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यहां सिमटती चली गई कांग्रेस की जमीन, रनर पोजीशन के भी लाले पड़ गए
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 29 Jan 2017 06:17 PM IST
सार
- 1991 के चुनाव से घटने लगा था वोट प्रतिशत
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विस्तार
कन्नौज की राजनीति में कांग्रेस का स्वर्णयुग 1980 के विधानसभा चुनाव तक देखने को मिला है। यहां पर तीन विधानसभा सीटों में तो सीटों पर कांग्रेस के दिग्गजों ने जीत हासिल की थी। इसके बाद से कांग्रेस का वोट प्रतिशत घटता चला गया। हम बात कर रहे हैं यूपी की इत्रनगरी कहलाने वाले कन्नौज जिले की।
आज कन्नौज जिले में कांग्रेस की हालत इतनी पतली हो चुकी है कि उसे चुनावी जंग में बाहर मान लिया गया है। अगर आप कांग्रेस के चुनावी विश्लेषणों पर नजर डाले तो सदर विधानसभा में कांग्रेस ने अंतिम जीत 1985 के चुनाव में दर्ज कराई थी। इस चुनाव में बिहारी लाल दोहरे चुनाव जीते थे। इसके बाद से सदर विधानसभा में कांग्रेस का हर वार खाली निकला। जीत हासिल करना तो दूर प्रत्याशी को रनर पोजीशन के भी लाले पड़ गए। 1985 में कांग्रेस का 49.99 फीसदी का वोट बैंक 2012 के चुनाव में सिमटकर 2.35 रह गया।
वहीं छिबरामऊ विधानसभा सीट से 1985 में कांग्रेस ने अंतिम बार जीत का स्वाद चखा था। इस सीट पर कांग्रेस के संतोष ने 34.52 फीसदी मत पाकर जीत हासिल की थी। इसके बाद से कांग्रेस की चुनावी जमीन लगातार सिमटती चली गई। साल 2012 के चुनाव में कांग्रेस का वोटबैंक छिबरामऊ विधानसभा में 4.31 फीसदी ही रह गया।
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तत्कालीन उर्मदा व वतर्मान में तिर्वा सीट पर कांग्रेस की अंतिम जीत 1980 के चुनाव में कुंवर योगेंद्र सिंह के नाम दर्ज है। इस चुनाव में योगेंद्र सिंह ने 41.29 फीसदी मत हासिल किए थे। कांग्रेस के वोटबैंक का यह प्रतिशत साल 2012 के चुनाव में गिरकर 6.56 फीसदी ही रह गया था। साल 2012 के चुनाव कांग्रेस के लिए किसी शर्मनाक पराजय के कम नहीं थे। खिसकती जमीन और घटते जनाधार के चलते कांग्रेस ने इस बार चुनावी समर के कन्नौज में किनारा कर लिया है।
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विधानसभा- कन्नौज
साल घटता वोट बैंक
1985 49.99 (जीत)
1991 16.4
1993 2.81
1996 ----
2002 1.61
2007 1.76
2012 2.35
------------------------------------------
विधानसभा- छिबरामऊ
साल वोट बैंक
1985 34.52(जीते)
1989 24.09
1991 11.94
1993 10.92
1996 ---
2002 4.31
2007 5.06
2012 4.31
-------------------------------------
विधानसभा- तिर्वा
साल वोट प्रतिशत
1980 41.09
1985 40.73
1989 34.41
1991 31.19
1993 8.98
1996 ----
2002 2.47
2007 10.31
2012 6.56
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आज कन्नौज जिले में कांग्रेस की हालत इतनी पतली हो चुकी है कि उसे चुनावी जंग में बाहर मान लिया गया है। अगर आप कांग्रेस के चुनावी विश्लेषणों पर नजर डाले तो सदर विधानसभा में कांग्रेस ने अंतिम जीत 1985 के चुनाव में दर्ज कराई थी। इस चुनाव में बिहारी लाल दोहरे चुनाव जीते थे। इसके बाद से सदर विधानसभा में कांग्रेस का हर वार खाली निकला। जीत हासिल करना तो दूर प्रत्याशी को रनर पोजीशन के भी लाले पड़ गए। 1985 में कांग्रेस का 49.99 फीसदी का वोट बैंक 2012 के चुनाव में सिमटकर 2.35 रह गया।
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वहीं छिबरामऊ विधानसभा सीट से 1985 में कांग्रेस ने अंतिम बार जीत का स्वाद चखा था। इस सीट पर कांग्रेस के संतोष ने 34.52 फीसदी मत पाकर जीत हासिल की थी। इसके बाद से कांग्रेस की चुनावी जमीन लगातार सिमटती चली गई। साल 2012 के चुनाव में कांग्रेस का वोटबैंक छिबरामऊ विधानसभा में 4.31 फीसदी ही रह गया।
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तत्कालीन उर्मदा व वतर्मान में तिर्वा सीट पर कांग्रेस की अंतिम जीत 1980 के चुनाव में कुंवर योगेंद्र सिंह के नाम दर्ज है। इस चुनाव में योगेंद्र सिंह ने 41.29 फीसदी मत हासिल किए थे। कांग्रेस के वोटबैंक का यह प्रतिशत साल 2012 के चुनाव में गिरकर 6.56 फीसदी ही रह गया था। साल 2012 के चुनाव कांग्रेस के लिए किसी शर्मनाक पराजय के कम नहीं थे। खिसकती जमीन और घटते जनाधार के चलते कांग्रेस ने इस बार चुनावी समर के कन्नौज में किनारा कर लिया है।
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विधानसभा- कन्नौज
साल घटता वोट बैंक
1985 49.99 (जीत)
1991 16.4
1993 2.81
1996 ----
2002 1.61
2007 1.76
2012 2.35
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विधानसभा- छिबरामऊ
साल वोट बैंक
1985 34.52(जीते)
1989 24.09
1991 11.94
1993 10.92
1996 ---
2002 4.31
2007 5.06
2012 4.31
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विधानसभा- तिर्वा
साल वोट प्रतिशत
1980 41.09
1985 40.73
1989 34.41
1991 31.19
1993 8.98
1996 ----
2002 2.47
2007 10.31
2012 6.56