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Kanpur News: पनकी और फतेहपुर की कंपनियों ने डंप किया था खतरनाक क्रोमियमयुक्त कचरा
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कानपुर। पुरवामीर सहित पांच जगह क्रोमियमयुक्त खतरनाक कचरे की अवैध डंपिंग करने वाली दो कंपनियां की पहचान हो गई है। इन पर कड़ी कार्रवाई न होने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने राज्य सरकार के अधिकारियों से जवाब मांगा है। एनजीटी ने कहा कि यदि पर्यावरण कानूनों के अलावा अन्य कानूनों के तहत भी कार्रवाई का प्रावधान है तो उल्लंघन करने वालों के खिलाफ उस पर भी विचार किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी 2027 को होगी।
दिल्ली में एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने जाजमऊ टेनरियों से जल प्रदूषण और रनिया, राखी मंडी और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में खतरनाक कचरे की डंपिंग से जुड़े मामलों की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की पांच सदस्यीय समिति ने कानपुर नगर में पांच स्थानों पर अवैध रूप से डंप किए गए खतरनाक कचरे की पहचान की है।
हलफनामे के अनुसार, फतेहपुर के बिंदकी क्षेत्र के रसूलपुर स्थित मेसर्स आशियाना केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को चार स्थानों पर क्रोमियम कचरा डालने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। वहीं, पनकी औद्योगिक क्षेत्र साइट-1 स्थित मेसर्स खन्ना विवेक केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को भौंती बाईपास पर भारत पेट्रोलपंप के पास कचरा डालने के लिए जिम्मेदार बताया गया है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, डंप किए गए 415.94 मीट्रिक टन खतरनाक कचरे को हटाया गया। नमी घटाने के बाद इसकी मात्रा 264.575 मीट्रिक टन बताई गई है। कचरे को कुंभी, अकबरपुर स्थित कॉमन ट्रीटमेंट, स्टोरेज एंड डिस्पोजल फैसिलिटी (टीएसडीएफ) तक पहुंचाकर वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित किया गया। रिपोर्ट में पांचों स्थलों को कचरे से मुक्त बताया गया है।
क्रोमियम प्रदूषण से प्रभावित क्षेत्रों में जनवरी से सितंबर 2026 के बीच कानपुर नगर, कानपुर देहात और फतेहपुर में 238 स्वास्थ्य शिविर लगाए गए। इनमें 8035 लोगों की जांच की गई। कानपुर नगर में 80 शिविरों में 3772, कानपुर देहात में 86 शिविरों में 3007 और फतेहपुर में 72 शिविरों में 1256 लोगों की जांच हुई।
एनजीटी में दाखिल स्वास्थ्य विभाग के हलफनामे के मुताबिक, विशेषज्ञ समिति ने कहा है कि खून में क्रोमियम का स्तर बढ़ा होने के बावजूद यदि किसी व्यक्ति में विषाक्तता के विशिष्ट लक्षण नहीं हैं तो उसके लिए विशेष उपचार की सिफारिश नहीं की गई है। प्रभावितों के उपचार और आगे की निगरानी के लिए एम्स, नई दिल्ली से विशेषज्ञों की टीम और उपयुक्त प्रोटोकॉल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। एनजीटी को बताया गया कि एम्स की ओर से जवाब अभी नहीं मिला है।
जीएसवीएम में जांच प्रयोगशाला की समयसीमा नहीं
एनजीटी ने कहा कि जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में हैवी मेटल टेस्टिंग लैब स्थापित करने के संबंध में जानकारी दी गई है लेकिन इसके लिए कोई समयसीमा नहीं बताई गई। वहीं, आईआईटी कानपुर की कार्ययोजना के तहत प्रदूषण प्रभावित हॉटस्पॉट से नमूने लेने, प्रयोगशाला में जांच, वायु गुणवत्ता की निगरानी और जीआईएस मैपिंग जैसे काम किए जा रहे हैं। नवंबर 2026 से तकनीकी सिफारिशें तैयार करने की योजना है। अधिकरण ने राज्य के संबंधित अधिकारियों को आगे का हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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दिल्ली में एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने जाजमऊ टेनरियों से जल प्रदूषण और रनिया, राखी मंडी और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में खतरनाक कचरे की डंपिंग से जुड़े मामलों की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की पांच सदस्यीय समिति ने कानपुर नगर में पांच स्थानों पर अवैध रूप से डंप किए गए खतरनाक कचरे की पहचान की है।
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हलफनामे के अनुसार, फतेहपुर के बिंदकी क्षेत्र के रसूलपुर स्थित मेसर्स आशियाना केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को चार स्थानों पर क्रोमियम कचरा डालने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। वहीं, पनकी औद्योगिक क्षेत्र साइट-1 स्थित मेसर्स खन्ना विवेक केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को भौंती बाईपास पर भारत पेट्रोलपंप के पास कचरा डालने के लिए जिम्मेदार बताया गया है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, डंप किए गए 415.94 मीट्रिक टन खतरनाक कचरे को हटाया गया। नमी घटाने के बाद इसकी मात्रा 264.575 मीट्रिक टन बताई गई है। कचरे को कुंभी, अकबरपुर स्थित कॉमन ट्रीटमेंट, स्टोरेज एंड डिस्पोजल फैसिलिटी (टीएसडीएफ) तक पहुंचाकर वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित किया गया। रिपोर्ट में पांचों स्थलों को कचरे से मुक्त बताया गया है।
क्रोमियम प्रदूषण से प्रभावित क्षेत्रों में जनवरी से सितंबर 2026 के बीच कानपुर नगर, कानपुर देहात और फतेहपुर में 238 स्वास्थ्य शिविर लगाए गए। इनमें 8035 लोगों की जांच की गई। कानपुर नगर में 80 शिविरों में 3772, कानपुर देहात में 86 शिविरों में 3007 और फतेहपुर में 72 शिविरों में 1256 लोगों की जांच हुई।
एनजीटी में दाखिल स्वास्थ्य विभाग के हलफनामे के मुताबिक, विशेषज्ञ समिति ने कहा है कि खून में क्रोमियम का स्तर बढ़ा होने के बावजूद यदि किसी व्यक्ति में विषाक्तता के विशिष्ट लक्षण नहीं हैं तो उसके लिए विशेष उपचार की सिफारिश नहीं की गई है। प्रभावितों के उपचार और आगे की निगरानी के लिए एम्स, नई दिल्ली से विशेषज्ञों की टीम और उपयुक्त प्रोटोकॉल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। एनजीटी को बताया गया कि एम्स की ओर से जवाब अभी नहीं मिला है।
जीएसवीएम में जांच प्रयोगशाला की समयसीमा नहीं
एनजीटी ने कहा कि जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में हैवी मेटल टेस्टिंग लैब स्थापित करने के संबंध में जानकारी दी गई है लेकिन इसके लिए कोई समयसीमा नहीं बताई गई। वहीं, आईआईटी कानपुर की कार्ययोजना के तहत प्रदूषण प्रभावित हॉटस्पॉट से नमूने लेने, प्रयोगशाला में जांच, वायु गुणवत्ता की निगरानी और जीआईएस मैपिंग जैसे काम किए जा रहे हैं। नवंबर 2026 से तकनीकी सिफारिशें तैयार करने की योजना है। अधिकरण ने राज्य के संबंधित अधिकारियों को आगे का हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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