुखार का प्रकोप ज्यादा देखने को मिल रहा है। यहां अभी तक 52 लोगों की बुखार से मौत हो चुकी है। 150 से अधिक लोग बीमार हैं। बड़ी बात यह है कि एक भी गांवों में स्वास्थ्य टीम नहीं पहुंची। इससे न तो उन्हें बेहतर उपचार मिल पा रहा है। न ही उनकी जांच हो पा रही है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद ब्लॉक के जरौली में 13, नैपलापुर में 10, अमौली में 16, कसोलर में 15, संदलपुर, जगदीशपुर, प्रयागपुर, हवासपुर में एक-एक लोगों की बुखार से मौत हो चुकी है। इन गांवों में काफी संख्या में लोग बीमार पड़े हैं। नैपलापुर गांव के संतोष कुमार, डबरापुर गांव के प्रधान रमेश चंद्र कुशवाहा ने बताया कि मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी गई।
शनिवार को टीम गांव पहुंची। वहां दो लोगों की कोविड जांच के लिए सैंपल लेने के बाद वह गांव से चले गए। जबकि उन्हें अन्य लोगों को भी बुखार आने की जानकार दी गई, लेकिन उन्होंने अनसुना कर दिया। अभी लोग बुखार से परेशान हैं। झोलाछाप से इलाज कराने को मजबूर है।
33 गांवों में एक का भी नहीं लिया गया सैंपल
संदलपुर। ब्लॉक के 33 ऐसे गांव हैं, जहां अब 67 कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आ चुके हैं। मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को भी है। इसके बाद भी संक्रमितों के संपर्क में आए एक भी व्यक्ति का कोरोना जांच के लिए सैंपल नहीं लिया गया। ग्रामीणों की माने तो इन गांवों में आरआर टीम तक नहीं पहुंची है।
विभागीय सूत्रों की माने तो हवासपुर सीएचसी में आने वाले फरीदपुर निर्टरा, चकही, जलालपुर, भंदेमऊ, तेरा, ररौख आदि 33 गांवों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद 67 लोग कोरोना पॉजिटिव निकल चुके हैं। संबंधित एरिया को हॉटस्पॉट भी बनाया गया, लेकिन गांव के एक भी ऐसे व्यक्ति का सैंपल नहीं लिया गया, जो संक्रमित के संपर्क में रहा हो।
होम आइसोलेट मरीजों तक नहीं पहुंच रही दवा
संदलपुर। चुनाव के दौरान अलग-अलग गांव के दो लोग कोरोना पॉजिटिव निकले थे। सीएचसी से फोन पर उन्हें रिपोर्ट की जानकारी दी गई। इसके बाद विभाग की ओर से न तो दवा पहुंचाई गई, न ही किसी ने फोन पर उनके हाल जाने। हालात यह है कि अब वह गांव में खुलेआम घूम रहे हैं। गांव के अन्य लोग दहशत में हैं। इसके बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
दस-दस संक्रमित के सापेक्ष कम लोगों का लिया सैंपल
रसूलाबाद। रसूलाबाद ब्लॉक के सौंज व माल का पुरवा गांव में अब तक दस-दस संक्रमित निकल चुके हैं। नियमानुसार इन गांव में संपर्क में आए 250-250 लोगों की जांच होनी चाहिए, लेकिन इन गांवों में भी विभाग की ओर से लापरवाही की गई। विभाग के मुताबिक सौंज में महज 78 व माल का पुरवा में 82 लोगों की जांच के लिए सैंपल लिया गया।
बुजुर्ग संक्रमित होने के बाद ठीक भी हो गया, विभाग को पता नहीं
कानपुर देहात। झींझक कस्बे के एक मोहल्ले में एक बुुजुर्ग ने बुखार आने के बाद कानपुर के निजी अस्पताल में जांच कराई। वहां एंटीजन किट जांच में कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। दावा किया जाता है कि जांच कहीं भी हो रिपोर्ट पोर्टल पर डाली जाती है।
जिससे संबंधित जिले के स्वास्थ्य विभाग को जानकारी हो सके और संक्रमित का उपचार हो सके, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बुजुर्ग स्वयं होम आइसोलेट रहकर निजी अस्पताल से उपचार कराने के बाद ठीक हो गया। संपर्क में आने वाले लोग घूमते रहे।