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Chitrakoot Treasury Scam: पुलिस हिरासत में मुख्य आरोपी की मौत, 24 घंटे से अधिक कोतवाली में रखा, पढ़ें मामला

Sun, 19 Oct 2025 05:36 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 19 Oct 2025 05:36 PM IST
सार

Chitrakoot News: 43.13 करोड़ ट्रेजरी घोटाले के मुख्य आरोपी संदीप श्रीवास्तव की इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज में हिरासत के दौरान मौत हो गई। बताया जा रहा है कि आरोपी को 24 घंटे से अधिक समय तक बिना वारंट कोतवाली में रखा गया था।

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Chitrakoot Treasury Scam Main accused dies in police custody serious questions raised on the role of SP and DM
मृतक संदीप - फोटो : amar ujala

विस्तार

चित्रकूट के बहुचर्चित 43.13 करोड़ रुपये के ट्रेजरी घोटाले में रविवार को बड़ा मोड़ आ गया। इस घोटाले के मुख्य आरोपी संदीप श्रीवास्तव की इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत के साथ ही अब इस प्रकरण में प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

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सूत्रों के अनुसार, संदीप को दो दिन पहले कोतवाली पुलिस पूछताछ के लिए लाई थी। बताया गया कि शनिवार शाम उसकी हालत कोतवाली में अचानक बिगड़ गई। आनन-फानन में उसे जिला चिकित्सालय कर्वी लाया गया, जहां सीएमओ, सीएमएस और अपर पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में प्राथमिक इलाज किया गया।

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24 घंटे से अधिक समय तक कोतवाली में क्यों रखा
हालत गंभीर होने पर उसे मेडिकल कॉलेज इलाहाबाद रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान रविवार को उसकी मौत हो गई। अब यह सवाल उठ रहा है कि पुलिस ने आरोपी को बिना किसी मजिस्ट्रेटी आदेश या लिखित अनुमति के 24 घंटे से अधिक समय तक कोतवाली में क्यों रखा।

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प्रशासनिक स्तर पर मामले को दबाने की कोशिश
यह भी जानकारी सामने आई है कि जिला चिकित्सालय में भर्ती की प्रक्रिया पुलिस की बजाय आरोपी के भाई के माध्यम से कराई गई थी। इससे यह शक गहराता जा रहा है कि मामले को प्रशासनिक स्तर पर दबाने की कोशिश की गई।

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एसपी ने दी जानकारी
वहीं इस पूरे मामले में एसपी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर संदीप शनिवार को कोतवाली पहुंचे थे। जांच टीम उनसे पूछताछ कर रही थी। इसी दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी। उन्होंने हार्ट पेशेंट होने की जानकारी दी। तत्काल उनके भाई को बुलाकर जिला अस्पताल कर्वी भेजा गया। सीएमओ, सीएमएस और अपर पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में प्राथमिक इलाज हुआ। डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर बताकर उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। उन्हें प्रयागराज मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां उनकी मृत्यु हो गई।

दो दिन पहले संदिप को लाया गया था कोतवाली
सूत्रों का कहना है कि संदीप को दो दिन पहले कोतवाली लाया गया था और शनिवार शाम को कोतवाली परिसर में ही उनकी तबीयत बिगड़ी। इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं कि बिना मजिस्ट्रेटी आदेश या लिखित अनुमति के आरोपी को 24 घंटे से अधिक कोतवाली में क्यों रखा गया। यह भी सामने आया है कि जिला अस्पताल में भर्ती कराने की प्रक्रिया आरोपी के भाई द्वारा कराई गई थी, न कि पुलिस द्वारा, जिससे पूरा घटनाक्रम और संदिग्ध प्रतीत हो रहा है। इस पूरे प्रकरण में डीएम की भूमिका सार्वजनिक रूप से केवल मूकदर्शक की है। मृतक का परिवार इस घटना से गहरे सदमे और भय में है। वे खुलकर कुछ नहीं कहना चाहते।

स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग
अब तक जांच टीम ने करीब 20 लोगों से पूछताछ की है, लेकिन किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। संदीप की मौत के बाद अब जांच केवल वित्तीय गड़बड़ी तक सीमित नहीं रही बल्कि हिरासत प्रक्रिया, पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही के इर्द-गिर्द भी घूमने लगी है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि यह मौत कहीं जांच को असली चेहरों तक पहुंचने से रोकने की साजिश तो नहीं। लोगों ने स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग शुरू कर दी है ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष सच्चाई सामने आ सके।

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